परंपरागत खेती की बजाय मत्सय पालन से बढ़ेगी किसानों की आमदनी

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मत्सय पालन से जुड़े विभिन्न बिंदूओं पर पीजी कॉलेज के कृषि संकाय में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ एस एन सिंह से बातचीत की पंचायत खबर के रोविंग एडिटर अमितेश सिंह ने जिससे मत्सय पालन करने वाले किसान भाई इस खेती से जुड़े विभिन्न पहलूओं की जानकारी प्राप्त कर सकें और परंपरागत खेती के साथ या उसके बदले मत्स्य पालन को अपनीे जीविकोपार्जन का जरिया बना सकें। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश:

प्रश्न: सरकार की यह कोशिश है और कई योजनाएं चलाई जा रही है कि किसान भाई मत्सय पालन करें? पारेपरिक खेती को छोड़के किसान यदि मत्सय पालन अपनाते है तो इसको आप कितना सूझ बूझ भरा कदम मानेंगे और इसके तात्कालिक लाभ विषय विशेषज्ञ होने के नाते आप क्या गिनायेंगे ?
उत्तर: मत्सय पालन ही नहीं डेयरी एवं अन्य चीजों पर सरकार राशि दे रही है। पोखरे की खुदाई पर ध्यान है। सरकार की कोशिश है कि वार्टर हार्वेस्टिंग हो और साथ ही मत्सय पालन भी हो। इसके दो फायदे होंगे पर्यावरण की सुरक्षा भी होगी,मछली उत्पादन भी बढ़ेगा और किसानों की आय बढ़ेगी। आय बढ़ने पर हमारे किसान भाई बहुत सारी चीजों को समृद्ध बना सकते हैं और कर सकते हैं।
सरकार द्वारा जो प्रोत्साहन राशि दी जाती है तो मछली से मुर्गा पालन तक उसी पोखरे में बाड़ लगा कर करते हैं तो कई काम एक साथ कर सकते हैं। लेकिन यह कम स्केल पर किया जाए तो किसानों के लिए ज्यादा लाभप्रद रहेगा और जहां तक पारंपरिक खेती की बात है तो इसमे बहुत सारे मजदूरों की जरूरत है जो यहां पर कम है। आप खुद या एक दो लोगों के साथ मिलकर भी मत्सय पालन कर सकते हैं जबकि पारंपरिक खेती में 8—10 लोगों की जरूरत होती है। जितना फसल नहीं होती,उससे ज्यादा मजदूरी जाती है। इस लिहाज से देखा जाए तो मत्सय पालन में लाभ ज्यादा है, हानी कम है। थोड़ा सुरक्षा रखी जाए तो इसे बेहतर कमाई का जरिया बनाया जा सकता है।

प्रश्न:डॉ सिंह आम तौर पर किसानों से बातचीत होती है तो वे कई बिंदूओं पर चर्चा करते हैं जैसे कि जानकारी का अभाव।  जबकि आपकी राय है कि मत्सय पालन के साथ ही और भी चीजे जोड़ी जा सकती हैं जरा इसको विस्तार से बताएं कि और कौन कौन सी योजनाएं है जो सीधे तौर पर मत्सय पालन से जोड़ कर की जा सकती हैं?
उत्तर: मछली पालन के साथ आप सूअर पालन कर सकते है। इसके साथ ही कुक्कुट पालन किया जा सकता है। मुर्गा पालन का जो बीट होता है वो सीधे तौर पर पोखरे या तालाब में डाला जा सकता है जो उनके भोजन के काम आ सकता है। नीचे मछली और उपर मुर्गे का काम किया जा सकता है। इससे पोखरा भी साफ होता है और आपका लक्ष्य भी हासिल होता है। इसके साथ ही बाड़ बनाकर सूअर पालन का भी काम किया जा सकता है। साफ सफाई के लिए पानी की आवश्यकता होती है जो आप पोखरे के पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं। बाड़ बनाकर सूअर पाला जा सकता है। डेयरी उद्योग को भी जोड़ा जा सकता है लेकिन यह थोड़ा कठिन है। बाकी दो को अच्छे से किया जा सकता है।
प्रश्न: प्रतिकूल मौसम में जैसे कि सर्वाधिक गर्मी या सर्वाधिक ठंढ़ के दौरान हमारे मत्सय पालक किसानों को किन बातों का ध्यान देना चाहिए?
उत्तर: प्रतिकूल मौसम जैसै कि जाड़ा आपने देखा होगा कि मछलियां कीचड़ में चली जाती हैं। वे खुद को सुरक्षित करने में सक्षम है। पानी उपर का ठंढ़ा होता है न कि भीतर का। इसी तरह गर्मी में यदि लगता है कि पानी पोखर मे कम है तो थोड़ा पानी चलवा दिया जाना चाहिए। चूंकि वे नीचे बैठ जाती है इसलिए आक्सीजन की मात्रा को बढ़ाने के लिए बूझा हुआ चूना डाल दें ताकि आक्सीजन की मात्रा मछलियों को मिल जाएगा। साथ ही पानी डालने से या चला देने से तापमान कम होता है ओर पानी का स्तर भी बढ़ जाता है।

