घरेलू एवं जंगली पशुओं से परेशान, यूपी एमपी सहित पूरे देश के किसान

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खेती-किसानी में आज के युवाओं की रुचि घटती जा रही है। जलवायु परिवर्तन तेजी से हो रहा है। मौसम की अनिश्चितताओं की वजह से खेती में नुकसान की संभावना बढ़ती जा रही है। बड़ी संख्या में गांवों से लोग रोजी के लिए शहरों का रुख कर रहे हैं। ऐसे में खेती के लिए मानव संसाधन भी घट रहा है। ऐसे में अगर एक और बाधा बढ़ जाए तो निश्चित ही देश का किसान हतास होगा।

बार-बार मौसम परिवर्तन और मजदूरों की कमी से परेशान अन्नदाता

उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद पशुओँ के स्लॉटर पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, जिसके बाद से अवैध तरीके से चलने वाले स्लॉटर हाऊस बंद हो गए। प्रदेश के किसी भी गांव में आपको कम से कम 5 से 10 छुट्टे सांड देखने को मिल ही जाएंगे। प्रदेश की सरकार इन जानवरों के प्रबंध का दावा तो करती है लेकिन वास्तव में छोटी जोत वाले किसान काफी नुकसान उठा रहे हैं।

 

किसान की खेती खा रहे जंगली जानवर

उत्तर प्रदेश के पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश मे कहानी थोड़ी भिन्न है। राज्य के कुछ जिलों विशेष रूप से निमाड़ और मालवा अंचल में किसान जंगली जानवर से काफी परेशान हैं। यहां किसान की खेती को जंगली सुअर, नीलगाय, हिरण, बंदर जैसे वन्यजीव चौपट कर रहे हैं। इनकी संख्या इतनी ज्यादा हो गई है कि किसानों को इसका उपाय नहीं सूझ रहा है। वे कई उपाय कर चुके है, लेकिन राहत नहीं मिली। मालूम हो कि इस संबंध में किसान और उनके संगठन बन विभाग, जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक को ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन किसानों की समस्या अभी ज्यों की त्यों बनी हुई है। किसानों के सामने ठीक वही समस्या है जैसे की उत्तर प्रदेश में। दुविधा यह है कि यदि किसान जानवरों को किसी भी तरह प्रताड़ित करें, तो वन्य प्राणी अधिनियम रोकता है। ऐसा करने पर सजा का प्रावधान हैं। इसलिए किसान शासन से सहायता चाहते हैं।

मालवा-निमाड़ में इनकी आबादी बेकाबू

मालवा व निमाड़ में जंगली सुअर, काले मुंह वाले लंगूर, लाल मुंह वाले बंदर, नील गाय जिसे यहां रोजड़ा या घोड़ारोज भी कहते हैं, इत्यादि जानवरों की आवादी अनियंत्रित होती जा रही है।

20 से 30 प्रतिशत तक फसलों का नुकसान

पंचायत खबर के माध्यम से हम किसानों की समस्या को अपने स्तर पर उठा रहें हैं। यह कहानी सिर्फ उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश की नही है कमोबेश इस समस्या से पूरा देश ही जूझ रहा है। उत्तर प्रदेश के किसान छुटैल पशुओं से परेशान है तो वहीं मध्य प्रदेश झुंड में रहने वाले नीलगाय और जंगली सुअर आदि से परेशान हैं। नीलगाय और जंगली सुअर रात में तो हिरण और बंदर दिन के समय खेतों में  उत्पात मचाते हैं। मालूम हो कि हिरणों के झुंड में 150 से 200 से अधिक संख्या होती है, जिस जगह खेत में खड़े होते हैं, वहां अधिकांश खेती को उजाड़ देते हैं। औसतन किसान को एक सीजन में 25 से 30 प्रतिशत तक नुकसान हो रहा है।

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