प्याज किसान रो रहे हैं खून के आंसू

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मनीष अग्रहरि

इलाहाबाद: प्याज सिंहासन पर बिठाती है, और सिंहासन से उतारती भी हैं। प्याज हंसाती भी है। प्याज रूलाती भी है। लेकिन आज तो प्याज अपने अन्नदाताओं को रूला रही है। इतिहास गवाह है, प्याज की कीमते आसमान छू चुकी है। मगर किसान तो भारी लागत और समय गंवाने के बाद भी प्याज का दो रूपये किलो भी कीमत नही वसूल पा रहा है। इलाहाबाद समेत देश के अन्य हिस्सों में प्याज भले ही 20 रूपये किलो या फिर 20 रूपये की सवा या डेढ़ किलो बिक रहा है लेकिन इलाहाबाद के मुंडेरा मंडी में मध्य प्रदेश से लेकर आए किसानो की प्याज को आढ़ती दो रूपये किलो भी खरीदने को तैयार नही है।

बीते शुक्रवार से ट्रको में करीब 10 हजार बोरी प्याज लेकर बैठे रीवां (मध्य प्रदेश) के खजुआ गाँव के राजकुमार तिवारी, पतौता के किसान सुनील कुमार चैरसिया और महगांव के महेश कुमार समेत 60 किसान अपनी प्याज बिकने की बाट जोह रहे है, मगर बिक नही रही है। दुखी किसान प्याज वापस नही ले जाना चाहते क्यो कि एैसा करने पर ट्रक का भाड़ा बढ़ेगा, लिहाजा वो अब दुखी होकर खून के आसू गिरा रहे है।

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एक- दो दिन में प्याज न बिकने पर किसानो ने उसे मंडी में ही फेंक कर जाने का मन बना लिया है। वे आढ़तियो से उधार लेकर ट्रक का भाड़ा अदा करेगें। बता दे कि इलाहाबाद में नासिक (महाराष्ट्र) के अलावा मध्य प्रदेश के रीवा, सतना समेत अन्य जिलो से बड़ी मात्रा में प्याज आती है। इन जिलो से प्रतिदिन 20-25 ट्रक प्याज इलाहाबाद के मुडेरा मंडी पहुंच रही। राजकुमार, सुनील,महेश, आदि किसान जब मुंडेरा मंडी माल लेकर पहुंचे, उसके पहले से यहां काफी मात्रा में प्याज आ चुकी थी, इसलिए आढ़तियो ने खरीदने मे कोई रूचि नही दिखाई। किसान इस उम्मीद में यहां रूक गए कि एक दो दिन मे शायद मंडी से प्याज निकलेगी तो उनका माल भी बिक जाएगा लेकिन एैसा नही हुआ।

दरअसल में आढ़तियो के पास पहले से प्याज का भारी स्टाक है, यही कारण है कि आढ़तिए डिमांड कम होने से और ज्यादा प्याज खरीदने का हिम्मत नही जुटा पा रहे है। वही दूसरी ओर एक सप्ताह हो जाने के बाद भी प्याज के खरीददार न मिल पाने की वजह से किसान चितिंत हो खून के आंसू रो रहे है। उनके रोने का सबसे बड़ा कारण खराब हो रही प्याज भी है, क्यो कि ज्यादा देरी होने पर उन्हे लागत के बराबर भी रकम नही मिलेगी। पिछले वर्ष जो प्याज 700 से हजार रुपए मन बिक रहा था, वही प्याज इस वर्ष 200 रुपए मन बिक रहा है। ऐसे में प्याज का भंडारण करना पड़ रहा है, जिससे मुश्किलें और बढ़ गई हैं। भंडारण के लिए उपयुक्त जगह नहीं होने के कारण प्याज सड़ने की समस्या है।

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इस बीच कई ईलाकों में बाढ़ आने से भी प्याज किसान परेशान है। एक तरफ मध्यप्रदेश में प्याज की बंपर फसल हुई है। आवक भी काफी है लेकिन यहां से व्यापारी इसे दूसरे जगहों पर नहीं ले जा पा रहे हैं। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश बॉडर पर जाम लगने के कारण बांग्लादेश को प्याज नहीं भेजा जा रहा है इसलिए आढ़तिए काफी परेशान हैं और इनके सामने प्याज के सड़ने का खतरा है।

साथियो के साथ इन किसानो ने अब तक तो किसी तरह मंडी में रह कर पेट भर लिया लेकिन अब वे पैसो से भी खाली है। प्याज के आढ़ती विजय कुमार अपनी आढ़त पर ही इन किसानो के लिए दोनो वक्त का खाना बनवा रहे है।

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