अध्यक्ष जी (चंद्रशेखर) की पार्टी में अध्यक्षी को लेकर घमासान

मंगरूआ

नयी दिल्ली: समाजवादी जनता पार्टी (चंद्रशेखर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री कमल मोरारका के देहांत के बाद अध्यक्ष जी यानी पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर द्वारा स्थापित पार्टी में अध्यक्षी को लेकर घमासान मचा हुआ है। एक सप्ताह ही हुए हैं यानी 11 फरवरी को। राजधानी के नारायण दत्त तिवारी भवन में समाजवादी जनता पार्टी (चंद्रशेखर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री कमल मोरारका के दिवंगत होने के बाद उनकी अनुपस्थिती में पहली बार समाजवादी जनता पार्टी चंद्रशेखर के कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में कमल मोरारका को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। इसके पश्चात यह निर्णय लिया गया कि समाजवादी जनता पार्टी चंद्रशेखर का अगला राष्ट्रीय अधिवेशन पार्टी के संस्थापक व पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के कर्म स्थली उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में किया जायेगा। इसके साथ ही यह प्रस्ताव पारित किया गया कि श्यामजी त्रिपाठी अगले चुनाव तक राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे।


लेकिन मात्र एक सप्ताह बाद ही पार्टी में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी के दूसरे धड़े ने नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष को न सिर्फ पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए न सिर्फ कारण बताओ नोटिस जारी किया बल्कि उन्हें निलंबित करते हुए यह कहा गया कि उनकी नियुक्ति नियम सम्मत नहीं है।


क्या कहता है दूसरा पक्ष
समाजवादी जनता पार्टी चंद्रशेखर के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एल पी​ सिंह के हस्ताक्षर से एक पत्र जारी किया गया है जिसमें श्याम जी त्रिपाठी को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता एवं राष्ट्रीय महा​सचिव के पद से तत्काल निलंबित करने की बात कही गई है। त्रिपाठी पर आरोप लगाया है कि बिना राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एल पी सिंह और राष्ट्रीय मुख्य महा​सचित रवींद्र मनचंदा की अनुमति के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वर्गीय कमल मोरारका के निधन के पश्चात 11 फरवरी को बैठक बुलाई गई। यह बैठक पार्टी के संविधान के खिलाफ एवं अनुशासन हीनता की परिधि में किया गया कृत्य है। यह भी कहा गया है कि इस श्रद्धांजलि समारोह में उपस्थित होकर रवींद्र मनचंदा श्रद्धांजलि के बाद बैठक को स्थगित कर दिया था। क्योंकि आपने शोक सभा के बहाने बाकी सदस्यों को गुमराह कर बुलाया और खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कराया और मीडिया सोशल मीडिया के जरिए इसको प्रचारित भी कराया। जो कि पार्टी के संविधान के खिलाफ किया गया कृत्य है और इससे पार्टी के छवि को नुकसान पहुंचा है। इतना ही नहीं त्रिपाठी ने मनचंदा के इच्छा ​के विरूद्ध और उनके मना करने के बावजूद यह काम किया इसलिए उनको पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल मानते हुए पार्टी से निलंबित किया जाता है। हालांकि प्रोफेसर ललन प्रसाद सिंह द्वारा जारी इस पत्र में श्याम जी त्रिपाठी को 15 दिन के अंदर इन विंदूओं पर जवाब देने को कहा गया है।


साफ है अध्यक्ष जी यानी चंद्रशेखर जी के नहीं रहने और कमल मोरारका के अचानक देहांत होने के बाद पार्टी पर कब्जेदारी की लड़ाई शुरू हो गई है और पहले से ही कमजोर रही पार्टी यानी सिर्फ कागज पर चल रही और कभी-कभार सौ पचास लोगों के जुटान से रौनक बिखेरती अध्यक्ष जी की पार्टी आगामी दिनों में और बिखरी हुई नजर आयेगी।
हालांकि श्याम जी त्रिपाठी ने सोशल मीडिया के जरिए एक वीडियो संदेश जारी कर कहा है कि उन्हें जो पार्टी कार्यकारिणी की तरफ से अध्यक्षीय जवाबदेही मिली है उसका निर्वहन करते रहेंगे। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ लोग पार्टी को सक्रिय किये जाने के प्रयास में बाधा पैदा करने के लिए ऐसा कर रहे हैं जिससे राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों की सहमती नहीं है।

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