वाराणसी:भोजपुरी की गीत—गवनई की परंपरा को भोजपुरी सिनेमा से जोड़ते हुए हमेशा यह तर्क दिया जाता रहा है, कि भोजपुरी गानों मे अश्लीलता है। ज्यादातर गाने द्विअर्थी होते हैं लेकिन इन्हीं भोजपुरी की गीत गवनई की परंपरा को यदि यूनेस्को द्वारा विश्व की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी जाये तो यह सभी भोजपुरी भाषियों के लिए काफी सुखद है। जी हां हाल ही में यानी 1 दिसम्बर 2016 को भोजपुरी की गीत गवनई की परंपरा को यदि यूनेस्को द्वारा विश्व की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्रदान की गयी है।
भोजपुरी की परंपरा को आगे ले जाने के लिए विश्व प्रवासी भारतीय एवं भोजपुरी अध्ययन केन्द्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘भोजपुरी का भविष्य’ विषय पर गोलमेज वार्ता का आयोजन हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अपनी बात रखते हुए भारत में मारीशस के राजदूत जगदीश गोवर्धन ने कहा कि जहाँ मातृ संस्कृति का सम्मान होता है उन्नति वहीं होती है। यूनेस्को ने भी सभी मातृभाषाओं को समान महत्व दिया है। भोजपुरी की गीत गवई को यूनेस्को ने विश्व की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में अभी 1 दिसम्बर 2016 को मान्यता प्रदान कर दी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारत में जहां इसकी जड़ें हैं वहां अभी सम्मान मिलना बाकी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन, मारीशस की अध्यक्षा डॉ0 सरिता बूधू ने भोजपुरी की विभिन्न समस्याओं व चुनौतियों को शोध के माध्यम से हल करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भोजपुरिया इतिहास के पुनर्लेखन की आवश्यकता है और इसे आधुनिक समय के अनुसार विकसित करना होगा। भोजपुरी शिक्षा के माध्यम से भाषा के प्रति जागरूकता लायी जा सकती है, केवल संस्थान बनाने व आन्दोलन करने से कुछ नहीं होगा। भोजपुरी के ‘गीत गवई’ को यूनेस्को द्वारा जिस तरह सम्मान मिला है उसी तरह भारत में भी जल्द ही भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल कर सम्मान देना चाहिए।
वहीं विश्व भोजपुरी सम्मेलन के संयोजक डॉ अशोक सिंह ने कहा कि हमें अपनी संस्कृति का प्रचार प्रसार करना चाहिए। मातृभाषा भोजपुरी के नाम पर हमें एक होना चाहिए। इसमें कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने सराहनीय क्रिया कलापों द्वारा भविष्य में भोजपुरी अध्ययन केन्द्र भोजपुरी के विकास का केन्द्र होगा।
कई महत्वपूर्ण लोगों ने की शिरकत
इस परिचर्चा में वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा के प्रो गुरूचरण सिंह, विनोबा भावे विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष विजयकान्त धर दूबे, रवीन्द्र शाहावादी, डॉ जख्मी कान्त नीराला, प्रो राज बहादूर राय, डॉ सरोज गुप्ता, डॉ अजय ओझा, सुरेश रामवर्ण ने भी विचार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में आये हुए विद्वानों का स्वागत करते हुए भोजपुरी अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो सदानंद शाही ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में भोजपुरी के विकास हेतु ‘ अनिरुद्ध जगन्नाथ चेयर‘ की स्थापना के लिए राजदूत जगदीश गोवर्धन को एक प्रस्ताव पत्र सौपा। वहीं भोजपुरी के पोस्ट डाक्टोरल फेलो डॉ0 शैलेन्द्र कुमार सिंह ने अपनी पुस्तक भेंट की। इस कार्यक्रम बड़ी संख्या में भोजपुरी अध्ययन से जुड़े छात्रों ने शिरकत की।

