संतोष कुमार सिंह
अक्टूबर में प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र काशी में गंगा संसद का आयोजन होगा- स्वामी अभिमुक्तेश्वरानन्द
नयी दिल्ली: मानव सभ्यता का अस्तित्व बचाने के लिए नदियों को बचाना होगा। लोगों की जिन्दगी और बच्चों का भविष्य बचाने के लिए नदियों का पुनर्जीवन अति आवश्यक है। जब तक हम प्रकृति को आदर नहीं देंगे, तब तक प्राकृतिक आपदाओं से मुक्ति संभव नहीं है। प्रकृति का अंधाधुंध शोषण जलवायु परिवर्तन एवं मानव की उपभोक्तावादी मानसिकता का प्रमुख कारण है। नदियों के पुर्नजीवन का काम सरकार कभी भी अकेले नही कर सकती। जब तक समाज सरकार के साथ सहयोग नहीं करेगा, तब तक नदियों को पुर्नजीवित नहीं किया जा सकता।’’
उपरोक्त विचार जल जन जोडो अभियान, तरुण भारत संघ और जल बिरादरी द्वारा गांधी शान्ति प्रतिष्ठान में आयोजित नदी पुनर्जीवन सम्मेलन में देश भर से आये जलकर्मियों, जल सहेलियों, जलदूतों को सम्बोधित करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान ने व्यक्त किये।
मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के पुनर्जीवन के 5 महीने 5 दिन तक चले पदयात्रा के महाभियान के अनुभव को सांझा करते हुए मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नर्मदा को बचाने के लिए गाँव गाँव में नर्मदा सेवा यात्रा से उत्सव का माहौल बना और लोगों ने संकल्प लिया कि नर्मदा की धारा को अविरल बनायेगें। मध्यप्रदेश शासन ने नर्मदा कार्य योजना के तहत् उन्होनें नर्मदा के किनारे पेड लगाने और घाटों को साफ रखने तथा नर्मदा के किनारे के क्षेत्र को शराब मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंनें कहा कि नारी और नदी के सम्मान के बगैर समाज का संचालन संभव नहीं है।
मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदा की तरह शिप्रा तथा अन्य नदियों के पुनर्जीवन करने की भी घोषणा की। उन्होनंें कहा कि नर्मदा नदी के दोनों तटों पर दस-दस किलोमीटर तक आगामी 02 और 11 जुलाई को बारह करोड पौधों का रोपण किया जायेगा। इस अवसर पर नर्मदा सेवा मिशन का दस्तावेज का लोकार्पण भी किया गया। उन्होंनें मध्यप्रदेश की नदियों के पुनर्जीवन में जल एवं पर्यावरण सरंक्षण हेतु कार्य कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं का सहयोग लिया जायेगा तथा उन्हीं की अगुवाई में यह कार्य सम्पन्न किया जायेगा।
सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए स्टाॅकहोम वाटर प्राइज से सम्मानित जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने कहा कि समाज को पानीदार बनाने के लिए नीर, नारी और नदी का सम्मान करना होगा। आज से समाज को जिन्दा रखने के लिए किसी एक नदी को जीवित करने से काम नहीं चलेगा, हमे देश की जीवनदायिनी समस्त नदियों को धारा को अविरल बनाने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होनंें सरकार से जल सुरक्षा कानून बनाये जाने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को सबसे पहले जल सुरक्षा कानून बनाना चाहिए, क्योंकि जल सुरक्षा कानून के बिना खाद्य सुरक्षा संभव नहीं है। उन्होनें नर्मदा सेवा यात्रा की तरह देश की समस्त नदियों को जीवित रखने और उनकी धारा को अविरल बनाने के लिए देशव्यापी जल साक्षरता की आवश्यकता पर बल दिया।
स्वामी अभिमुक्तेश्वरानन्द ने कहा कि आज की दुनिया बाजार बन गई है। सुख का कोई विके्रता नहीं है और दुख का कोई के्रता नहीं, ऐसे में हमें उदारतापूर्वक सुख और दुख दोनो का संतुलन बनाना होगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नदी मां गंगा की तरह पवित्र है। समाज को शासन और प्रशासन के साथ मिलकर देश की समस्त नदियों के पुनर्जीवन का काम करना होगा। यदि शासन और प्रशासन सहयोग न करे, तो समाज को यह उत्तरदायित्व अपने हाथों में लेना चाहिए तथा राजस्थान में जीवित की गई नदियों की तरह उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंनें अपने सम्बोधन में मुख्यमन्त्री शिवरातज सिंह चैहान को नदी नायक तथा राजेन्द्र सिंह को जल संत की उपाधि देकर उनके नदी पुनर्जीवन के कार्यों की सफलता की मंगल कामना की। इस अवसर पर स्वामी जी ने प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अक्टूबर माह में गंगा संसद के आयोजन की घोषणा की।
इस अवसर पर जल जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह ने कहा कि सरकार को समाज की आवश्यकता के अनुरुप जल सुरक्षा कानून बनाना चाहिए, जिसमें नदियों के साथ-साथ तालाबों, झीलों, कुआंें, बाबडियों, पोखरों की अविरलता सुनिश्चित करना चाहिए। अगर देश की जल संस्कृति जिन्दा रहेगी, तो हमारा समाज भी जिन्दा रहेगा। उन्होनंे कहा कि जब तक आम नागरिकों को जल उपलब्धता का संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक हम अपना संघर्ष जारी रखेगें। पानी के अधिकार में समाज के निर्धनतम वर्ग को जल उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी।
सम्मेलन जल सुरक्षा कानून के प्रस्तावित प्रारुप पर विचार विमर्श किया गया। इस अवसर पर देशभर में जलसंरक्षण की दिशा में काम कर रहे सैंकडों सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि प्रस्तावित जल सुरक्षा बिल के प्रारुप को आम जनमानस के समक्ष संचार के विविध माध्यमों से सुझाव पे्रषित करने हेतु प्रस्तुत किया जायेगा, तत्पश्चात् एक माह बाद केन्द्र सरकार को जल सुरक्षा कानून के प्रारुप को प्रेषित कर कानून संसद में पारित कराने हेतु प्रेषित किया जायेगा। जल सुरक्षा कानून के निर्माण व दुष्काल मुक्त भारत के निर्माण हेतु आगामी 28 मई से कन्याकुमारी से जल यात्रा प्रारम्भ की जायेगी, जिसका समापन दिल्ली में किया जायेगा।
सम्मेेलन का संचालन जल जन जोडो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह ने किया।
