- संसाधन संरक्षण तकनीकी का सर्वोत्तम नमूना है जीरोटिल से बोआई
- केवीके द्वारा जिले के तीन ब्लाक में 50 हेक्टेयर का बनाया गया लक्ष्य
मऊ : आर्थिक रूप से मंहगी होती जा रही खेती-किसानी को कृषक उपयोगी बनाने हेतु वैज्ञानिकों ने बोआई की नई तकनीक की खोज किया है। संसाधन संरक्षण तकनीकी के सर्वोत्तम रूप में विकसित जीरोटिल मशीन से रबी में गेहूं की बोआई से किसानी लागत की कमी के साथ अधिकाधिक उत्पादन किया जा सकता है। इस तकनीकी से बोआई करने पर प्रति हेक्टेयर दो से ढाई हजार रुपये की बचत होती है। दूसरी ओर कम बीज, 40 प्रतिशत पानी की बचत के साथ खरपतवार का भी नियंत्रण होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रकृति के कोप के बीच पूर्वांचल में इस विधि के प्रयोग से किसान तकनीक के साथ आर्थिक रुप से भी समृद्ध होगा। इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा खरीफ सीजन में जीरोटिल से 50 हेक्टेयर बोआई का लक्ष्य बनाया गया है। इसमें 30 हेक्टेयर के करीब लक्ष्य को पूरा भी कर लिया गया है।
वरिष्ठ केवीके वैज्ञानिक डा.वीके सिंह बताते हैं कि इसमें धान की नर्सरी डालना व रोपाई से किसानों को राहत मिल जाती है। समय के साथ दोहरा आर्थिक लाभ होता है। मशीन से नमी वाले खेत में सीधे धान की बोआई करने के बाद जमाव होने पर खर-पतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान होना चाहिए। आमतौर पर खेत की तैयारी में कई जोताई करनी पड़ती है लेकिन इस विधि के प्रयोग से एक बार में ही बीज को लाइन से बोया जाता है। लाइन से बोआई होने के कारण सिंचाई के दौरान 40 प्रतिशत पानी की बचत होती है। बोआई लाइन से होने की दशा में खरपतवार के जमाव में कमी के साथ उन पर नियंत्रण भी आसान होता है। श्री सिंह ने बताया कि बीज दर में कमी, खेत की तैयारी में बचत, उवर्रक व सिंचाई सहित जीरोटिल से बोआई किसानों का दो से ढाई हजार प्रति हेक्टेयर की बचत पहले ही हो जाती है। जीरोटिल प्रणाली सूखाग्रस्त व असिंचित क्षेत्र के लिए वरदान होती है।
तकनीकी प्रसार पर केवीके का जोर
केंद्र प्रभारी डा.डीपी सिंह बताते हैं कि खरीफ सीजन में 50 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारण किया गया है। अब तक कोपागंज ब्लाक के चेलाराम का पुरा, फिरोजपुर, भेलाबांध व घोसी ब्लाक में सेमरीजमालपुर तथा फतहपुर मंडाव में परशूपुर दिघेड़ा में अब तक 30 हेक्टेयर पर जीरोटिल मशीन से धान की बोआई हो चुकी है। केवीके द्वारा इस तकनीकी के व्यापक प्रसार का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही अन्य तकनीकों के माध्यम से भी किसानों के बेहतर उत्पादन के साथ आर्थिक लाभ के लिए विभाग प्रतिबद्ध है।

