प्रवासी कामगारों के जख्म पर मरहम न लगा सका नीतीश कुमार का बजट

अमरनाथ झा

पटना:कोरोना काल में जब दूसरे राज्यों से बिहार के कामगार जैसे-तैसे वापस लौट रहे थे, तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बार-बार स्थानीय स्तर पर रोजगार देने का ऐलान कर रहे थे, पर बिहार सरकार के बजट में प्रवासी कामगारों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है, यानी प्रवासी कामगारों के जख्म पर मरहम लगाने का कोई प्रयास नयी नवेली नीतीश कुमार की सरकार ने अपने पहले बजट में नहीं किया है। उल्लेख तो उन 19 लाख रोजगारों की कार्ययोजना का भी नहीं है जिसका वायदा भाजपा-जदयू ने चुनावी घोषणा-पत्र में किया था। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इसे लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना काल में बाहर से आए प्रवासी कामगारों की दक्षता की जांच करने और उनके लिए रोजगार सुनिश्चित करने का निर्देश पदाधिकारियों को बार-बार दिया और कहा कि प्रवासी कामगारों के कौशल का सर्वेक्षण कराया जाए। उसके आधार पर हर किसी के लिए उपयुक्त रोजगार का सृजन किया जाए। आवश्यकतानुसार इनसे संबंधित निर्माण इकाइयों की स्थापना राज्य में ही करने लिए समुचित कार्रवाई करें ताकि उन्हें यहां पर उनके कौशल के अनुसार स्थायी रोजगार उपलब्ध हो सके।
इस दौरान तय हुआ कि प्रवासी कामगारों की दक्षता जांच के लिए एकांतवास शिविरों में ही विशेष सर्वेक्षण काराया जाए। यह काम जिला उद्योग केन्द्रों के महाप्रबंधक को सौंपा गया। उनसे कहा गया कि प्रखंड स्तर पर बने एकांतवास शिविरों में जाकर आपदा प्रबंधन विभाग के साथ तालमेल करके इसका ब्यौरा एकत्र करें। उन्हें एक प्रारुप बनाने के लिए भी कहा गया जिससे श्रमिक के कुशल, अर्ध्द कुशल और अकुशल होने का पता चल सके। मुख्यमंत्री ने बिहार लौटने वाले सभी प्रवासी कामगारों की दक्षता संबंधी डाटा तैयार करने का निर्देश दिया था। तत्कालीन उद्योग मंत्री श्याम रजक ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर जरूरी निर्देश भी दिया। उनके निर्देश पर सभी जिला उद्योग केंन्द्रों के जरूरी निर्देश भेजे गए। इस संबंध में बियाडा के महाप्रबंधक को भी पत्र भेजा गया और बियाडा के क्षेत्रीय पदाधिकारियों के भी श्रमिकों की दक्षता के आंकड़े जुटाने में सहयोग करने के लिए कहा गया। इन आंकड़ो के आधार पर उन कामगारों के लिए रोजगार की योजना तैयार की जानी थी। विभाग की ओर से जिला प्रबंधकों के एक प्रारुप भी भेजा गया था जिसके आधार पर आठ बिंन्दुओं पर सूचनाएं एकत्रित की जानी थी। इस बाबत पटना के एक स्थानीय अखबार ने 5 मई को विस्तृत खबर छपी है।


उन दिनों मुख्यमंत्री जहां भी जाते प्रवासी कामगारों की दक्षता सर्वेक्षण की चर्चा अवश्य करते थे। पर इतने तामझाम के बाद तैयार आंकड़ा कहां गया, इसका पता नहीं चलता। उस सर्वेक्षण में क्या और कितनी जानकारी मिली, यह कोई नहीं बताता।
इतना ही नहीं तत्कालीन उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी भी बार—बार सामने आए और प्रवासी कामगारों के लिए नए कानून की आवश्यकता बताते हुए कहा कि अंतराज्यीय प्रवासी मजदूर अधिनियम 1979 का अगर कड़ाई से पालन किया जाता तो कोरोना काल में देश के एक राज्य से दूसरे राज्य की ओर मजदूरों को पलायन नहीं करना पड़ता, इतनी फजीहत नहीं झेलनी पड़ती। पर क्या नया कानून बनाने के बारे में बिहार सरकार की तैयारी का कोई संकेत नहीं है। हालांकि उप-मुख्यमंत्री ने उस दिन( 29 मई 2020 को छपी खबर) बताया कि उस चालीस साल पुराने कानून के अनुसार भी प्रवासी मजदूर को घर आने-जाने के लिए रेल किराया देने, बीमार होने पर इलाज, दवा का खर्च वहन करने, प्रति व्यक्ति साढे छह वर्ग मीटर का आवास के साथ पेयजल, शौचालय, स्नानघर और जाड़े में गर्म कपड़ों की व्यवस्था नियोक्ता को करनी थी। विवाद होने पर नियोक्ता को दंडित करने का प्रावधान भी है। कानून का पालन कराने के लिए राज्यों में इंस्पेक्टरों को नियुक्त किया जाना है। यह सब क्यों नहीं हुआ और इसके लिए कड़ाई करने का दायित्व क्या उस राज्य की सरकार का नहीं है जहां से सबसे अधिक मजदूर दूसरे राज्यों में कमाने जाते हैं। इस सवाल को टालते हुए उप-मुख्यमंत्री मोदी ने नए कानून में भविष्य निधि, बीमा, व वन नेशन वन राशन कार्ड जैसी चर्चा करने लगे।


बजट से गायब हैं प्रवासी कामगार
बिहार सरकार के ताजा बजट में प्रवासी कामगारों का पूरा मामला सिरे से गायब है। महिलाओं, छात्रों, किसानों आदि इत्यादि को प्रोत्साहन देने की चर्चा तो है, पर दूसरे राज्यों में रोजगार करने के लिए मजबूर कामगारों को रोकने के लिए किसी योजना का उल्लेख नहीं है। प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री व पटना विश्वविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक नवल किशोर चौधरी ने कहा कि गरीबी मिटाने और प्रवासी मजदूरों के लिए इस बजट में कुछ नहीं है। सरकार लाखों रोजगार देने की बात तो करती है लेकिन इसके लिए कोई कार्ययोजना बजट में नहीं है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने अन्य बातों के अलावा यह कहा है कि सरकार 20 लाख रोजगार सृजन का ब्लूप्रिंट जनता के सामने रखे।

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