
नयी दिल्ली: देश दिवाली के मुहाने पर खड़ा है। हमारे अन्नदाता भी खुशहाली का बाट जोह रहे है और उनके जीवन में खुशहाली तब आयेगी जब उनके द्वारा उगाये गये धान की फसल का सही मूल्य मिले। क्योंकि हमारा अन्नदाता यानी किसान पूरी तरह से खेती-किसानी पर निर्भर रहता है।
अभी रबी की बावग चल रही है और किसान के घर में धान है जिसको बेचने की बाट हमारे किसान भाई जोह रहे हैं। दिवाली पर्व पर धान बेचने के बाद ही किसान अपनी जरूरत की पूर्ति के लिए सामान खरीद सकता है। ऐसे में वह मंडी में धान बेचने के इंतजार में है।
लेकिन इस साल सरकारी दर पर फसलों की खरीदगी 14 नवंबर 2024 से शुरू होगी जिसे सरकार न्यूनतम समर्थन पर खरीदती है। धान की अच्छी कीमत और बोनस मिलने पर ही किसान भाई समर्थन मूल्य में ही धान बेचेंगे। ऐसे में इस साल दीपावली पर्व समय पूर्व होने के कारण में आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ेगा। हालाकि किसानों ने धाान की कटाई शुरू कर दी है। धान की वो किस्म जो शुरू में ही तैयार हो जाती हैं उसकी कटाई भी शुरू हो गई है।

गौरतलब है कि खरीफ सीजन में किसान भााईयों ने करीब 1.38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल लगाई है। वर्तमान में धान की शुरूआती बावग वाली फसल पककर तैयार है। वहीं कई किस्म के धान को अभी पकने में 30 दिन और समय लगेगा। इतना ही नहीं तैयार फसल की हार्वेस्टर से कटाई शुरू हो गई है और हमारे किसान भाई धान की सरकारी खरीदारी का इंतजार कर रहे हैं।
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लेकिन सरकार की तरफ से यह कहा गया है कि इस वर्ष धान की खरीदगी 14 नवंबर 2024 से शुरू होगी। ऐसे में किसान भाईयों की दिवाली फीकी हो सकती है क्योंकि बिना धन कैसी दिवाली।
