आप कुर्सी संभालो..हमको तो खटिये का आस… खटिया संभालते हैं..

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देवरिया से युवा पत्रकार आलोक रंजन की रिपोर्ट

देवरिया : खटिया बिछाके, खटिया सजाके किसानों को बहलईहो ना….ए बबुआ कहां जात हव ‘खटिया पर चर्चा’ में।  जात हो तो  एगो खाट ले अईहों। जी हां, कभी कलावती की झोपड़ी तो कभी किसान की खाट। कांग्रेस के उपाध्यक्ष की कथा निराली है। कहीं आसन जमा देते हैं। इस बार वे कलावती के झोपड़ी में नहीं किसानों के बीच खटिया संवाद कर रहे हैं। लेकिन किसानों को भरोसा कहां हैं वे समझ रहे हैं नेताजी कुर्सी के जुगाड़ में हैं खटिया तो बहाना है, मौका मिलते ही खटिया खड़ी कर देंगे। इसलिए जब तक बैठना है बैठो, इनसे बात करो।

khat-sabhaकुछ उनकी सुनो, कुछ अपनी कहो, और जाते वक्त खटिया साथ लेते जाओ, नहीं तो खब खटिया खड़ी देंगे। कुछ ऐसे ही नजारा राहुल गांधी के साथ पहले खटिया संवाद में दिखा। देवरिया से दिल्ली तक के लिए किसान महापदयात्रा का शुभारंभ देवरिया के पचलड़ी गांव से करते हुए राहुल ने की। वहां किसानों से डोर-टू-डोर सम्पर्क किया और उनके मांगपत्र लिये। उन्होंने किसानों को साथ लिया, खाट पंचायत की। कभी कोट के जेब में गुलाब का फूल खोसने वाले जवाहर लाल नेहरू की कांग्रेस के चुनाव चिन्ह बैल और हल था। आज उसी वर्ग के साथ राहुल गांधी खटिया पर बैठ संवाद कर, कुछ उनकी सुन, कुछ अपनी कह उन्हें अपने पाले में करना चाहते हैं ताकि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की खाई साख को वापस पाया जा सके।

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वही घिसा—पीटा संवाद.. राहुल ने कहा कि वर्तमान सरकार उद्योगपतियों का कर्ज माफ करती है तो करे, लेकिन किसानों पर से भी कर्ज का भार हटाए। हमने देश भर के किसानों का कर्ज माफ किया था। देश भर के मजदूरों को मनरेगा से काम दिया था। राहुल ने उस मुद्दे को भी नहीं छोड़ा जिसके चलते मोदी सरकार को पिछले एक साल में कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा.. मुद्दा था दाल की कीमतों का। राहुल ने कहा, “किसान तो दाल 50 रुपए में बेचता है, बाज़ार में वो ही दाल 160 रुपए में बिकती है, ये बीच का पैसा किसकी जेब में जाता है, ये बीच का पैसा बिचौलिया खाता है। इस पर लगाम लगाने की ज़रूरत है।” राहुल ने किसानों की बिजली की दरों को भी आधा करने की मांग उठाई।..लेकिन किसान को कहां चर्चा से काम उसका सारा ध्यान खटिया पर था। कब ​’खटिया पर चर्चा’ खत्म हो और वह अपनी खटिया समेटे।

khatuगजब नजारा था… वातावरण खटिया मय हो रहा था। आज किसानों को न तो खाद चाहिए, न बीज,न फसल बीमा,न आपदा राहत। गाँव के बच्चे, जवान, बूढ़े और महिलाएं सब खटिया उठाकर, लड्डू उठाकर भागे चले जा रहे हैं। बस खटिया दिलाई दो हुजूर। भीड़ सड़कों पर खाट सभा में इस्तेमाल की गई खटिया लेकर सड़कों पर दौड़ रही है, चौक चौराहों पर लोग एक दूसरे से छिना झपटी कर रहे हैं। मानो किसानों की सारी समस्या इस खटिया को पा लेने से हल हो जाएगी। पहली खाट सभा देवरिया के रूद्रपुर में आज हुई, 3500 खटिया का इंतज़ाम किया गया था। सभा के बाद वहां से राहुल गाँधी के जाते ही खटिया की लूट शुरू हो गई। धक्का-मुक्की हुई। पुलिस खड़ी देखती रही।

खबरों के मुताबिक कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी रुद्रपुर से कुछ दूर दुग्धेश्वर नाथ के मंदिर में पहले रुद्राभिषेक किया फिर मछली, बटर चिकन और बिरयानी का भोजन करके अगली खाट सभा में बढ़ गए। खटिए पर चर्चा का अगला पड़ाव गोरखपुर होगा..आज रात वे गोरखपुर में विश्राम करेंगे। इस किसान यात्रा के दौरान राहुल हर रोज दो जिलों में खाट पर चर्चा करेंगे।

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