कर्जमुक्ति और ड्योढ़े दाम की मांग लेकर देश भर से हजारों किसान पहुंचे जंतर-मंतर

0
295

संतोष कुमार सिंह

  • दिल्ली के जंतर मंतर पहुँची मंदसौर से चली 13-दिवसीय किसान मुक्ति यात्रा। कल भी जारी रहेगा धरना।
  • सत्तापक्ष और विपक्ष के भी कई सांसद पहुँचे जंतर मंतर, किसान मुक्ति संसद को दिया समर्थन।

नयी दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन एक ओर जहां बसपा नेता मायावती ने राज्यसभा से इस्तिफा देकर चौंकाया वहीं दूसरी ओर जंतर—मंतर पर भी जन संसद लगी। किसानों की जन संसद जहां हजारों किसानों से सरकार से हिसाब मांगा…अपने बेहतरी के लिए किये गये वादों पर जवाब मांगा। किसानो अटा पड़ा है। मध्यप्रदेश के मंदसौर से चली ऐतिहासिक किसान मुक्ति यात्रा देश के छह राज्यों से होते हुए 13 दिनों बाद जंतर—मंतर पहुंची।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले 150 से अधिक किसान संगठनों की बस दो ही मांग है..फसल का पूरा दाम मिले और किसानों को पूर्णरूप से कर्जमुक्त किया जाए। एक ओर जहां किसान संगठनों के प्रतिनिधि अपनी मांगों के प्रति मुखर हुए वहीं भीड़ में शामिल हर किसान अपने नेताओं के मांग के प्रति संकल्पित दिखा।

वादा निभाए सरकार

उत्तर प्रदेश के जिला शामली से आए रंधीर सिंह कहते हैं कि हम कुछ नया नहीं मांग रहे हैं। हम तो वही चाहते हैं जिसका सरकार ने वादा किया था।  प्रधानमंत्री पद नरेंद्र मोदी ने दो बात कही थी किसानों की कर्ज माफी और किसानों की दुगुनी आए। वादा था लागत मूल्य पर 50 फीसदी लाभ देने का। वो अपने वादे से पीछे नहीं हट सकते। किसान यही चाहते हैं। रंधीर सिंह कहते हैं कि किसान अपनी जमीन को एक साल अवकाश देने का अभियान चलायेंगे। भूमी से तीन लोग जुड़े हैं..उपभोक्ता,उत्पादक और व्यापारी। किसान एक दानों से हजार दाने उगाता है लेकिन जब वह अपनी उत्पाद लेकर बाजार में जाता है तो उसकी कीमत माइनस में हो जाती है। ऐसे में किसान संगठन इस बात का अभियान चलायेंगे कि खेत को एक साल तक परती रखा जाए। यदि किसान जाग जाएंगे तो ​सरकार को सबकुछ समझ में आ जाएगा। कर्ज माफी के सवाल पर उन्होंने कहा कि एक लाख की कर्ज माफी उनकी हुई है जो देना नहीं चाहते। वास्तविक किसानों को इस कर्ज माफी से कोई फायदा नहीं हुआ। संभल के किसान सतवीर सिंह कहते हैं कि पिछले 10—15 वर्षों में जितने किसानों ने आत्महत्या की है यदि सरकार संवेदनशील होती तो हाहाकार मच जाता। लेकिन सरकार उदासीन है। आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। केंद्र सरकार राज्य सरकार पर थोपती है और राज्य केंद्र पर लेकिन किसान को दुरावस्था से निकालने का संकल्प किसी सरकार के पास नहीं है।

ग्रेटर नोएडा कैमराला चकरपुर से बड़ी संख्या में महिला किसान आई हैं। वहीं से आईं कुसुम कहती हैं कि उनकी जमीन हाईवे के लिए ले ​ली गई लेकिन कानून के मुताबिक चारगुणा मुआवजा नहीं दिया गया।

