मशरूम उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ता बिहार

पंचायत खबर टोली
पटना:मशरूम उत्पादन में बिहार तेजी से आगे बढ़ा है। इस वर्ष का कारोबार लगभग पांच हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया। देश में मशरूम का उत्पादन करने वाले राज्यों में बिहार का तीसरा स्थान है। बिहार में मशरूम की खेती 1990 में शुरू हुई थी, इसलिए इसे बहुत बड़ी उपलब्धि कहा जाएगा।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
डॉ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मशरूम वैज्ञानिक डॉ दयाराम ने बताया कि मशरूम निदेशालय, सोलन ने देशभर के विभिन्न इलाकों में हो रहे मशरूम उत्पादन का आंकड़ा जमा किया है। इस आंकड़ो के अनुसार इस वर्ष सबसे अधिक उत्पादन ओडिसा में (22500टन) में हुआ है। दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र (22000टन) है और बिहार (21325टन) तीसरे स्थान पर है। इसके बाद हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड,उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु का उत्पादन रहा।

डॉ दयाराम ने बताया कि इस मुकाम को हासिल करने में बिहार ने 30 वर्षों का सफर तय किया है। बिहार में मशरूम उत्पादन सबसे पहले राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय में 1990 में शुरू हुई। शुरुआत आऐस्टर  के उत्पादन से हुई थी। लेकिन सन 2000 से आम लोगों ने भी इसमें रुचि लेना शुरू किया। तब बटन  उत्पादन शुरू हुआ। उसके बाद 2005 में दूधिया का उत्पादन शुरु हुआ। मशरूम के उत्पादन में 2010 से तेजी आई। आज राज्य में कई किस्म का व्यावसायिक उत्पादन हो रहा है जिसमें बटन , दूधिया  की खेती अधिक हो रही है। जबकि पैडिस्ट्रा, औषधीय गुण वाले हेरेशियम व सिटाके की व्यावसायिक खेती के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में फिलहाल करीब 55 कंट्रोल यूनिट लगी है जिसमें तीन दर्जन से रोजाना मशरूम का उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा सीजनल उत्पादन भी होता है। राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय मशरूम उत्पादन के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ साथ बीज और खाद उपलब्ध कराता है। समय समय पर किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

कुलपति डॉ आरसी श्रीवास्तव ने कहा कि बिहार में दो तरह के लोग उत्पादन कर रहे हैं। करीब तीन दर्जन लोग नियंत्रित माहौल में उद्यमी के रूप में बटन  का उत्पादन कर रहे हैं। लेकिन इनके अलावा 50 हजार से अधिक छोटे किसान बटन, ओएस्टर व दूधिया मशरूम का उत्पादन कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। इनमें जेल में सजा काटने दौरान प्रशिक्षण लेकर बाहर आए लोग और दूसरे राज्यों से लौटे प्रवासी मजदूर भी शामिल हैं। आज उत्पादन के साथ उसके बीज और खाद भी बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा अनेक किस्म के व्यंजन जैसे-गुलाब जामुन, गुजिया, पनीर, लड्डू, नमकीन बिस्किट भी बनाए जा रहे हैं। अधिक उत्पादन होने पर पावडर में बदलने की तकनीक भी आ गई है। यह तकनीक 2018 में आई। इससे कारोबारी अधिक दिनों तक सुरक्षित रख सकते हैं।
पूर्वोत्तर में बिहारी मशरूम की बड़ी मांग
बिहार में पैदा होने वाले मशरूम को पूर्वोत्तर के राज्यों में अधिक पसंद किया जाता है। इसके अलावा झारखंड और उत्तर प्रदेश में बिहार से भेजा जाता है।  आमतौर पर 150 से 180 रुपए प्रति किलो बिकता है। कोरोना काल में कीमत थोडी कम हुई है, फिरभी 100 से 125 रुपए प्रति किलो बिक रहा है।

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