मध्यप्रदेश सरकार एमएसपी से अधिक पर करेगी गेहूं और चना की खरीदी

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नये कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का विरोध लगातार जारी है। किसानों लगातार इस बात को कह रहे है कि इन कानूनों के आने के बाद किसानों की स्थिति पहले से भी ज्यादा खराब हो जाएगी। और इसी को लेकर वह लगातार विरोध कर रहे है। वहीं सरकार का तर्क यह है कि इन कानूनों का उद्देश्य किसानों की आय को बढ़ाना है और इन कानूनों के आने के बाद भी मौजूदा व्यवस्था से कोई छेड़खानी नहीं की जाएगी। सकरार इन कानूनों के माध्यम से किसानों को केवल एक अतिरिक्त विकल्प प्रदान करना चहाती है। इसके लिए केंद्र सरकार के साथ-साथ अन्य राज्य सरकारें भी प्रयास कर रही है।

ऐसा ही प्रयास मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने भी किया है। मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल का दावा है कि सरकार एमपी के किसानों की इनकम, आय वर्ष 2022 के तय लक्ष्य से एक साल पहले ही दोगुनी कर देंगे। कमल पटेल ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की और ऐलान किया कि 15 मार्च से गेहूं के साथ चना, सरसों, मसूर की भी खरीदी होगी, साथ ही खरीद की सीमा को भी बढ़ा दिया गया है।

एक समाचार चैनल से बातचीत के दौरान कमल पटेल कहा कि इस बार गेंहू के साथ ही चना, सरसों और मसूर की खरीद शुरू होने से किसानों को अपनी फसलो के लिए एमएसपी से ज्यादा दाम मिलेगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 86 प्रतिशत छोटे किसान है। छोटे किसानों के पास इतना आर्थिक सहायता का बैकअप नहीं होता है कि वो अपनी फसल जून-जुलाई तक रोक सकें और यही कारण होता है कि जल्दी फसल बेचने के चक्कर में कम दाम में फसल बेच देते हैं। इसलिए इस बार तय किया गया है कि चना को गेहूं के साथ ही खरीदा जाएगा। ताकि किसानों को फायदा हो सके।

कमल पटेल ने बताया कि मंडी में एमएसपी पर चना, मसूर का 5100 और सरसों का 4650 रुपए प्रति क्विंटल भाव है। लेकिन राज्य सरकार की जो योजना इस समय प्रदेश में चल रही है उसमें किसानों को एमएसपी से ज्यादा फसल का भाव मिलेगा। चना, मसूर और सरसों 80 लाख मीट्रिक टन होगा। किसानों को एक हजार रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा भाव दिलाएंगे। इससे किसानों के पास 16 हजार करोड़ रुपये ज्यादा आएंगे।

उन्होंने कहा है कि मध्य सरकार के इस महत्वपूर्ण कदम का असर देश के दूसरे राज्य के किसानों पर भी पड़ेगा। स्वामित्व योजना को लेकर पटेल ने कहा कि इस योजना के आने से गांव के लोगों को भी बैंक से लोन मिल सकेगा और वो बिजनेस भी कर सकेंगे क्योंकि पहले गांव आत्मनिर्भर होंगे तभी देश आत्मनिर्भर होगा।

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