फसल बीमा योजना अपनाने से हिचकते राज्य

अमरनाथ झा
पटना: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का दायरा सिकुड़ने लगा है। इसके दायरे में समेटे गए किसानों की संख्या और बीमा की रकम दोनों में गिरावट आने लगी है। हालांकि इस योजना को कई राज्यों ने अभी तक स्वीकार नहीं किया है, कुछ राज्य इसके दायरे से बाहर निकल गए हैं। इन राज्यों में आंध्र प्रदेश, तेलांगना, झारखंड,गुजरात और मध्यप्रदेश शामिल हैं।


सरकारी आंकड़ो के अनुसार दस अगस्त तक तक देश के केवल 1 करोड़ 12 लाख किसानों ने फसल बीमा योजना के अंतर्गत निबंधन कराया है। मौसम आधारित फसल बीमा स्कीम के अंतर्गत अन्य 2 लाख 45 हजार किसानों ने निबंधन कराया है। यह पिछले साल के मुकाबले काफी कम है। पिछले साल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 1 करोड़ 87 लाख और मौसम आधारित बीमा के अंतर्गत 15. 23 लाख किसानों ने बीमा कराया था। आवेदकों की संख्या में भी गिरावट आई है। इसी तरह बीमित रकम में भी कमी आई है।
इन आंकड़ों में अब बढ़ोतरी नहीं होने वाली है क्योंकि बीमा के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई को खत्म हो गई है। इसके आंकड़ो के नेशनल क्रोप इंश्योरेंश पोर्टल पर अपलोड करने के लिए बैंकों को पंद्रह दिनों का अतिरिक्त समय दिया गया है। कुल मिलाकर इस साल पिछले साल के मुकाबले 70 प्रतिशत किसानों ने बीमा योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन दिया है।
योजना का दायरा सिकुडने के प्रमुख कारण विभिन्न राज्यों का इससे अलग रहने का फैसला करना है।
तेलांगना और झारखंड ने इस साल खरीफ सीजन में अलग होने का फैसला किया। गुजरात और मध्यप्रदेश ने भी यही किया। बिहार और बंगाल पिछले 2018 और 2019 के खरीफ सीजन में ही अलग हो गए थे। पंजाब कभी इस योजना में शामिल नहीं हुआ। फसल बीमा योजना की शुरुआत 2016 में हुई थी। इस योजना के अंतर्गत सर्वाधिक निबंधन महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ, हरियाणा और उत्तर प्रदेश रहे।

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