
नयी दिल्ली: हर साल की तरह इस वर्ष भी मां दुर्गा के भक्त पूरे विधि विधान के साथ नवरात्रि का पर्व मना रहे हैं। नवरात्रि में नवदुर्गा की उपासना की जाती है। नवरात्रि का पावन पर्व साल में चार बार आता है। वैसे तो नवरात्रि का पर्व चैत्र, आषाढ़, अश्विन और माघ के महीने में मनाया जाता है। इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है।

शारदीय नवरात्रि
आश्विन माह में शारदीय नवरात्रि का पावन उत्सव मनाई जाती है। प्रत्येक वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ होती है। शारदीय नवरात्रि से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, अश्विन माह में ही मां दुर्गा का महिषासुर के साथ पूरे नौ दिनों तक युद्ध हुआ था। दसवें दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया था। शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन को विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है। माना जाता है कि तब से ही नौ दिनों को शक्ति की उपासना के लिए समर्पित कर दिया गया।
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इसके अलावा अश्विन महीने में ही शरद ऋतु की शुरुआत होती है, इसलिए भी इसे शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन ही भगवान राम ने रावण का वध किया था। शारदीय नवरात्रि को धर्म की अधर्म पर और सत्य की असत्य पर विजय का प्रतीक माना जाता है।
शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन
आज शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है नवरात्रि के दूसरे दिन दुर्गा मां के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी ब्रह्मा का स्वरूप माना जाता है। इनको पीला रंग बहुत ही खास होता हैं मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान,तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है।ब्रहमा का अर्थ तपस्या और चारिणी का अर्थ आचरण करने वाली । देवी का रूप अत्यंत सरल और सुंदर है। मां ने श्वेत वस्त्र धारण किए हुए और वहीं दूसरी ओर एक हाथ में अष्टदल की माला और दूसरे हाथ में कमंडल लिए हुए है। कठोर तपस्या और ब्रहमचर्य का पालन करने वाली यह देवी ,संसार के सभी जीवों और निर्जीव वस्तुओं के ज्ञान की स्वामिनी है। मां ब्रहमाचारिणी को शत शत नमन है। पूजा करने से जीवन के हर क्षेत्र में तरक्की मिलती है और देवी मां की कृपा सदा बनी रहती है।
नवरात्र का उपवास करने और माता दुर्गा की आराधना करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।
