नीतीश सरकार ने किए 6 बड़े ऐलान, बिहार में बढ़ेगा मुखिया का वेतन

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शश्वत सिंह

 

 

 

पटना:  बिहार की नीतीश सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए मुखिया, उप मुखिया, वार्ड सदस्यों तथा सरपंच, उप सरपंच एवं पंचों का वेतन बढ़ाने का निर्णय लिया है। बिहार में अब मुखिया समेत तमाम पंचायत प्रतिनिधियों का मासिक भत्ता डेढ़ गुना बढ़ा दिया जाएगा। यानि मुखिया को पहले 5000 रुपये मिलता और अब उन्हें 12500 रुपये प्रति माह मिलेंगे।

 

 

हालांकि इस वर्ष में बिहार विधानसभा चुनाव होने वाले है ऐसे में इस फैसले को बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा कदम माना जा रहा है। ग्राम पंचायत के मुखिया को मनरेगा योजना में अब तक 5 लाख रुपये तक की योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति की शक्ति प्राप्त थी, जिसे बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है। वहीं पंचायती राज संस्थाओं के सभी स्तर के प्रतिनिधियों के मासिक भत्ते को डेढ़ गुना बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा पंचायत प्रतिनिधियों को आर्म्स लाइसेंस देने की भी स्वीकृति मिल गयी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ‘संवाद’ में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की और इसके बाद पंचायती राज व्यवस्था के तहत कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं जिनमें

 

1. ग्राम पंचायतों के मुखिया को मनरेगा योजना में अब तक 5 लाख रुपये तक की प्रशासनिक स्वीकृति की शक्ति प्राप्त थी। इस सीमा को बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने का आदेश दिया जा रहा है।

2. पंचायती राज संस्थाओं के सभी स्तर के प्रतिनिधियों के मासिक भत्ते को डेढ़ गुणा बढ़ाने का आदेश दिया जा रहा है।

 

 

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3. राज्य के सभी ग्राम पंचायतों में इस वर्ष होने वाले चुनाव से पूर्व पंचायत सरकार भवन बनकर तैयार हो जाए, इसके लिए 1069 नए पंचायत सरकार भवनों की स्वीकृति दी गई है। इन भवनों के निर्माण का जिम्मा ग्राम पंचायत को सौंपने का आदेश दिया जा रहा है।

 

 

4. पंचायत प्रतिनिधियों के शस्त्र अनुज्ञप्ति के आवेदन को जिला पदाधिकारी निर्धारित समय सीमा के अंदर नियमानुसार निष्पादित करेंगे।

 

5. पहले पंचायत प्रतिनिधियों को केवल आकस्मिक मृत्यु पर 5 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान मिलता था, अब सामान्य मृत्यु पर भी 5 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान मिलेगा। साथ ही, बीमारी से ग्रसित होने पर मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष से स्वास्थ्य सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

 

 

6. पंचायती राज संस्थाओं द्वारा 15वें वित्त आयोग एवं राज्य वित्त आयोग की राशि का उपयोग तेजी से करने के लिए 15 लाख रुपये तक की योजनाओं का कार्यान्वयन विभागीय तौर पर किया जा सकेगा।

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