पंचायत चुनाव…परामर्शी समिति में बने रहेंगे निवर्तमान सदस्य

अमरनाथ झा
पटना: बिहार में पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनका कामकाज जिन परामर्शी समिति के जिम्मे होगा, उन समितियों के प्रधान संबंधित मुखिया, पंचायत प्रमुख या जिला परिषद अध्यक्ष ही होंगे। उप-मुखिया, वार्ड सदस्य व सचिव सभी पूर्ववत बने रहेंगे। उनके अधिकार, कर्तव्य व वेतन-भत्तें भी पूर्ववत बना रहेंगे। केवल पदनाम बदल जाएगा जैसे-मुखिया परामर्शी समिति के अध्यक्ष, उप-मुखिया उपाध्यक्ष और वार्ड सदस्य  समिति के सदस्य कहलाएगे।

पंचायत समितियों के स्तर पर बनना वाली परामर्शी समिति के अध्यक्ष निवर्तमान प्रमुख होंगे। उप-प्रमुख व सदस्य भी बना रहेंगे। उनके साथ साथ उस क्षेत्र के निर्वाचित सदस्य, उस क्षेत्र के लोकसभा सदस्य, विधानसभा सदस्य, राज्यसभा और राज्य विधानपरिषद सदस्य जो उस पंचायत समिति के क्षेत्र में मतदाता के रूप में पंजीकृत हो, पंचायत समिति के क्षेत्र में पड़ने वाली सभी ग्राम-पंचायतों की परामर्शी समिति के अध्यक्ष इस समिति के सदस्य होंगे। कार्य पालक पदाधिकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी होंगे।

इसी तरह जिला परिषद के अध्यक्ष अब समिति के अध्यक्ष बन जाएगे। उपाध्यक्ष और सदस्यों को भी अब सदस्य माना जाएगा। जिले के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे निर्वाचित सदस्य, लोकसभा व विधानसभा के वैसे सदस्य जो जिले से निर्वाचित हो और उनके निर्वाचन क्षेत्र का कोई हिस्सा उस जिला में पड़ता हो। राज्यसभा और राज्य विधान परिषद के वैसे सदस्य जो जिले के अंतर्गत निर्वाचक के रूप में दर्ज हों। जिले के सभी पंचायत समितियों की परामर्शी समिति के अध्यक्ष जिला परिषद परामर्शी समिति के सदस्य होंगे। कार्यपालक पदाधिकारी जिला के उप विकास आयुक्त होंगे।                                             बिहार पंचायत चुनाव 
इसी तरह ग्राम कचहरी के समिति का भी गठन होगा। उक्त सभी समितियां उसी तरह कार्य करेगी जिस तरह पंचायती राज अधिनियम 2006 के अंतर्गत निर्वाचित त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाएं कार्य करती थी। उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित दर से भत्ते का भुगतान भी किया जाएगा।                                                                                                          

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