
पंचायत खबर टोली
नई दिल्ली: गंगा में गाद की समस्या पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का प्रयास रंग लाने लगा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 27 मई को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर गंगा में गाद की गंभीर होती जा रही समस्या का अध्ययन कराने का अनुरोध किया था। इस बीच केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने कहा है कि बिहार में गंगा नदी के प्रवाह में बाधक गाद और खनन के विषय पर विचार करने के लिए मंत्रालय द्वारा एक समिति गठित की जा रही है। उमा भारती इन दिनो गंगा निरिक्षण अभियान के तहत दौरे पर है। यात्रा के छठे दिन बिहार के सुल्तानगंज में गंगा चौपाल को संबोधित करते हुए जल संसाधन मंत्री ने कहा कि सुल्तानगंज में सीवेज शोधन संयंत्र लगाया जाएगा। उन्होंने गंगा सफाई के लिए राष्ट्रीय मिशन द्वारा चलाए जा रहे जैव विविधता तथा जल जीवन पुनर्स्थापन कार्यक्रम की चर्चा करते हुए कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत वानिकी और पौध रोपण गतिविधियां गंगा नदी के किनारे चलाई जा रही हैं, ताकि मिट्टी भूस्खलन को टाला जा सके और नदी में सीवेज तथा औद्योगिक कचरा जमा होने से रोका जा सके।

दो टीम बिहार के दौरे पर आएगी
इससे पहले बिहार के जलसंसाधन मंत्री ललन सिंह ने कहा है कि एक नहीं दो टीम बिहार में गाद की समस्या के आकलन के लिए बिहार आएगी। पहली टीम पांच जून को आएगी। इसमें केंद्र सरकार के अधिकारी के साथ आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ होंगे। दूसरी टीम बिहार सरकार की मांग पर 12 जून को पटना आएगी। विशेषज्ञों की इस दूसरी टीम में अधिकारी नहीं होंगे। ललन सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर अधिकारियों की टीम पांच जून को पटना आएगी। यह टीम बक्सर से फरक्का के बीच गंगा में गाद की समस्या का अध्ययन करेगी। दूसरी टीम 12 जून को पटना आएगी। इस टीम में जल विशेषज्ञ स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद, डॉ. जेडी अग्रवाल, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज गोपाल गौरा, आईआईटी कानपुर के प्रो. राजीव सिंह, सुप्रीम कोर्ट के वरीय वकील संजय पारी और जल विशेषज्ञ राजेन्द्र सिंह शमिल होंगे।
एनजीटी ने रूख क
ड़ा किया
एनजीटी ने बुधवार को गंगा सफाई के दूसरे चरण पर फैसला सुरक्षित कर लिया। एनजीटी अब हरिद्वार से उन्नाव तक नदी को स्वच्छ एवं साफ किए जाने के मसले पर केंद्र और यूपी सरकार को आदेश जारी करेगा। गंगा सफाई पर पर्यावरणविद् एमसी मेहता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में करीब 32 साल पहले एक जनहित याचिका दाखिल हुई थी। इसे 2014 में एनजीटी स्थानांतरित कर दिया गया था। इसके बाद एनजीटी ने गंगा सफाई मामले को चार भागों में बांट दिया था। एनजीटी 2500 किलोमीटर लंबी गंगा की सफाई पर केंद्र, उत्तराखंड, यूपी, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल समेत सभी के पक्ष सुनेगा।