संगीता राना
गांधीनगर: वैसे तो हमारे किसान भाई अलग—अलग नस्लों के गौ पालन कर दुग्ध उत्पादन करते रहे हैं। पशुपालन के जरिए अपनी आमदनी बढ़ाते रहे हैं लेकिन आजकल किसानों में डांगी नस्ल की गाय पालने का प्रचलन काफी बढ़ा है।
दरअसल डांगी नस्ल का नाम गुजरात राज्य के एक क्षेत्र डांग से लिया गया है जो वहां की स्थानीय नस्ल है। और देश में डेयरी व्यवसाय को बढ़ाने में इस क्षेत्र और इस नस्ल की गायों का काफी योगदान है। विगत कुछ वर्षों मे यह नस्ल किसानों में काफी लोकप्रिय हुई है। साथ ही आगामी वर्षों में भी इसमें और बढ़ोतरी की संभावनाए हैं।
बड़ी बात है कि गाय की यह नस्ल स्थानीय है। इस नस्ल की गायें देशी गायें हैं। साथ ही इस नस्ल की गायें दुधारू भी होती हैं। यदि डांगी की दूध देने की क्षमता की बात करें तो एनडीडीबी के अनुसार इस नस्ल की गायें औसतन एक बियान में 430 लीटर तक दूध देती हैं। जबकि यदि गायों की देखभाल अच्छे तरीके से किया जाये तो उनके खानपान का ध्यान रखा जाए तो यह दूध 800 लीटर तक भी हो सकता है।
क्या है डांगी गाय की विशेषताएं
यदि डांगी गाय की प्रमुख विशेषताओं की बात करें तो इनकी औसत आयु आयु 4-5 वर्ष होती है। वैसे तो एक बियान में औसतन दूध देने की क्षमता 430 लीटर हीं होती है। लेकिन यह उसके खानपान और देखभाल पर भी निर्भर करता है। यदि डांगी नस्ल की गायों की अच्छी देखभाल की जाये तो ये गायें एक बियान में औसतन 175 लीटर और अधिकतम 800 लीटर तक दूध देती हैं। चहीं गायों का वजन 220 से 250 किलोग्राम होता है, जबकि बैलों का वजन 300-350 किलोग्राम होता है।