तमिलनाडु के किसान भी आए समर्थन में 

तमिलनाडु के किसान नेता अय्याकन्नू के नेतृत्व में तमिलनाडु के किसानों ने किसान मुक्ति संसद को अपना समर्थन दिया। वहीं महाराष्ट्र के उन किसानों के बच्चों ने जिन्होंने आत्महत्या कर ली है, किसान मुक्ति संसद में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के द्वारा अपनी दुर्दशा पर ध्यान आकृष्ट किया। जंतर मंतर पर उपस्थित इन बच्चों में से एक अशोक पाटिल ने कहा, “मुझे दुख है क्योंकि मेरे पिता ने आत्महत्या की है लेकिन मैं इस देश के सभी किसानों को बताना चाहता हूँ कि आत्महत्या के विकल्प को छोड़कर हमें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष का रास्ता अपनाना होगा।”

किसान संसद को राजनीतिक नेताओं का समर्थन

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के नेताओं के आह्वान पर सत्तापक्ष और विपक्ष के  सांसदों ने किसान मुक्ति संसद में हिस्सा लेकर किसानों की माँगों का भरपूर समर्थन मिला। राजू शेट्टी(स्वाभिमानी शेतकारी संगठन), डॉ. धर्मवीर गांधी(आम आदमी पार्टी), तपन कुमार सेन(सीपीएम), शरद यादव(जेडीयू), अली अनवर (जेडीयू), मोहम्मद सलीम(सीपीएम),जितेंद्र चौधरी, सीताराम येचुरी,अरविंद सावंत(शिवसेना),बीआर पाटिल(कांग्रेस),शैलेन्द्र कुमार(जेडीयू),मो. मदरुद्ददुजा,शंकर दत्ता,श्रीमोती और अन्य सांसदों ने किसानों की माँगों का समर्थन करते हुए किसान मुक्ति संसद में शामिल हुए।

क्या कहा नेताओं ने

किसान मुक्ति संसद में बोलते हुए, एमपी राजू शेट्टी नेसांसदों का आह्वान करते हुए कहा कि सभी सांसद,संसद जाने से पहले  जंतर-मंतर आएँ और किसानों की माँगों का समर्थन करें।मेधा पाटेकर ने कहा कि सरकार की किसान और आदिवासी विरोधी नीतियों से पूरा देश परेशान है और अब हम आर-पार की लड़ाई करने के लिए तैयार हैं।

वहीं माकपा अध्यक्ष व सांसद  सीताराम येचुरी ने कहा, “आप सभी के साथ मैंने भी किसानों अधिकारों के लिए लड़ने का वादा लिया और आपसे यह भी वादा करता हूँ कि मैं इस लड़ाई को संसद में ले जाऊंगा।”

जदयू नेता शरद यादव ने कहा, “यह सिर्फ किसानों की लड़ाई नहीं है, यह पूरे देश की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि जब आप संसद के बाहर यह लड़ाई लड़ रहे हैं, उसी समय  मैं संसद में किसानों की माँगों को समर्थन दूँगा। उन्होंने यह भी वादा किया कि किसानों की लड़ाई के समर्थन में हम पूरे विपक्ष की ओर से एक रैली का आयोजन करेंगे।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक वीएम सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ये सरकार किसानों का हक़ नहीं देने वाली है। हमें अपना हक छीन कर लेना होगा।उन्होंने मंदसौर से आये किसानों का मंच पर बुलाकर स्वागत भी किया। किसानों से रूबरू योगेंद्र यादव ने कहा कि किसानी का दो तिहाई काम करने वाली महिलाओं ने इस किसान मुक्ति संसद को ऐतिहासिक बना दिया है।वहीं प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार बड़े पूंजीपतियों और कम्पनियों को लाभ पहुंचाने के लिए किसानों को कुचलने पर उतारू है।

सभा का संचालन डॉ. सुनीलम ने माँग किया कि किसानों पर गोली चलाने वाले पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो और ऋणमुक्ति और पूरे दाम की माँग को सरकार जल्दी से जल्दी स्वीकार करे।

ज्ञात हो कि अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति द्वारा आयोजित किसान मुक्ति यात्रा 6 जुलाई को मध्यप्रदेश के मन्दसौर से शुरू होकर महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश होते हुए मंगलवार को दिल्ली पहुंची है। धरणा कल भी जारी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here