पूजा श्याम देव
Mustard Crop: रबी सीजन की फसल, सरसों के रकबें में गिरवाट दर्ज हुई है। वहीं इसका प्रभाव उत्पादन पर देखने को मिला है। अब सरसों के पौधों पर माहू-चेपा कीटनाशकों का खतरा मंडरा रहा है। अगर हल्की सी लापरवाही हुई तो किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। पैदावार कम होने के साथ सरसों में तेल की मात्रा भी घट सकती है। कृषि विभाग ने बताया की इस कीट की शिशु और प्रौढ़ पीलापन वह हरे रंग के होते हैं। जो पौधों के तनों में जाकर पत्तियों फूल और नए फलियों के रस को चूसकर कमजोर कर देते हैं।
कौन से है रोग
सरसों में चेपा, माहू या एफिड भी कहा जाता है। यह कीट सरसों के पौधों के रस को चूसकर उन्हें कमजोर कर देता है। इसके कारण पौधों की वृद्धि भी रुक जाती है। और उपज में कमी आती है। यह कीट ठंडे वाले मौसम में हवा के मध्यम तेजी से फैलता है। कृषि विभाग के अनुसार माहू मधुस्राव करते हैं। पत्तियों पर चिपचिपा पदार्थ (हनीड्यू) जमा होना, जो बाद में काले कवक में बदल सकता है। जिससे पौधे प्रकाश संश्लेषण (फोटो सिंथेसिस) प्रक्रिया में रूकावट आती है। जिससे पौधे जल्द खराब होने लगते हैं। इससे पौधे की उपज और तेल की मात्रा पर नकारात्मक पर प्रभाव पड़ता है। क्योंकि ऐसा मौसम कीट की वंशवृद्धि के लिए ज्यादा अच्छा होता है।
फसल को कीटों से बचाने के लिए निम्नलिखित उपाय
1. एक ही फसल को बार-बार न उगाएं। फसल चक्र अपनाने से कीटों के जीवन चक्र को बाधित किया जा सकता है।
2. सरसों की खेती करने वाले काश्तकार अपनी फसल को माहू कीट से बचाने के लिए रासायनिक या जैविक नियंत्रण जरूरी करे।
3. रोगमुक्त और स्वस्थ बीजों का उपयोग करें।
4. इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल 40 एमएल प्रति एकड के हिसाब से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से ये कीट फसल से दूर रहता है।
5. जैविक नियंत्रण में फसल में नीम के तेल या साबुन के घोल का छिड़काव करे। यह कई कीटों के लिए एक प्राकृतिक कीटनाशक है। और लेडीबर्ड बीटल, परजीवी ततैया आदि जैसे प्राकृतिक शत्रुओं को बढ़ावा दें।
6. इस उपचार से कीटों से फसल नियंत्रित रहने के साथ ही पौधों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिलती है।
7. खरपतवारों को नियमित रूप से हटाएं क्योंकि वे कीटों के आश्रय स्थल होते हैं।
8. अपनी फसल को नियमित रूप से देखें ताकि कीटों के हमले का समय पर पता चल सके।
9. नीम की निंबोली के सत का 5 प्रतिशत घोल बनाकर छिड़काव करें।
10. डाइमिथोएट घटक युक्त अग्रोअर या प्रोफ़ेनोफ़ॉस 40% + साइपरमेथ्रिन 4% ईसी घटक युक्त हेलिओक्स का छिड़काव करें।
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सही समय पर कीटनाशक का उपयोग और नियमित नियंत्रण से माहू या चेपा कीट के प्रकोप से फसल को किसान बचा सकता है। इससे फसल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार होगा। वरना पौधों का प्रकाश संश्लेषण प्रभावित होता है। वह पौधों का विकास रुक जाता है। और उपज और तेल की मात्रा में कमी हो सकती है।

