कृषि वैज्ञानिकों का आदर्श गांव, लेकिन गांव के किसानों को पता ही नहीं

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पंचायत खबर टोली

  • केवीके पिलखी द्वारा गोद लिया गया गांव है सरवां,बदलाव का नहीं है नामो निशानमऊ : नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में गांव गोद लेने का चलन शुरू हुआ है। राष्ट्रपति ने गांव गोद लिया। सांसदों ने गांव गोद लिया..यहां तक कि कृषि विकास केंद्रों ने भी गांव गोद लेने की शुरूआत की। लेकिन दुखद तथ्य यह है कि उस बच्चे को ​पता ही नहीं जिसे गोद लिया गया है। कुछ यही सूरते हाल है पिलखी के इस गांव का। अजीब है न कि जिस गांव को गोद लिया गया हो, वहां के लोगों को ही इसका पता नहीं है। आधे-अधुरे कार्यों के भरोसे और बजट के अभाव में कोई प्रयास न होने की बानगी है जिले का सरवां गांव। कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी द्वारा आदर्श गांव के रुप में जून 2014 में गोद लिया गया गांव सरवां में कोई भी कार्य सुचारु रुप से नहीं किया जा सका है। 20-25लोगों का हाल जानकर पूरे गांव का सर्वे मान लिए जाने सहित अब तक गांव में काेई भी कार्य नहीं किया जा सका है। डेढ़ साल में मात्र पांच किसानों को छह किलो पशुओं को खनिज मिश्रण देकर अपने  कर्तव्य की इति श्री कर ली गई। विश्वविद्यालय द्वारा बजट न मिलने की बात कहने वाले वैज्ञानिकों की कार्य प्रणाली भी संदेह के दायरे में है। हद तो यह कि जब डेढ़ वर्ष गुजरने के बाद भी गांव के अधिकांश लोगाें को पता ही नहीं है कि उनके गांव के आदर्श गांव के रुप में चयनित भी किया गया है।
    बस नाम है कि गांव गोद लिया
    जून 2014 में खेती-किसानी को आधुनिक रुप देते हुए ग्रामीण स्तर पर रोजगार की उपलब्धता कराने के ध्येय से कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी ने परदहां ब्लाकके सरवां ग्रामसभा को आदर्श गांव के रुप में गोद लिया। बिना किसी आधार के प्राथमिक स्तर पर 20-25 लोगों से मिलकर ही गांव के सर्वे कार्य को पूर्ण मान लिया गया। इसके बाद खरीफ, रबी, जायद फिर खरीफ का सीजन बीत गया पर केंद्र द्वारा एक भी किसान के प्रक्षेत्र पर प्रथम पंक्ति प्रदर्शन नहीं हो पाया। इस दिशा में ग्रामीणों को जागरुक भी नहीं किया गया। कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा के साथ प्रशिक्षण व अन्य कार्य भी गांव में नहीं कराए जा सके हैं।

    पांच गांव गोद लिया था वै​ज्ञानिकों ने

    कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी द्वारा जिले के पांच गांव सेमरी जमालपुर, खुखुंदवा, परमानंदपट्टी, सरवां और रामपुर सोहड़ को आदर्श गांव के रुप में जून 2014 से गाेद लिया गया है। इन गांवों में परंपरागत खेती-किसानी के स्वरूप को आधुनिक रुप देते हुए किसानों को नई तकनीकी से परिचित कराया जाना है। कृषकों प्रशिक्षित करते हुए स्वयं सहायता समूह व ग्रामीण स्तर पर रोजगार परक कार्यों को प्रारंभ किया जाना है।

    क्या कहते हैं ग्रामीण
    गांव के अरविंद यादव, पदमेश तिवारी, नन्हे सिंह, सूरज आदि ने बताया कि केवीके द्वारा इस दिशा कभी भी बैठक या प्रशिक्षण आदि का कोई कार्यक्रम नहीं कराया गया है। खेती-किसानी सहित किसी भी कार्य की दिशा में ग्रामीणों को जागरुक नहीं किया गया। ऐसे में डेढ़ वर्ष गुजरने के बाद भी अधिकांश लोगों को पता ही नहीं है कि उनका गांव आदर्श रुप में चयनित भी किया गया है।
    वैज्ञानिकों की राय अलग
    केवीके वैज्ञानिक डा.वीके सिंह ने बताया कि गांव में तेज बहादुर सिंह, रामनगीना सिंह, हरिराम, आनंद सिंह सहित छह किसानों को छह किग्रा खनिज मिश्रण देते हुए उन्नत दुग्ध उत्पादन की तकनीकों से परिचित कराया गया है। इस दिशा में जल्द ही अन्य कार्यक्रमों का संचालन किया जाएगा। डा.सौरभ वर्मा ने बताया कि पांच चयनित गांवों में से तीन में अब तक कई तरह के प्रदर्शन और परीक्षण कार्य किया गया है। आगामी रबी सीजन से सरवां गांव में भी परीक्षण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। बजट के अभाव में परीक्षण नहीं हो पाया था। बजट स्वीकृत हो गया है। रबी सीजन से गांव में प्रयोग होने लगेगा।

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