तैयारी खरीफ की..प्रकृति के भरोसे धान, व्यवस्था बेजान

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  • 90 हजार हेक्टेयर प्रक्षेत्र में होगी धान की फसल का लक्ष्य
  • 334 नलकूप में 18 ठप, नाली-कुलाबा हैं ध्वस्त
    पंचायत खबर टोली

     मऊ :खेती किसानी के क्षेत्र में प्रगती की बात बार—बार सरकारी महकमों द्वारा दुहराई जाती लेकिन जमीनी स्थिति यही है कि आज भी हमारा किसान मानसून पर निर्भर है। यदि मानसून बेहतर तो किसानों के चेहरे पर मुस्कान और अन्न से भरा गोदाम। मानसून ने धोखा दिया तो किसान परेशान हो जाता है। महकमें ने इस वर्ष खरीफ सीजन में जिले में 90 हजार हेक्टेयर प्रक्षेत्र का लक्ष्य विभाग द्वारा निर्धारित किया गया है। गत वर्ष अंतिम समय में हुई बरसात से अच्छी उपज प्राप्त करने वाले किसान अभी भी प्रकृति पर ही निर्भर हैं। कृषि विभाग द्वारा किसानों को समय से बीज व उर्वरक उपलब्ध कराने की स्थिति में भी सिंचाई की व्यवस्था ध्वस्त ही चल रही है। जिले सभी ब्लाक में स्थापित 334 में 18 बंद चल रहे हैं। जो संचालित हैं भी वह अपने लक्ष्य के 40 प्रतिशत क्षेत्र को ही सिंचित कर पाने में समर्थ हैं। लगभग सभी नाली व कुलाबा टूट जाने या क्षतिग्रस्त होने की दशा में संसाधन की उपलब्धता के बाद भी अपेक्षित परिणाम नहीं आ रहा है। निजी ट्यूबवेल या बेसमय पानी देने वाली नहरों के भरोसे धान उपजाने वाला किसान अभी भी सुविधाओं के लाभ से वंचित है।

कितने कारगर है राजकीय नलकूप

मानसून की मारी हमारी पूरी कृषि व्यवस्था नलकूप पर आधारित है। जबकि जिले में कुल स्थापित 334 नलकूपों द्वारा प्रत्येक सीजन में सिंचाई का लक्ष्य शासन द्वारा निर्धारित किया जाता है। इनमें 18 नलकूप पूर्णतया बंद स्थिति हैं। इनकी नाली जगह-जगह टूटने जाने के कारण यह अपने लक्ष्य मे 40 प्रतिशत क्षेत्रफल की ही सिंचाई करने में सक्षम हैं। विभागीय रूप से अनेक स्थानों पर आपरेटर नियुक्त नहीं किए जाने की दशा में दर्जनों नलकूपों पर कुछेक लोगों ने कब्जा कर लिया है। अनेक स्थान नालियों को तोड़कर तटवर्ती किसानों ने इसे अपने प्रक्षेत्र में समाहित कर लिया है। विभागीय रूप से तत्पर कार्रवाई नहीं किए जाने की दशा में ये नलकूप महज शो-पीस बनकर रह गए हैं।

