पूजा
Success Story: लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की काभी हार नहीं होती। दुनिया कि सबसे कठिन परीक्षा में से एक है, यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा लेकिन फिर भी हर साल लाखों छात्र शामिल होते हैं, लेकिन सफलता कुछ छात्रों को मिल पाती है। ऐसे में आज हम आपको आईएएस गुंजन द्विवेदी कि कहानी बताएंगे जो बचपन से ही अपने पिता की राह पर चलती आ रही है। जिन्होंने अपने पिता की तरह ही सिविल सर्विसेज ज्वाइन किया है। वह अपने दो प्रयासों में असफल होने के बावजूद भी हार नहीं मानी और तीसरे प्रयत्न में यूपीएससी की परीक्षा में 9वीं रैंक हासिल की।
घर से मिला मार्गदर्शन
गुंजन द्विवेदी के पिता एक रिटायर्ड ऑफिसर है, और उनकी बहन भी सिविल सेवा में है। जो सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में एक कमर्शियल टैक्स ऑफिसर के रूप में कार्यरत हैं। उनके पिता ने हमेशा से मार्गदर्शन किया और गुंजन को प्रेरित किया है। इसके अलावा उनकी मां और उनके भाई ने हमेशा यह कोशिश करते थे कि हर परिस्थिति में वह खुश रहें।
पढ़ाई में भी टॉप गुंजन द्विवेदी
गुंजन हमेशा से एक प्रतिभाशाली छात्रा रही हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा आईसीएसई बोर्ड से पूरी की। इसके अलावा कक्षा 10वीं में 93.5% और कक्षा 12 में 87.6% अंक प्राप्त किए है। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है। उन्हें ग्रेजुएशन में 71.5% अंक मिले। यही विषय आगे चलकर यूपीएससी में उनका वैकल्पिक विषय भी बना और वह यूपीएससी में 9वीं रैंक हासिल कर के कामयाबी की मिसाल पेश की।
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कमियों से सीख कर क्रैक किया यूपीएससी
यूपीएससी की राह गुंजन के लिए आसान नहीं थी। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी अपने पहले दो प्रयासों में वह प्रीलिम्स परीक्षा भी पास नहीं कर पाई है। लेकिन असफलताओं से सीखकर उन्होंने अपनी रणनीति बदली और आखिरकार तीसरे प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली। उनकी कहानी उन सभी उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा
है, जो इस कठिन परीक्षा की तैयारी कर रहे है।
गुंजन अभी संभाल रही हैं ये पद
गुंजन वर्ष 2019 बैच के यूपी कैडर की आईएएस अधिकारी है। वह वर्तमान में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के पद पर कार्यरत है। इससे पहले वह देवरिया के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यरत थीं।


