संतोष कुमार सिंह
नई दिल्ली: एक तरफ प्रधानमंत्री जी अच्छे दिनों का सपना दिखाते हुए देश की गद्दी संभाले थे, शहर स्मार्ट और गांव मॉडल हुये जा रहे हैं और इंडिया जियो के जरिए डिजिटल हुआ जा रहा है, फिर भी भारत में रोजगारी की तस्वीर अच्छी नहीं है। बाजार के संकेत अच्छे नहीं हैं। बढ़ती हुई बेरोजगारी देश के बड़ी चुनौती बनी हुई है, चाहे शहरी बेरोजगारी हो ग्रामीण बेरोजगारी। मानसून अच्छी है लेकिन देश का बड़ा ईलाका बाढ़ की चपेट में रहा है।
बीएसई और सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) द्वारा जारी आंकड़ो के मुताबिक अगस्त महीने में भारत में बेरोजगारों की संख्या बढ़ी है। और इस दौरान पूरे देश में बेरोजगारी की दर 9.84 फीसदी तक पहुंच गई। हालांकि संतोष की बात यह है कि गांवों के मुकाबले शहरों में बेरोजगारी ज्यादा है। अगस्त माह में ग्रामीण इलाके में बेरोजगारी की दर 9.18 फीसदी रही वहीं शहरी इलाकों में बेरोजगारी की दर जहां 11.24 फीसदी थी।
गांवों में रोजगार लेकिन तेजी से बढ़े हैं बेरोजगार
बीएसई ने सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के साथ मिलकर यह डाटा तैयार किया है। अप्रैल 2016 से इस दिशा में काम करते हुए बेरोजगारी के सटीक आंकड़े पेश करने की अपनी कोशिश के तहत इन दोनों कंपनियों ने जुलाई में भी बेरोजगारी का आंकड़ा दिया था। बीएसई ने बताया कि जुलाई महीने में बेरोजगारी शहर में 10.76 फीसदी थी, जो अगस्त में बढ़कर 11.24 फीसदी हो गई।
गांवों में बेरोजगारी पर शहरों के मुकाबले कम
बेहतर मानसून से गांवों में कुछ राहत जुलाई में देश में कुल बेरोजगार 8.65 फीसदी थे। जून में यह आंकड़ा 8.84 पर ठहरा था। सीएमआईई के एमडी और सीईओ महेश व्यासके मुताबिक ग्रामीण हिस्सों में शहर के मुकाबले बेरोजगारी कम रहने के पीछे अच्छा मानसून है। उनके मुताबिक इस दौरान बेरोजगार खेती-किसानी में लग गए। इससे मई तक बेरोजगार लेबर…मई तक बेरोजगार लेबर फोर्स को इस महीने में रोजगार हासिल हो गया। हालांकि, उन्होंने कहा कि गांवों में बढ़ती बेरोजगारी ग्रामीण आर्थिक क्रियाकलापों के धीमी होने के संकेत हैं।
बेरोजगारी बढ़ी, मजदूरी भी बढ़ी
हालाकि विभिन्न मजदूर संगठनों ने बीते दो सितंबर को न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी की मांग को लेकर हड़ताल की थी। उनकी मांग है कि मजदूरो की मासिक वेतन कम से कम 18,000 हजार रूपया किया जाए। मंगलवार को केंद्र सरकार के अकुशल गैर-कृषि कामगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी 350 रुपए दैनिक कर दी है जो अभी 246 रुपए है। वित्त मंत्री अरूण जेटली के मुताबिक, न्यूनतम मजदूरी तय करने के तौरतरीकों को ध्यान में रखकर ‘सी’ श्रेणी के क्षेत्रों के लिए गैर-कृषि क्षेत्र में कार्यरत अकुशल कामगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी 350 रुपए दैनिक तय करने का फैसला किया गया है।

