अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के लिए धर्मनगरी कुरूक्षेत्र सज—धज कर तैयार, 5 दिसंबर से होगा आगाज

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कुरुक्षेत्र: धर्मनगरी में अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव का विधिवत आगाज कल यानी 5 दिसम्बर से होगा। यह मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। केडीबी अधिकारी का कहाना है कि कार्यक्रम में उडीसा स्टेट व तंजानिया कंट्री पार्टनर होगा वही अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव मे बढ़ती हुई भीड़ को देखते हुए पुलिस ने भी नाकेबंदी की है पुलिस ने तीन मुख्य चौक अर्जुन चौक, मल्टी आर्ट चौक तथा किरमच रोड चौक से बड़े वाहनों की आवाजाही बंद कर दी है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पंकज सेतिया ने बताया कि 5 से 11 दिसंबर तक अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती समारोह के मुख्य कार्यक्रम रहेंगे उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कवि कुमार विश्वास, सूफी गायक हंसराज हंस, कविता पौडवाल के अलावा रामलीला की प्रस्तुति भी होगी। कार्यक्रमो की कड़ी में 9 दिसंबर को संत सम्मेलन होगा जबकि 10 दिसंबर को अखिल भारतीय देव स्थानम सम्मेलन होगा जिसमें देश के चारों धाम,सप्तपूरियों 12 ज्योतिर्लिंगो, 51 शक्ति पीठो के संतों महंत सम्मिलित होंगे।

वर्षा वर्मा

इस महोत्सव से जुड़ी कुछ खास बातें
हरियाणा सरकार ने साल 2016 से गीता महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने की शुरुआत की थी। इस महोत्सव के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों के शिल्पकार अपनी शिल्प कला का प्रदर्शन करते हैं। साथ ही इस महोत्सव के दौरान ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर देश की सांस्कृतिक विरासत को देखा जा सकता है। इस साल महोत्सव को सोशल मीडिया पर लोकप्रिय बनाने के लिए यू-ट्यूब चैनल पर ‘गीता में मेरा पसंदीदा श्लोक’ थीम से प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इस साल भारत के चार प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी और लाइव प्रसारण भी दिखाया जाएगा।

गीता करती है मृत्यु के भय से मुक्ति
अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के उपलक्ष में गीता ज्ञान संस्थानम में पांच दिवसीय दिव्य गीता सत्संग का आज से हुआ शुभारंभ। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के सानिध्य में इस कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के शुभारंभ अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत व देश भर से प्रसिद्ध संत महात्माओं ने भी शिरकत की। दिव्य गीता सत्संग में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि गीता ही एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जो मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाता है। जब व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो अनेक प्रकार के भय बताएं जाते हैं। लेकिन एकमात्र गीता ही है जो उन सभी मृत्यु के भयों से हमें मुक्ति करवाती है और मनुष्य केवल कर्म करने के लिए है।

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सभी वेद और उपनिषदों का मिश्रण है भगवत गीता
आचार्य देवव्रत ने कहा कि पूरे ब्रह्मांड में केवल मनुष्य ही जीवों में सर्वश्रेष्ठ है जो उसने में केवल उसने न केवल प्रकृति द्वारा निर्मित चीजों का न केवल भोग करना है और अपितु अपना कर्म भी अवश्य करना है। आचार्य देवव्रत ने कहा कि वेदों में भगवान कहते हैं ही मनुष्य तुम जीवन को कैसे अपने जीवन को स्वस्थ बनाओ और सौ वर्ष तक अपने जीवन को जीने की कामना करते रहो व कर्म करते ही जियो।

मनुष्य जीवन कर्म योनि व भोग योनि है
उन्होंने कहा कृष्ण केवल नाम नहीं वह योगेश्वर भी है वह बहुत बड़े योगी का दर्शन चिंतन है। गीता में जो प्रस्तुत किया गया वह जीवन के हर क्षेत्र के पहलुओं का समाधान है। भगवान कृष्ण ने गीता का जो उपदेश हुआ है वह ज्ञान वेदों में उपनिषदों से चला और फिर वह ज्ञान गीता के रूप में प्रकट हुआ। जिस व्यक्ति ने गीता को पढ़ लिया मानो एक प्रकार से उस व्यक्ति ने सभी वेदों का ज्ञान प्राप्त कर लिया है।

 

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