संतोष कुमार सिंह
• इस संस्थान की स्थापना कृषि उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाने के साथ उच्च स्तरीय शिक्षा एवं अनुसंधान प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
• वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करेंगे और हम ऐसा करके दिखाने के लिए दृढ़ संकल्प हैं।
गोगामुख, धेमाजी, असम: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गोगामुख, धेमाजी, असम में देश के तीसरे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान का शिलान्यास किया।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे भविष्य में पूरे क्षेत्र में एक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की जरूरतों के साथ आज कृषि को विकसित करने की जरूरत है। किसानों को बदलती तकनीकों का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने आधुनिक कृषि और क्षेत्र की विशेष जरूरतों पर ध्यान केन्द्रित करने पर जोर दिया। साथ ही प्रधानमंत्री ने 2022 तक, स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर किसानों की आय दोगुनी करने के अपने उद्देश्य पर भी बात की। इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री श्री सर्वानंद सोनेवाल भी केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह मौजूद थे।

कृषि मंत्री ने इस मौके पर कहा कि देश के पूर्वोत्तर राज्यों में कृषि, एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में उत्पादन को बढ़ाने की अपार संभावनाओं को देखते हुए कृषकों का ज्ञानवर्धन करने, उचित कृषि संबंधी जानकारी देने तथा देश में कृषि अनुसंधान तथा शिक्षा का उत्कृष्ट स्तर बनाये रखने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की एक और शाखा असम में खोली जा रही है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान की स्थापना कृषि उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाने के साथ उच्च स्तरीय शिक्षा एवं अनुसंधान प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है और आने वाले समय में देश के पूर्वोत्तर भाग में रहने वाले किसानों के जीवन स्तर में निश्चित तौर पर इससे बदलाव दिखाई पड़ेगा। देशभर में जिस तरह से आईआईटी और आईआईएम जैसी उच्च शिक्षा संस्थानों का जाल बिछा हुआ है, ठीक उसी तरह कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, दिल्ली की तर्ज पर देश में और कृषि अनुसंधान संस्थानों की स्थापना करने की योजना मोदी सरकार द्वारा बनाई गई है। इस क्रम में पहले झारखंड और अब असम में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की शुरूआत की जा रही है।
किसानों का हित सर्वोपरी
राधा मोहन सिंह ने कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा इस दौरान कई किसानोपयोगी योजनाओं एवं कार्यक्रमों की शुरुआत की गई है, जिनमें मृदा उर्वरता में सुधार हेतु मृदा स्वास्थ्य कार्ड; जैविक कृषि को बढ़ावा देने के उद्देष्य से परंपरागत कृषि विकास योजना के अलावा 400 करोड़ रुपये की लागत से शुरु की गई उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए जैविक वैल्यू चेन विकास मिशन का लाभ किसानों को मिल रहा है। इसके साथ ही देश की 585 थोक मंडियों को एक ई-प्लेटफार्म से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय कृषि बाजार या ई-नाम तेजी से काम कर रहा है। किसानों को आपदा से होने वाले नुकसान से बचाने हेतु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना काम कर रही है।