रानीपुर में स्थिति गंभीर
वैसे तो जिले के लगभग सभी ब्लाक में इनकी हालत खराब है पर रानीपुर यह स्थिति और भी नारकीय हो गई है। यहां पर चार नलकूप निष्क्रिय होने के साथ ही लगभग सभी जगह नाली पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। दोहरीघाट पंप कैनाल से जुड़ी इंदारा-रजवाहा नहर व उससे जुड़े लिंक के टेल तक बने 90 प्रतिशत कुलाबे जर्जर व क्षतिग्रस्त हैं। बिना समय पानी छोड़े जाने या अधिक पानी होने की दशा में किसानों को इस दुर्व्यवस्था से क्षति उठानी पड़ती है। रतनपुरा क्षेत्र में राजकीय नलकूप खराब पड़े हुए हैं। आंकड़ों इस क्षेत्र में चाहें जितनी सिंचाई दर्शाया जाए पर ये सफेद हाथी हो चुके हैं। वर्षों बंद पड़े कई नलकूप गिरने के कगार पर हैं। नालियां पूरी तरह टूट जाने के बाद भी संचालित नलकूप बेमानी साबित हो गए हैं। सिंचाई विभाग द्वारा इस पर ध्यान नहीं दिए जाने की दशा में किसान निजी संसाधन पर निर्भर हैं। अधिशासी अभियंता नलकूप मांगे राम बताते हैं कि प्रदेश मुख्यालय द्वारा इस सीजन का लक्ष्य अभी निर्धारित नहीं किया गया है। नालियों के निर्माण व अतिक्रमण को लेकर विभागीय तौर पर कार्रवाई की योजना बनाई गई है।

कृषि विभाग की तैयारी चाक-चौबंद
किसानों को सुविधाएं देने में कृषि विभाग पहले से ही तैयार नजर आ रहा है। सभी विभागीय बिक्री केंद्रों पर बीज व उर्वरक पर्याप्त मात्रा में पहले ही पहुंचा दिया गया है। उप कृषि निदेशक बताते हैं कि एनडीआर-2064, एनडीआर-2008, डीटीआर-44, स्वर्णा सब-1, सहभागी प्रजाति के बीज जिले के सभी उपकेंद्रों पर उपलब्ध है। शुष्क सम्राट प्रजाति कुछ ही दिनों में उपलब्ध हो जाएगी। विभाग द्वारा सभी प्रजातियों का मूल्य 14 रुपये प्रति किग्रा की दर से निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही खरीफ सीजन में 11 हजार मिट्रिक टन डीएपी लक्ष्य के सापेक्ष उपलब्ध है। यूरिया के 23 हजार टन लक्ष्य के सापेक्ष 11 हजार टन जिले के केंद्रों पर उपलब्ध है। इस वर्ष विभाग द्वारा 90 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ किसानों को अन्य विभागीय सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

विभागिय रूख से अन्नदाता नाखुश

प्रगतिशील किसान पूर्व प्रधान हरेंद्र सिंह, राजेश सिंह किंकर, राधारमण पांडेय, राघवेंद्र सिंह डब्बू, पूर्व सैनिक रूप नरायन सिंह बताते हैं कि धान, पान और केला ये तीनों पानी के चेला की पुरानी कहावत है। ऐसे में विभाग द्वारा सिंचाई संसाधन के लिए नलकूप की स्थापना भी कम संख्या में की गई। जो हैं भी वह दिखावा बन कर रह गए हैं। इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिलने की दशा में किसान बरसात या निजी संसाधन पर निर्भर हो गए हैं। अनेक जगह नलकूप तो चल रहे हैं लेकिन नाली टूट जाने या अतिक्रमित होने की दशा में इनका चलना न चलना बराबर ही है। इस दिशा में सीजन से पूर्व ही विभागीय स्तर पर अतिक्रमण से मुक्त करते हुए नालियों को ठीक कराए बिना सिंचाई की प्रतिबद्धता दर्शाना बेमानी है।

  • क्या कहते हैं सिंचाई के आंकड़े

    जिले में स्थापित कुल राजकीय नलकूप : 334
    आंकड़ों में खराब राजकीय नलकूप : 18
    क्षमता के अनुसार सिंचाई का प्रतिशत : 40 प्रतिशत
    जिले में खरीफ सीजन का क्षेत्रफल : 90 हजार हेक्टेयर।
    खरीफ सीजन में डीएपी की लक्ष्य : 11 हजार मिट्रिक टन (उपलब्ध)।

    खरीफ सीजन में यूरिया का लक्ष्य : 23 हजार मिट्रिक टन (11 हजार एमटी उपलब्ध)

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