डीजल और उनका मरद फिर रूआंसा हो जाते है। मरद को झिड़कते हुए डीजल चिल्ला पड़ती है..फसल बटाईदार की..मुआवजा मलिकार को चलो खेत की ओर। देखें कितना पानी है। पानी घटे तो खेत की सफाई करें। खरीफ की तो गया ही अब रबी का आस है।
संतोष कुमार सिंह
सारण: बाढ़ का पानी उतड़ रहा है। हालांकि अभी भी लोग बड़ी संख्या में राहत शिविर में बने हुए हैं। बाढ़ राहत के नाम पर लोगों को कुछ खाने को सरकार की तरफ से मिल जाता है। लेकिन डीजली का ध्यान अपने खेत पर है। मर्द भी सुबह शाम जाकर खेत देख आते हैं। खेत में कुछ बचा तो नहीं हैं। मनी पर खेत लेकर बरसाती मक्का का खेती किया था। लगभग चार बिगहे की फसल थी। सुबह शाम सब बापूत मिल के सोहनी-कोड़नी करने के बाद भी कुछ जन बनिहार लगाना पड़ा था। बेटे ने समय पर बाहर से पैसा भेज दिया तो यूरिया छीट गयी थी। फसल लह लहा रहा था। उम्मीद थी कि घर मक्के के बोड़े के छल्ली से भर जाएगा। जानवर के लिए चारा और परिवार के लिए दो चार माह का जलावन भी।
लेकिन नेशनल हाईवे पर बांध टूटा और खेत में पानी भरने लगे। गंगा मैया फसल को लीलते हुए दुआरी तक आ गयी। हालांकि नेताजी कहे है कि ‘बड़े भाग की बात है कि गंगा मैया दुआरी तक आयी हैं। अब डीजली को समझ में नहीं आ रहा कि नेता जी के कहे मुताबिक गंगा जी को गुहराते हुए खुश हो,या फिर खेत से समय से पहले आने वाले कच्चे पक्के फसल को देखकर माथ पीट ले। क्योंकि मलिकार को तो मनी देना ही होगा। कट्ठा पर डेढ़ मन तय है। खरीफ तो गयी ही अब रबी का आस है। डीजली और उसका मरद इसी उधेड़बुन में पड़े हुए हैं।
तभी गांव के एक पढ़े लिखे नौजवान ने सूचना दी कि काहे चिंता में पड़ल हो डीजल सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की है। किसानों को रबी फसलों के लिए 1.5 फीसदी और खरीफ के लिए 2 फीसदी की दर से प्रीमियम देना होगा। इतना ही नहीं बीमा पर भुगतान की सीमा हटा दी गयी है। पहले किसान दावा ज्यादा राशि का करता था, और उसे मिलता कम था।
अब किसान को संपूर्ण बीमित राशि का दावा करेगा उसे उतनी राशि दी जायेगी। किसी भी तरह की कोई कटौती नहीं होगी। फसल बीमा योजना के दायरा को बढ़ाते हुए इसके तहत खेत से लेकर खलिहान तक किसानों को बीमा सुरक्षा दिए जाने का प्रावधान किया गया है। जैसे कई बार ऐसा होता है कि किसान की फसल तो ठीक हो जाती है लेकिन जब फसल खेत से खलिहान तक आती है तो इस बीच कई बार आंधी,तूफान, बवंडर, ओला या बेमौसम बारिश आदि का सामना करना पड़ता है। किसान भाईयों के इस परेशानी को देखते हुए फसल कटाई के बाद 14 दिन तक प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान को भी इसमें शामिल किया गया। इतना ही नहीं यदि बीमित किसान प्राकृतिक आपदा के कारण फसल की बुआई/रोपाई नहीं कर पाता तो भी वह फसल बीमा राशि पाने का हकदार है। अखबार की खबरों के साथ मंत्री जी का हंसता-मुस्कुराता तस्वीर।
मंत्री जी की हंसते—मुस्कुराते इस तस्वीर को देखकर और खबर सुनकर डीजल और उनके मरद के चेहरे पर भी मुस्कान तैर जाता है। क्योंकि उनको लगता है लाभ न सही, लेकिन लागत तो वापस आ जाएगा। क्योंकि फसल बीमा योजना में फसल को हुए नुकसान में लागत की पूरी भरपाई की गारंटी है। लेकिन डीजल के चेहरे पर यह मुस्कान ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी। गांव के ही फजलू ने थोड़ी उंची आवाज में बताया, तू काहे खुश होत हो डीजल। खेत तोहार थोड़े न है, और मुआवजा भी उसको मिलेगा जिसके पास पट्टा है।
फजलू ने कहा “ हमारे देश में ज्यादातर सीमांत कृषक है। बहुत सारे लोग बटाई पर खेत लेकर खेती करते हैं। किसान भाईयों की एक बड़ी समस्या रही है कि बीमा का हकदार कौन हो। खेत मालिक या बटाईदार किसान। सरकार ने इस समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्यों को नियम में बदलाव करने को कहा है ताकि बटाईदार किसानों को प्रमाण पत्र मिले और उन्हें भी फसल बीमा का फायदा मिल सके। लेकिन अभी नियम बना कहां है। और नियम बनना आसान कहां है। ‘जमीन जोतने वाले की’ अभी भी इस देश में नारा है।“
डीजल और उनका मरद फिर रूआंसा हो जाते है। मरद को झिड़कते हुए डीजल चिल्ला पड़ती है..फसल बटाईदार की..मुआवजा मलिकार को चलो खेत की ओर। देखें कितना पानी है। पानी घटे तो खेत की सफाई करें। खरीफ की तो गया ही अब रबी का आस है।
गंगा जी उतर गयी हैं। खेत में पानी जमा है। निचले खेतों में तरसोआ का पानी। यही हाल छपड़ा,सीवान, गोपालगंज सहित सभी जिलों में हैं जहां किसानों ने बड़ी मेहनत से मक्का, मसूरिया और अन्य फसलों की खेती की थी। कई ईलाकों में तो धान का बिचड़ा खेत में ही रह गया। कुछ लोगों ने लगाया भी तो कई—कई हफते तक पानी जमा रहने के कारण सारी फसल मर गयी है। गंगा अपने पीछे डीजल, फजलू, जेठू और न जाने ऐसे हजारों बंटाईदारों को रोने बिलखने के लिए छोड़ गयी हैं जिन्हें राहत शिविर से वापस जाने के बाद रोते बिलखते हुए रबी की तैयारी करनी है।

