आप कुर्सी संभालो..हमको तो खटिये का आस… खटिया संभालते हैं..

देवरिया से युवा पत्रकार आलोक रंजन की रिपोर्ट देवरिया : खटिया बिछाके, खटिया सजाके किसानों को बहलईहो ना….ए बबुआ कहां जात हव ‘खटिया पर चर्चा’ में।  जात हो तो  एगो खाट ले अईहों। जी हां, कभी कलावती की झोपड़ी तो कभी किसान की खाट। कांग्रेस के उपाध्यक्ष की कथा निराली है। कहीं आसन जमा देते …

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