सब्जियों के राजा आलू के दाम में भारी गिरावट, हरी सब्जियों के कीमत में जारी है उछाल

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वर्षा वर्मा

​नयी दिल्ली: बरसात और बाढ़ के मौसम में भले ही हरी सब्जियों की कीमतों ने आम गृहिणी के किचन का बजट बिगाड़ दिया हो लेकिन सब्जियों का राजा कहा जाने वाला आलू ने गृहिणियों को राहत दी है।

दरअसल पिछले 20 दिनों में आलू के दाम में भारी गिरावट आई है। यहां तक की 55 फीसदी तक गिरावट आई है। आलू का औसत थोक मूल्य 2600-2800 रुपये प्रति क्विंटल से गिड़कर 1800-2000 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है।
राज्यों से शहरों में आ रही है आलू की खेप कर्नाटक से आ रही आलू की नई फसल के चलते कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि आलू की थोक कीमतों में भले ही गिरावट आई है, लेकिन खुदरा कीमतों पर ज्यादा असर पड़ता नहीं दिख रहा है। खुदरा बाजार में आलू अभी भी 40 से 45 रुपये प्रति किलो के भाव में ही बिक रहा है। इस लिहाज से देखें तो आलू की खुदरा कीमतों में पिछले दो महीनों से तेजी बनी हुई है। मई के बाद से आलू का भाव 25 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 45 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है लेकिन आलू की बढ़ी कीमतों का फायदा किसानों को नहीं मिल रहा है।

उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों से भी आलू की आवक बाजार में बढ़ी है। किसानों की फसलें कोल्डस्टोरेज सहित बाजार में पहुंचने लगी हैं। लखनउ के आलू कारोबारियों का कहना है कि जल्द ही इसका असर खुदरा बाजार पर भी दिखेगा और कीमतों में गिरावट आयेगी। दरअसल अभी थोक बाजार में आलू का भाव 1800 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है, जबकि बाजार में आलू का दाम 40 रुपये प्रति किलो के आसपास ही बना हुआ है।

बिचौलिए उठा रहे बढ़ी कीमतों का फायदा

कृषि मामलों के जानकारों की माने तो बाजार में आलू की बढ़ी कीमतों का फायद बिचौलियों को हो रहा है, जबकि किसानों को सिर्फ आधी कीमत ही मिल रही है। बाकी के सब्जियों में बाढ़ और बरसात के कारण आई तेजी का साफ असर बाजार पर दिख रहा है और गृहिणियों के किचन के बजट पर भी।

हालांकि जानकार य​ह भी कहते हैं कि 2020 के बाद इस साल आलू की कीमतों में थोड़ा सुधार हुआ था। मई के बाद से आलू के दाम बढ़ना शुरू हुए थे। शुरुआत में किसानों को ठीक दाम मिला, लेकिन अब दाम फिर गिड़ गए हैं।
हालाकि अब आलू की नई फसलों की आवक बाजार में शुरू हो चुकी है। शुरूआती दौड़ में फिलहाल कर्नाटक से आलू आ रहा है। अगले दो महीनों में उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से भी आलू की आवक शुरू हो जाएगा। जिसके बाद दाम और गिर जाएंगे।

लगातार घट रहा आलू का उत्पादन

हालाकि चिंता की बात ये है कि आलू की बढ़ती कीमतें इसलिए बाजार को प्रभावित कर रही थी क्योंकि विगत वर्षों की तुलना में इस साल आलू के उत्पादन में आई गिरावट और आत्यधिक गर्मी के चलते सब्जियों का उत्पादन कम होना वजह थी।
आलू के उत्पादन में भारी गिरावट

कृषि विशेषज्ञों की माने तो इस साल देश में आलू का उत्पादन 10 फीसदी तक गिरा है, जबकि पूरे देश के आंकड़ों को देखें तो उत्पादन पांच फीसदी तक कम हुआ है। सरकारी आकड़ों के अनुसार, देश में 2023—2024 में 567 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ, जो इसके पहले साल 2022—2023 के मुकाबले 34 लाख टन कम ​रहा।
केंद्रीय उपभोक्ता मामले,खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के प्राइस मॉनिटरिग डिवीजन के अनुसार, देशभर में आलू की औसत खुदरा कीमत 37.08 रूपये प्रति किलो है। बाजार में आलू औसतन 40 रूपये तक बिक रहा है, जबकि किसानों को प्रति किलो मात्र 18 से 20 रूपये ही मिल ​रहे है।

आलू की खेती छोड़ रहे किसान

सब्जियों के दामों में अस्थिरता और उतार चढ़ाव के कारण ज्यादातर किसान सब्जियों की खेती से मुंह मोड़ रहे हैं। आलू को ही देखें तो जब किसान आल उगाता है तो कई बार उसे उसका लागत मूल्य भी नहीं मिलता या बहुत ही कम दाम मिलते हैं। जिसके के कारण किसान आलू की खेती छोड़ ​रहे है और अन्य नकदी फसलों की ओर रूख कर ​रहे हैं।
यही कारण है आलू उत्पादक किसान लगातार सरकार से आलू पर समर्थन मूल्य दिये जाने की मांग करते रहे हैं जिससे किसानों को उचित मुनाफा मिल सके और वे आलू की खेती जारी रख सकें।

विशेषज्ञों का कहना है कि विगत तीन सालों से आलू उत्पादक किसान अपनी उपज घाटे में बेच रहे थे। इस साल मई मे दाम बढ़ने से किसानों को और अच्छे दाम मिलने की उम्मीद जगी थी लेकिन अब दामों में फिर गिरावट आ गई है। जो दाम बढ़े थे उसका लाभ बिचौलियों ने उठाया और किसान को लाभ न मिल सका। हालाकि आलू की खुदरा कीमत में गिरावट आती है तो इससे आम गृ​हणियों की बांछे खिल जायेंगी और किचन का बोझ कुछ हद तक कम होगा।

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