draught affected farmer

गंगा तो उतर गईं, लेकिन पीछे छोड़ गयीं बर्बादी का मंजर

डीजल और उनका मरद फिर रूआंसा हो जाते है। मरद को​ झिड़कते हुए डीजल चिल्ला पड़ती है..फसल बटाईदार की..मुआवजा मलिकार को चलो खेत की ओर। देखें कितना पानी है। पानी घटे तो खेत की सफाई करें। खरीफ की तो गया ही अब रबी का आस है। संतोष कुमार सिंह सारण: बाढ़ का पानी उतड़ रहा …

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दिल..दिमाग …सरकार सब आबाद, फिर किसान बर्बाद क्यों?

संतोष कुमार सिंह नयी दिल्ली: सूखे की अपनी राजनीति है, सूखे की अपनी सामाजिकता है, सूखे का अपना अर्थशास्त्र है..अपने आंकड़े हैं, अपने—अपने दावे हैं और इन दावों के बीच पिसता है हमारा अन्नदाता। जो कभी सूखा परने पर खेत में ही दम तोड़ देता है, तो कभी बिस्तर पर। तो कभी इस उम्मीद में …

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