अंकित पांडे
नयी दिल्ली: जुलाई के महीने में औसत से अधिक वर्षा हुई लेकिन बीते 100 साल में अगस्त सबसे सूखा रहा। इसका सीधा असर खरीफ की फसलों पर हुआ है। खरीफ की फसलें जिन्हें अत्यधिक पानी की आवश्यकता होती है, पर्याप्त बारिश न होने की वजह से सूख रही हैं। आधुनिक कृषि और तकनीक पर आधारित कृषि के इस दौर में भले ही यह दावा किया जाता रहा हो कि भारत में सिंचाई के साधन बढ़े हैं और सिंचित भूमि का क्षेत्रफल में बढ़ोतरी हुई है, बावजूद इसके आज भी भारत की बहुतायत कृषि मौसम आधारित है। आजादी के 75 साल बीत जाने के बावजूद भी खेती के लिए किसान पूरी तरह वर्षा पर आश्रित होता है, खास तौर पर खरीफ फसलों के लिए, इनमें भी मुख्यतः धान की खेती के लिए। किसान अपने हिस्से की मेहनत तो करता है साथ ही उसे इंतजार होता है बेहतर मानसून की। मानसूनी फुहार की, घनघोर बारिश की। खेत को तैयार करने से लेकर फसलों की बुआई तक सब बारिश पर निर्भर होता है। इस साल औसत से कम वर्षा होने के कारण किसान और सरकार दोनों परेशान हैं। जुलाई में बारिश तो हुई लेकिन अगस्त सूखा रहा।
क्या कहते हैं आंकड़े
1901 के बाद अगस्त 2023 में अभी तक देश में सबसे कम बारिश हुई है वहीं हिमाचल तथा उत्तराखण्ड में बारिश ने कई साल के रिकार्ड तोड़ दिए हैं।
इस महीने पूरे देश में 36% कम हुई बारिश
आज 21 अगस्त है। लगातार 22 दिनों से भारत का मैदानी क्षेत्र सूखे की मार झेल रहा है। आगामी दिनों मे भी बारिश होने के आसार नहीं है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो इस महीने पूरे देश में 36% कम बारिश हुई है। मौसम विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है कि अगस्त 2023 भारत के इतिहास में यह सबसे शुष्क अगस्त साबित हो रहा है। जबकी यह महीना खत्म होने में सिर्फ 10 दिन बचे हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
मौसम विज्ञानी और केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव, एम राजीवन ने कहा, “अगस्त 2023 में संभावित रूप से लगभग 40% वर्षा की कमी देखी जा सकती है – जो 2005 में दर्ज 25% की कमी (1913 के बाद इतिहास में सबसे शुष्क अगस्त) से अधिक है।
खरीफ फसलों पर दिखेगा कम बारिश का असर
बारिश की कमी से खरीफ फसलों की उपज प्रभावित होती है जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है। इस खरीफ सीजन में चावल से लेकर सोयाबीन आदि का उत्पादन प्रभावित हुआ है। बारिश की कमी का असर खरीफ फसलों के उत्पादन पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। खरीफ फसल जिसमें गेहूँ और सरसो मुख्य हैं, इन फसलों के लिए ठण्ड का मौसम अनुकूल रहता है। ऐसा अक्सर होता है कि जिस वर्ष बारिश कम होती है उस साल ठण्ड भी कम पड़ती है। यह भी निश्चित है अगर बारिश कम होगी तो मँहगाई भी बढ़ती ही है।
बात सिर्फ बारिश और मंहगाई की नहीं है, बारिश ना होने से सबसे ज्यादा दिक्कत छोटी जोत वाले किसानों को होती है। ये किसान उतना ही उगा पाते हैं जितना सिर्फ उनकी खपत होती है। ऐसे मे सबसे ज्यादा दिक्कत इन्ही किसानों को होती है।

