प्याज किसान रो रहे हैं खून के आंसू

मनीष अग्रहरि इलाहाबाद: प्याज सिंहासन पर बिठाती है, और सिंहासन से उतारती भी हैं। प्याज हंसाती भी है। प्याज रूलाती भी है। लेकिन आज तो प्याज अपने अन्नदाताओं को रूला रही है। इतिहास गवाह है, प्याज की कीमते आसमान छू चुकी है। मगर किसान तो भारी लागत और समय गंवाने के बाद भी प्याज का …

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