संतोष कुमार सिंह
नई दिल्ली: मंदसौर में किसानों पर गोलीबारी और उनकी हत्या एवं किसानों की दुरावस्था को लेकर नागरिक संगठन चिंतित हैं। उन्हें लगता है कि किसान आंदोलनों को जबरन दबाने और उनकी आवाज को अनसुनी करने का प्रयास हो रहा है। यही कारन है कि देश की वर्तमान स्थिति में किसानों को आत्महत्या, संघर्ष और हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है।
राजघाट पर प्रार्थना सभा
मध्यप्रदेश में जिस प्रकार आंदोलित किसान सरकारी हिंसा का शिकार हुए इससे गांधीवादी एवं शांति प्रिय अहिंसा में विश्वास रखने वाले आम जनमानस चिंतित है, इसलिए मृत किसानों की आत्मा को शांति प्रदान करने, सरकार तथा समाज को सद्बुद्वि प्रदान करने के लिए आज देश के कई जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने महात्मा गांधी के समाधि स्थल राजघाट पर प्रख्यात गांधीवादी डा.एस.एन. सुब्बराव (भाई जी) के नेतृत्व में प्रार्थना सभा की।
किसानों की हत्या और आत्महत्या के प्रति दुःख और उनके आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए डा. एस.एन. सुब्बराव ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान और ग्राम आधारित देश है। इस देश में औद्योगिकरण और खनन की जो प्राथमिकता है वह खेती व किसानी के लिए नहीं है।
एकता परिषद के संस्थापक डा. राजगोपाल पी.व्ही ने कहा कि देश को भोजन देने वाले किसानों, आदिवासियों, खेत में काम करने वाले मजदूरों और दलितों की हालत की ओर ध्यान देने के बदले ताकतवर लोगों को और ताकतवर बनाने वाले तथा गावं को नुकसान पहुंचाकर शहर को सजाने वाली प्रक्रियाओं से हम चिंतित हैं। स्वेदशी चिंतक गोविंदाचार्य ने कहा कि मुद्दों और मूल्यों पर संवाद और संघर्ष के माध्यम से संवाद और सहमति बनायी जा सकती है। सरकार शांतिपूर्ण आंदोलन का दमन करती है, इसलिए आंदोलन शांतिपूर्ण होने के साथ सक्रिय होना चाहिए, और सरकार के प्रतिरोध में जनता को खड़ा करना चाहिए।
राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के बसोवराज पाटिल ने कहा कि इस प्रार्थना सभा के माध्यम से हम देश के बुद्विजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, उपभोक्ताओं से अपील करते हैं कि इस विकास प्रक्रिया के बदले एक मनुष्य केन्द्रित और प्रकृति केन्द्रित तथा गरीबोन्मुखी विकास के लिए आवाज उठायें ताकि किसान, मजदूर और वंचित जनता आज जिस स्थिति में है उससे उनको उबारा जा सके।
किसान मजदूर संघ के राष्ट्रीय संयोजक शिवकुमार शर्मा ‘कक्का जी’ ने कहा कि इस समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि महात्मा गांधी ने जो ताबीज दुनिया को दी है उसमें उन्होनें अंतिम व्यक्ति केन्द्रित लोगों की सहभागिता पर आधारित नीचे से उपर जाने वाले एक विकास पद्वति की बात की गयी है। आज महात्मा गांधी के समाधि स्थल पर खड़े होकर हम लोग यह प्रतिज्ञा करते हैं कि महात्मा गांधी के द्वारा प्रस्तावित आवश्यक्ताओं पर आधारित विकास प्रक्रिया को हम बढावा देंगे और उसके लिए निरंतर काम करते रहेंगे। वहीं एकता परिषद के अध्यक्ष डा. रनसिंह परमार ने जनता से अपील किया कि सभी मिलजुलकर सक्रिय रूप से में काम करें। इस प्रार्थना सभा में एकता परिषद, राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन, किसान मजदूर संघ, राष्ट्रीय युवा योजना, जलाधिकार अभियान, जल-जन जोड़ो अभियान तथा जल बिरादरी इत्यादि के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

