
- घरेलू उपयोग के बाद बचे ड्रैगन फ्रूट 400 रुपए प्रति किलो की दर से यही पास के रामगढ़ डेढ़ क्विंटल बेंच दिए अब देश की बड़ी मंडी में भेजने की तैयारी
भभुआ: दो दशक पहले कैंसर से मां मर गई। अब बड़ी मां भी पीड़ित हैं। लगा कि जीवन मे अब सब कुछ खत्म हो गया। लेकिन कहते हैं ना.. जहां चाह, वहां राह.. निकल भी गया। बड़ी को बेहतर इलाज की ठान ली। इलाज के ही क्रम में दिल्ली में किसी ने ड्रैगन फ्रूट खिलाने की सलाह दी। 800 रुपए किलो खरीद कर एक माह तक खिलाया। थोड़ी राहत मिली। ठहरे किसान के बेटा तो घर में उपजाने की विचार आया ताकि इतना महंगा खरीद क्षमता से बाहर होता जा रहा था। खोजबीन शुरू किया। पता चला चंडीगढ़ में इसकी नर्सरी उगाई गई है। वहां से पौधे मंगा कर रोप दिए। करीब डेढ़ साल बाद फल आए। अब बड़ी मां को आसानी से उपलब्ध हो जाता है। ……. ड्रैगन फ्रूट
बड़ी मंडियों में भेजने की तैयारी
कोरोना के समय ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन बढ़ा तो रामगढ़ इलाके में लोगो की नजर पड़ी। लोगों ने इच्छा जताई तो खिलाया भी। अब इसकी मांग बढ़ने लगी। तब तक 200 पौधे फल देने लगे। पहले चरण की करीब डेढ़ क्विंटल उपज पास के रामगढ़ बाजार में 400 रुपए प्रति किलो की दर बिक गई। अच्छी कीमत मिली। देश की बड़ी मंडियों में भेजने की तैयारी है। अब तो कुछ किसान भी जुड़ गए हैं। जिन उत्पादन के लिए प्रेरित किया। यह कहानी किसान विजय सिंह की है। उत्साहित जल्दहां के इस किसान ने अब इसी को करियार बनाने की ठान ली है।
इस तरह से होती है ड्रैगन फ्रूट की खेती
विजय ने बताया यह लतरदार है। लिहाजा इसके लिए खंभे तैयार करने होते है। अच्छी उपज के लिए एक 5-6 फुट के खंभे से लगे 3-4 पौधों को सटाकर आपस मे बांध देते है। तब यह फैलकर अच्छा फल देता है। पौधों के प्रजनन के लिए भी एक दूसरे के सहायक होते हैं। उन्हें काफी लाभ हुआ है।
200 पौधों की 50 पिलर से डेढ़ क्विंटल ड्रैगन फुट का उत्पादन
किसान विजय सिंह ने बताया कि 200 पौधों के 50 पिलर से डेढ़ साल बाद फर्स्ट स्टेप में करीब डेढ़ क्विंटल ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन हुआ। शुरुआत में रामगढ़ में ही इसकी पूरी की उत्पादन की खपत हो गई। कीमत भी अछ्छी मिली। इससे और उत्पादन की उम्मीद जगी। तब 800 पौधों के 200 पिलर खड़े किए। अब इनमें से अगले जून से फल शुरु होगा। बताते हैं कि यह फल एक बार लगाए जाने के बाद 25 साल तक फल देगा। फल उत्पादन कई चरणों में होता है। फुल आना शुरू होने के बाद फल आकार लेते हैं। तब तक नए फुल भी आना शुरू हो जाते हैं। जब तक पहले वाले फल पक कर लाल कलर में आते हैं। तब तक अगले चरण की फूल से फल बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इस तरह या उत्पादन देता है। अब यह मेरे लिए एक स्टार्टअप ही बन गया है।
किसानों को जोड़कर उत्पादन,पैकेजिंग और मार्केटिंग, ब्रांडिंग भी की जाएगी
किसान विजय सिंह ने करीब 100 किसानों को जोड़कर आपस में एक संगठन बनाई गई है। सभी को ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों के उत्पादन को प्रमोट भी की जाएगी। पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग भी ऑनलाइन विधि से करने की तैयारी है। ताकि प्रदेश के अलावा देश के कोने कोने तक इसका प्रसार हो।
गर्मी में हुई थी उत्पादन प्रभावित तो झटका लगा
उन्होंने बताया कि अधिक टेंपरेचर में ठीक से ड्रैगन फुट का उत्पादन नहीं हो पाता था। ऐसे में लगा के यह नुकसानदायक साबित होगा। लेकिन गर्मी कम होते ही अच्छी उपज होने लगी। एक पौधे से पहले चरण में 5 से 6 किलो तक ऊपज आसानी से ली जा सकती है।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
पेशे से वरिष्ठ चिकित्सक डॉ सुनील दत्त त्रिपाठी कहते हैं ड्रैगन फ्रूट बेसिकली अमेरिका मूल का है। यह नाशपाती और कीवी का शंकर उपज है। इसमें फैट नहीं है। एंटी ऑक्सीडेंट होने के साथ इसमे अच्छी मात्रा में प्रोटीन है। जो इम्युनिटी बूस्टर के तौर पर कारगर है। यह खून बढ़ाने में भी सहायक है। इससे उपचार के लिए मॉडर्न मेडिसिन में कोई एविडेंस नहीं है। लेकिन सप्लीमेंट के तौर पर यह बेहतर फल है।
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