अक्षत सरोत्री
नई दिल्ली: पंचायत खबर में दो दिन पहले लगी खबर पर मोहर लग गई है। चंपई सोरेन की बगावत की अटकलों का खुलासा हमने दो दिन पहले ही कर दिया था। आज हमारी खबर पर उस समय पुख्ता मोहर लग गई जब चंपई सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया।
इसमें उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की है। चंपई सोरेन ने अपने पोस्ट में लिखा कि पिछले तीन दिनों से हो रहे अपमानजनक व्यवहार से भावुक होकर मैं आंसुओं को संभालने में लगा था, लेकिन उन्हें सिर्फ कुर्सी से मतलब था। मुझे ऐसा लगा, मानों उस पार्टी में मेरा कोई वजूद ही नहीं है, कोई अस्तित्व ही नहीं है, जिस पार्टी के लिए हमने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, इस बीच कई ऐसी अपमानजनक घटनाएं हुईं, जिसका जिक्र फिलहाल नहीं करना चाहता। इतने अपमान और तिरस्कार के बाद मैं वैकल्पिक राह तलाशने के लिए मजबूर हो गया।
चंपई ने कहा कि पिछले 4 दशकों के अपने बेदाग राजनीतिक सफर में मैं पहली बार भीतर से टूट गया। समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं। दो दिन तक चुपचाप बैठकर आत्म-मंथन करता रहा, पूरे घटनाक्रम में अपनी गलती तलाशता रहा। सत्ता का लोभ रत्ती भर भी नहीं था, लेकिन आत्म-सम्मान पर लगी इस चोट को मैं किसे दिखाता?
अपनों द्वारा दिए गए दर्द को कहां जाहिर करता? पूर्व सीएम चंपई सोरेन ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि जब सत्ता मिली, तब बाबा तिलका मांझी, भगवान बिरसा मुंडा और सिदो-कान्हू जैसे वीरों को नमन कर राज्य की सेवा करने का संकल्प लिया था, झारखंड का बच्चा- बच्चा जनता है कि अपने कार्यकाल के दौरान मैंने कभी भी किसी के साथ ना गलत किया, ना होने दिया।
इसी बीच हूल दिवस के अगले दिन मुझे पता चला कि अगले 2 दिनों के मेरे सभी कार्यक्रमों को पार्टी नेतृत्व द्वारा स्थगित करवा दिया गया है। इसमें एक सार्वजनिक कार्यक्रम दुमका में था, जबकि दूसरा कार्यक्रम पीजीटी शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरण करने का था।