प्रश्न: डॉक्टर साहब पोखरे की साफ सफाई भी किसान भाईयों के लिए महत्वपूर्ण विंदू होता होगा। किसान भाई पोखरे की साफ सफाई को लेकर समान्यत: किन बिंदूओ का ध्यान रखे? ताकि ज्यादा से ज्यादा उत्पाद ले सकें विशेष रूप से ग्रामीण अंचल का किसान जिनके पास इस तरह की सूचनाओं का अभाव होता है उनको क्या कहेंगे?
उत्तर: साफ सफाई के लिहाज से हरित शैवाल जरूरी है। भले ही यह मछली मारने में परेशानी उत्पन्न करेगा लेकिन मछलियों को बढ़ने में काफी सहायक होती हैं। यह डायरेक्ट प्रकाश को रोक देती हैं और पोखरे का वातावरण बना रहता है। मछलियां इस वातावरण में जितना विचरण करेंगी उतना स्वस्थ रहेंगी और तेजी से बढ़ेंगी।
प्रश्न: किसान भाईयों को मछलियों के उन प्रजातियों के विषय में बतायें जो जल्द से जल्द तैयार हो जाए और किसान भाई अधिक से अधिक मुनाफा ले सकें?
उत्तर’ खासतौर से हमारे पूर्वी जोन में जो प्रचलित है रोहू हो, गिरई हो, कटला हो, सिंघी हो,नयना यही मछलियां हाई वेराइटी है जो कि यहां के लोग पसंद करते हैं और जो उच्च उत्पादन वाली वेराईटी हैं, उन्हें ही पोखरा में डाला जाए तो किसान भाईयों को अधिक से अधिक लाभ होगा और ये सुरक्षित भी होंगी।
प्रश्न’ डॉ साहब आपके मुताबिक कौन सा आदर्श वक्त माना जाए कि जब पोखरे में मछलियों को छोड़ा जाए तो उनके अंदर जो मछलियों के बीज के नुकसान की जो संभावना होती है वो कम होगी और ज्यादा से ज्यादा मछलियों में बढ़त होगी?
उत्तर: खासतौर से मछलियां बरसात के बाद ही डाली जाए जब पानी इधर—उधर न जाएं इस लिहाज बरसात के बाद ही मछलियों को तालाब में डाला जाए। बरसात में मछलियांं इधर से उधर नहीं भाग पाती है। बरसात से लेकर जैसे ही र्मी का सीजन आता है उन दो तीन महीनों में हमारी मछलियां तैयार हो जाती है और बेचने लायक हो जाती हैं इसलिए बरसात के बाद ही पोखरे या तालाब में मछली का बीज डालें।
प्रश्न: अंत में ऐसा कौन सा हिदायत या  सुझाव देना चाहेंगे जिसे हमार किसान भाईयों को ध्यान देना अति आवश्यक है, जो नये किसान भाईयों को देना चाहेंगे।
उत्तर: सामान्य सुझाव यही है कि मछली पालन काफी लाभप्रद है लेकिन सुरक्षा भी जरूरी है। पोखरे को बाड़ लगाकर सुरक्षित करें ताकि वे सुरक्षित रहे ताकि कोई वैमन्स्यता वस भी कोई नुकसान न पहंचा पाये। इस लिहाज से देखें तो परंपरागत खेती से मछली पालन का व्यवसाय काफी लाभप्रद है जो उन्हें परंपरागत खेती की तुलना में काफी लाभ देती हैं।

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