
नई दिल्ली: देश में दलहन उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार न सिर्फ दलहन की खेती का दायरा बढ़ा रही है। बल्कि किसानों को समर्थन मूल्य (MSP) पर दालों की खरीद के जरिए आर्थिक रूप से भी प्रोत्साहित कर रही है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक, दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों में भी दलहन की बुवाई को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत किसानों को तकनीकी मदद, बीजों की उपलब्धता और बाजार समर्थन जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।
इसी क्रम में शुक्रवार को केंद्र सरकार ने तुअर (अरहर) दाल की खरीद से जुड़े आंकड़े जारी किए। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार, मूल्य समर्थन योजना (PSS) के अंतर्गत इस वर्ष अब तक 3.4 लाख टन तुअर दाल की खरीद की जा चुकी है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरकार दालों की पर्याप्त खरीद कर रही है ताकि किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके।
10 लाख टन बफर स्टॉक बनाए रखने का लक्ष्य
इस योजना के तहत सरकार खाद्य एजेसियों के जरिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर तुअर खरीद रही है। केंद्र ने नौ राज्यों से 13.22 लाख टन तुअर की खरीद को मंजूरी दी है। पिछले कुछ सालों से बाजार में तुअर दाल की कीमतें बहुत ऊंची चल रही हैं। ऐसे में इन्हें कंट्रोल करके रखने के लिए सरकार बफर स्टॉक में 10 लाख टन तुअर बनाए रखना चाहती है। इससे कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 13 अप्रैल तक तुअर की खरीद 3,40,000 टन तक पहुंच गई है।
कर्नाटक में हुई सबसे ज्यादा खरीद
खरीद में सबसे ज्यादा योगदान कर्नाटक में देखने को मिला है। जहां 1,30,000 टन तुअर दाल की खरीद की गई है। वहीं कर्नाटक में किसानों को 7,550 रुपये प्रति क्विंटल MSP के ऊपर 450 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस मिला है। बोनस का भुगतान राज्य की ओर से किया गया है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश से भी तुअर दाल की खरीद की गई है।
तेलंगाना-एमपी में 17 हजार टन चने की खरीद
सरकार ने मुख्य रूप से तेलंगाना और मध्य प्रदेश से 17,000 टन चने की खरीद भी की है। केंद्र ने सीजन के लिए 27 लाख टन चना खरीद की मंजूरी दी है। लेकिन बावजूद इसके खरीद बहुत धीमी चल रही है। क्योंकि घरेलू कीमतें 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाए जाने के बाद 5,650 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी से अधिक हो गई हैं। 13 अप्रैल तक मसूर (मसूर) की खरीद 28,700 टन और हरी मूंग की खरीद 3,000 टन तक पहुंच गई।
बजट में 100 प्रतिशत खरीद का प्रावधान
मालूम हो कि जब कुछ कृषि वस्तुओं के बाजार मूल्य एमएसपी से नीचे गिर जाते हैं तो सरकार पीएसएस लागू करती है। बजट 2025-26 में सरकार ने दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए 2028-29 तक केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से राज्य उत्पादन के सापेक्ष अरहर, मसूर और उड़द की 100 प्रतिशत खरीद करने की प्रतिबद्धता जताई। हाल के वर्षों में घरेलू उत्पादन में वृद्धि के बावजूद, भारत घरेलू दालों की आपूर्ति में कमी को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है।


