अनुपम ​की तरह तालाब,पानी व गांधी के लिए खरा रहना होगा:मीरा कुमार

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संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: अनुपम मिश्र की स्मृति में दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में स्मृति सभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि अनुपम व्यक्ति के रूप में नहीं है, लेकिन एक विचार के रूप में हैं, और रहेंगे। उन्होंने कहा कि गांधी, गाधीवाद और गांधीवादियों का सबसे बड़ा गुण है कि वे भारत की मिट्टी के लिए, भारत के सर्वसाधारण के लिए हमेशा प्रासंगिक बने रहते हैं।

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मीरा कुमार ने कहा कि वे प्रकृति प्रेमी थे। प्रकृति की छोटी—छोटी रचनाओं में भी बहुत कुछ ढूंढ़ लेते थे। तालाब खत्म होते जा रहे हैं। वे तालाब के लिए खड़े हुए। पानी के लिए खड़े हुए। गांधी के लिए खड़े हुए। यदि हमें अनुपम को याद रखना है तो हमें भी इन सबके लिए खड़े होना होगा। व्यक्ति के व्यक्तिव की महिमा इसी में है कि थोड़ा भी जानो तो बहुत कुछ हासिल कर लो। जिस चीज के लिए वे खड़े थे, उसके लिए सदैव लड़ते रहें यही उनकी सच्ची स्मृति होगी।anupam-mishr_ge-copy

अनुपम मिश्र के छात्र जीवन के मित्र वरिष्ट पत्रकार बनवारी ने उन्हें याद करते हुए कहा कि हम दोनो वैचारिक स्तर पर बड़े—बड़े समाजवादी नेताओं परिचित थे,लेकिन मैने कभी भी अनुपम को किसी नेता के घर जाते नहीं देखा। अनुपम मिश्र के पर्यावरण के प्रति झुकाव को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वे संकट—संकट कहकर पर्यावरण की तरफ नहीं गये। राजस्थान गये,वहां कोई कुंडी देखी, कलात्मकता देखी,लग गए सकारात्मक होकर उस काम में। उनके अंदर काम के प्रति उत्साह बहुत था, सन्यस्त भाव था, छोटी—छोटी बातों में कोई विधि दिख जाती थी। जितन सहज अनुपम को पाया उतनी सहजता किसी में नहीं दिखी। जो लिखा उसका मान नहीं, अभिमान नहीं, यश पाने की आकांक्षा लेस मात्र नहीं, और बिना आकांक्षा के जो यश मिला वो शायद किसी को नहीं प्राप्त हुआ। इस तरह देखें तो अनुपम मिश्र के पास कलाकार का मन, शिल्पकार की निष्ठा, सन्यासी की वृति और गृहस्थ का शिल्प था।
वहीं प्रो देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि अनुपम उन विरले लोगों में हैं जिनसे मुलाकात ज्यादा हुई लेकिन बात कम हुई। हमारे दौर के लोगों की यह खासियत रही है कि कई बार वे अपनी उपस्थिति से, मौन से, कर्म से अपना होना सार्थक करते रहे हैं। मेरे जीवन की शुरूआत ही तालाब से हुई। मेरे घर के सामने ही तालाब था। लेकिन तालाब के विषय में दृष्टि अनुपम को पढ़ने से विकसित हुई।

anapppa0739 साहित्यकार विश्वनाथ त्रिपाठी ने कहा कि अनुपम मिश्र जैसे लोग जहां जाते हैं वहीं सत्य देख लेते हैं और जब देख लेते हैं तो वहीं कुछ करने लग जाते हैं, और काया पलट हो जाता है। साहित्यकार अशोक वाजपेयी ने कहा कि अनुपम हिंदी के अनुपम गद्यकार थे। उनकी पुस्तक साफ माथे का समाज गद्य की महत्वपूर्ण पुस्तक है। उन्होने कहा कि वे हमें याद दिलाते रहे कि समाज को समाज को सामुदायिकता में विश्वास करना चाहिए। साधारण की महिमा को केंद्र में रखते हुए अनुपम दूसरे किसम की आधुनिकता को परिमार्जित करते हैं। उनके देख रेख में गांधी मार्ग दृश्य संपन्न होने के साथ सूर्य संपन्न भी रही। वे हमारे समय के उदग्र विचारक थे जिसने विचार और कर्म की दूरी को पाटा। अनुपम की छवी घोर अंधेरी सदी में एक उजली छवी थी। भारतीय जन में बहुत गहरा विश्वास उन्हें औरों से अलग करती है।
कांग्रेस नेता और अनुपम मिश्र के मित्र रहे जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि भवानी प्रसाद जी सहज जीवन शैली को निरायास अनुपम ने अपने में उतारा। ऐसा नहीं था अनुपम मिश्र ही अनायास ही ऐसे बन गये हों। विद्यार्थी जीवन से ही उनके रचना की दिशा निर्धारित हो चुकी थी। यह समय आ गया है कि आधुनिकता का दावा करने वाला समाज विशिष्ट से साधारण की ओर लौटे। दुनिया तकनीक को पीछे छोड़ कागज—कलम की ओर उदभट् हो इसी में उसकी सार्थकता है। अनुपम ने यही रास्ता दिखाया है।
राजनीतिक चिंतक योगेंद्र यादव ने कहा कि अनुपम मिश्र को उन्होंने पहले वाक से, फिर विचार से और आगे चलकर व्यक्तित्व से जाना। उनकी किताबें अलग किस्म के समाज शास्त्र से परिचय कराती हैं। अगर उनके विचार की ओर देखें तो उनकी सीख है कि समाज ज्ञान का श्रोत है और इस समाज को परंपरा के प्रति आस्था रखने वाला समाज बनना होगा। जहां तक सादगी का सवाल है, अनुपम मिश्र की सादगी में सहजता थी, वो बिना बताए थी। वो सहजता न तो दिखावे की थी,और न हीं ओढ़ी हुई थी। राजनीति में भी उनकी रूची थी,लेकिन उन्होंने छिछली राजनीति को छोड़ गहरी राजनीति करने का फैसला किया जो समाज निर्माण की ओर ले जाती है। योगेंद्र यादव ने सुझाव दिया कि अनुपम मिश्र की याद में अनुपम की बावड़ी गांवों में बनाई जाये। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि एक ऐसे किताब को पुरस्कृत करने की रूपरेखा तैयार हो जो कहती है कि उसपर कोई कॉपीराईट नहीं है। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रहे मुरली मनोहर प्रसाद सिंह ने कहा कि जो बोलने में लय थी, वही उनके गद्य में भी थी। उनका सादा जीवन आर्कषण पैदा करता है।
इस स्मृति सभा में देश भर के गांधीवादी,पर्यावरण वादी,सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने बड़ी संख्या में शिरकत की। सभा का संचालन सोपान जोशी ने किया।

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