संतोष कुमार सिंह
नई दिल्ली: देश के अलग—अलग राज्यों में किसानों की बढ़ती आत्महत्या और दुरावस्था पर एक तरफ जंतर—मंतर पर आयोजित किसान मुक्ति संसद का आयोजन किया गया,वहीं दूसरी तरफ संसद में भी माहौल गर्म रहा। जनसंसद में कहा गया कि किसान की स्थिति दिनो दिन बदहाल होते जा रही है वहीं संसद भी किसानों की स्थिति पर चिंतित दिखा। हालांकि कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने दुहराया कि वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दुगुनी हो जायेगी।
जन संसद में आत्महत्या कर चुके महाराष्ट्र के किसानों के बच्चों ने अपनी पीड़ा को एक नाटक के ज़रिए सबके सामने रखा। इस नाटक में उन लोगों ने दिखाया कि एक किसान की आत्महत्या के बाद उसके परिवार पर क्या गुज़रती है। बेहद दयनीय स्थिति को लेकर बुधवार को संसद के दोनों सदनों में काफी चिंता जताई गई। लोकसभा में किसानों की स्थिति पर लंबी चर्चा का जवाब देते हुए कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि सरकार किसानों की स्थिति को सुधारने के लिए दीर्घकालिक नीति के तहत काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार हर हाल में किसानों की आय तो पांच वर्षो में दोगुनी करने के लिए दृढ़ है और इसके लिए हर स्तर पर काम किया जा रहा है।
जन संसद में उत्तरप्रदेश के आलू किसानों ने आलू के गिरते दाम के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश से आलू किसानों के नेता आमिर ने कहा – “सरकार चाहती है कि हम अपनी फ़सल कोल्ड स्टॉरिज में रखें। लेकिन सच्चाई ये है कि हमारी फसल का जो दाम हमें मिल रहा है वो कोल्ड स्टॉरिज में रखने के ख़र्च से भी काफ़ी कम है।
वहीं लोकसभा में कृषि मंत्री ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाना सिर्फ एक विकल्प है लेकिन सरकार इससे आगे की सोच रही है। हमारी कोशिश है कि उत्पादों की उचित मूल्य दिलाई जाए। इसके लिए राज्यों की सहमति से मंडी कानून में आवश्यक संशोधन किया जा रहा है। अब तक 450 मंडियां ई-प्लेटफार्म पर आ चुकी हैं। यह कदम किसानों की स्थिति सुधारने में युगांतकारी साबित होगा। राज्यों को कहा गया है कि वे जल्दी से अपना पोर्टल बनाये। यह सारा काम मार्च, 2018 तक पूरा कर लिया जाएगा।
जनसंसद में पहुंचकर भूतपूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी ने किसानों की दो माँगों पर सहमती जताई कि किसानो को ऋणमुक्त किया जाए तथा उनकी आय को बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि यह समय अपनी पार्टी तथा राजनीति से ऊपर उठकर हमें किसानों के साथ न्याय के इस संघर्ष में साथ होना चाहिए।
राधा मोहन सिं ने लोकसभा में कहा कि खेती की लागत को कम करने के लिए सरकार ने पहले ही परंपरागत कृषि प्रणाली पर जोर दे रही है। इसके साथ नई प्रणाली में जैविक खेती, रासायनिक खादों व कीटनाशकों के कम से कम प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। मिट्टी की जांच से अंधाधुंध खाद के प्रयोग पर अंकुश लगाने की कोशिश हो रही है। एक अध्ययन में पाया गया कि इससे 10 फीसद यूरिया की खपत कम हुई है। नीम कोटेड यूरिया का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और यह देश में खेती को सुधारने में बहुत उपयोगी होगा।
जनसंसद में आकर राजू शेट्टी ने संसद से वाक आउट करने की जानकारी दी। राजू शेट्टी ने कहा – “मैं उस हाउस में मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकता जहाँ किसानों की आवाज को दबाया जा रहा हो।”
लोकसभा में 193 के तहत चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मध्य प्रदेश में पिछले 30 दिनों में 65 किसानों ने आत्महत्या की है लेकिन राज्य सरकार का एक मंत्री किसी मृत किसान के घर पर नहीं गया।
जनसंसद में आत्म हत्या कर चुके किसान के परिवार का बच्चा अशोक पाटिल ने अपनी व्यथा प्रकट करते हुए कहा कि बहुत सारे नेता हमारे घर हमसे मिलने आये और हमसे बहुत सारे वादे करके गए, लेकिन हमें मिला क्या? सिर्फ अगले दिन के अखबार में नेताओं के साथ छपा एक फोटो। वो हमें मदद करने आये थे या सेल्फी लेने आये थे?”संसद में जहां कहा गया कि किसानों में निराशा की आग सिर्फ मध्य प्रदेश तक नहीं है बल्कि यह महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात और उत्तर प्रदेश तक पहुंच चुकी है। किसानों को कहीं आशा की किरण नहीं दिखाई दे रही है।
किसान आंदोलन के संयोजक वीएम सिंह ने किसान मुक्ति यात्रा के अगले चरण की घोषणा करते हुए कहा – “हमलोग यहीं नहीं रुकने वाले हैं, हमलोग पूरे देश के किसानो को संगठित करेंगे। हमलोग चार और यात्रा निकालेंगे जो कि हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड तथा बिहार में होगी। यह यात्रा 2 अक्टूबर को फिर दिल्ली पहुंचेगी और सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो हमलोग पूरे देश में अनिश्चितकालीन अनशन करेंगे।”
कांग्रेस की तरफ से सरकार के सामने नौ मांगे भी रखी गई। इसमें स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट के मुताबिक कदम उठाने की बात है। इसमें किसानों पर बकाये कर्ज को पूरी तरह से माफ करने की भी मांग है। गन्ना किसानों के लिए ज्यादा कीमत मांगी गई है। अनाज की तरह सभी सब्जियों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की भी मांग रखी गई है। पीएम फसल बीमा योजना के तहत मौजूदा नियमों को बदलने की भी मांग की गई है ताकि किसानों को ज्यादा राशि मिल सके।
वहीं जन संसद में योगेंद्र यादव ने कहा कि “यह आन्दोलन किसान आंदोलनों के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। इस आंदोलन ने अलग अलग दल और विचारधारा के देश भर के किसान संगठनों के नेताओं को एक किया है। साथ ही, आज किसानों की युवा पीढ़ी भले ही किसानी छोड़ने पर मजबूर हो रही है, लेकिन वो किसानों की वेदना को भूली नहीं है। अब किसान निर्णायक संघर्ष करेगा।”
