
Agri Advice: किसानों की फसल खराब होने से उन्हें काफी नुकसान होता है। इसलिए फसलों को हानिकारक प्रभावों से बचाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) या पूसा के वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से किसान मजदूरों को गेहूं, चने में कीटनाशकों का खतरा बढ़ रहा है। यह चेतावनी जारी की है। इस वक्त किसानों को ज्यादा सजग रहने की जरूरत है। अगर किसी भी प्रकार की लापरवाही होती है। तो फसल बर्बाद हो सकती है।इसलिए वैज्ञानिकों ने फसलों को बड़े नुकसान से बचाने के लिए कई उपाय भी बताये है।
गेहूं की फसल के लिए उपयोगी सुझाव
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया है कि बुवाई से पहले बीजों को इमिडाक्लोप्रिड या थायोमेथोक्सम से उपचारित करें। इससे बीजों में लगने वाले रोगों और कीटों से बचाव होता है। अगर गेहूं की फसल में दीमक का प्रकोप दिखने पर बचाव हेतु क्लोरपायरीफॉस 20 ईसी या फिप्रोनिल 0.30% जीआर जैसे कीटनाशकों का उपयोग किया जा सकता है। खासतौर पर रतुआ रोग की संभावना ज्यादा है। ऐसे में फसल की नियमित रूप से निगरानी करें। काला, भूरा अथवा पीला रतुआ आने पर फसल में डाइथेन एम-45 (2.5 ग्राम/लीटर पानी) का छिड़काव करें। पीला रतुआ के लिये 10-20 डिग्री सेल्सियस तापमान उप्युक्त है। 25 डिग्री सेल्सियस तापमान से उपर रोग का फैलाव नहीं होता। भूरा रतुआ के लिये 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ नमी यूक्त जलवायु आवश्यक है। काला रतुआ के लिये 20 डिग्री सेल्सियस से उपर तापमान ओर नमी रहित जलवायु आवश्यक है।
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चने की फसल को कीटों और रोगों से बचाने के उपाय
वैज्ञानिकों ने चने की फसल के लिए भी सलाह जारी की है। वैज्ञानिकों का कहना है कि खेत को अच्छी तरह से जुताई करें और खरपतवारों को नष्ट करें। चने में फली छेदक कीट की निगरानी हेतु फीरोमोन प्रपंश 3-4 प्रपंश प्रति एकड़ उन खेतों में लगाएं जहां पौधों में 40-45% फूल खिल गये हों। अगर फसलों में किट लगे हो तो डाइक्लोरवास 76% ईसी 500 मिलीलीटर या प्रोफेनोफॉस 50% ईसी 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी 100 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव भी कर सकते है।
