विहरे ली अंबिका भवानी हो रामा..आमी नगर में…

संजय दिघवारबी

दिघवारा: आस्था, भक्ति एवं विश्वास की असीमित सत्ता को अपने में समेटे हुए सारण जिला के आमी गांव में स्थित मां अंबिका भवानी मंदिर क्षेत्र के श्रद्धालुओ के साथ आस पास के दर्जनो जिलों के साथ ही पड़ोसी राज्य उतर प्रदेश व प्रदेश से सटे देश नेपाल के श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र बिंदु बना हुआ है। चैत्र व आश्विन नवरात्र पर यहाॅ बिशेष पूजन -अर्चना होने से नौ दिनो का मेला लगता है। सभी पर्व उत्सवो समेत सोमवार व शुक्रवार को भी भीड़ लगी रहती है। नये वाहनो की पूजा व नया ब्यवसाय शुरू करने से पहले भक्त माता का आशिर्वाद लेने जरूर पहुंचते है। नवविवाहित दंपति दीर्घ एवं सुखमय जीवन के लिए चुनड़ी व प्रसाद चढ़ा माता के दरबार में मत्था टेक आशिर्वाद की कामना से पंहुचते है।


मंदिर मे जाने का रास्ता
माँ अंबिका का प्राचीन मंदिर पटना-छपरा मार्ग पर आमी गांव में एक उंचे टीले पर अवस्थित है। पटना से 52 किलोमीटर व छपरा से 30 किलोमीटर और दिघवारा रेलवे स्टेशन व सडक मार्ग से 5 किलोमीटर की दूर पश्चिम एनएच 19 छपरा मार्ग से दक्षिण पर अवस्थित हैं। गंगा नदी के किनारे अत्यंत उंचे टीले पर मां अंबिका भवानी का प्राचीन मंदिर है,इसमें देवी की मिट्टी की पिंडी रूपी प्रतिमा स्थापित है।


मंदिर का इतिहास
सारण जिला का यह शक्तिपीठ अंबिका भवानी मंदिर आमी छपरा एवं सोनपुर के बीच अवस्थित है। मंदिर के पूर्व में हरिहरनाथ, पश्चिम में बाबा धर्मनाथ उतर में बाबा शिलानाथ शिल्हौड़ी तथा दक्षिण बिहटा के बटुकेश्वरनाथ बाबा चतुष्कोण में समान दूरी पर स्थित है तो त्रिभूजास्थिति में समान दूरी पर बाबा पशुपतिनाथ काठमांडू नेपाल, बाबा बैधनाथ देवघर व बाबा विश्वनाथ वाराणसी स्थित है। विभिन्न पौराणिक कथाओं एवं सारण गजटीयर पृष्ठ-464 के अनुसार मां अंबिका का यह प्राचीन मंदिर प्रजापति राजा दक्ष प्रजापति के यज्ञ-स्थल पर अवस्थित माना जाता हैं।यहीं पर माता सती अपने पति भगवान शिव का निरादर सहन कर पाने के कारण यज्ञ के हवनकुंड में कूदकर आत्मदाह कर लिया था। भगवान शिव को जब इस घटना की जानकारी मिली तो वे अत्यंत क्रोधित हो उठे और सती के शव को यज्ञ कुंड से निकालकर कंधे पर रख कर तांडव नृत्य करने लगें, जिससे प्रलय आशंका उत्पन्न हो गई।तब भगवान विष्णु ने अपने चक्र से सती के शरीर को टुकड़े टुकड़े में काट दिया और जहां जहां सती के अंग गिरे वह स्थान शक्तिपीठ कहलाया परन्तु हवन कुंड में जलते समय मां सती के शरीर की भस्म यहीं (यज्ञ-स्थल आमी) रह गई थी। यह स्थान सिद्ध-पीठ अंबिका स्थान आमी के नाम से जाना जाता है। वहीं सर्वमान्य मान्यता है कि मार्केण्डय पुराण तथा दुर्गासप्तशती में वर्णित है कि कालांतर में राजा वैश्य ने मिट्टी की भगाकार पिंड बनाकर इसी स्थान पर तीन वर्ष तक पूजा की थी, तब देवी ने प्रकट होकर उन्हें मनचाहा वरदान दिया। इस मंदिर में वहीं मिट्टी की भगाकार विशाल पिंड हैं। जो आज भी विद्यमान है। इसी की पूजा होती हैं। पूरे भारतवर्ष में मात्र यहीं एक मंदिर है जहां मिट्टी की पिंडी रूप मे स्थित मां की पूजा अर्चना होती हैं।


विशेष
मां अंबिका भवानी का मंदिर उतरायणी गंगा नदी तट पर मां अंबिका भवानी का उंचे टीले पर बिशाल व आकर्षक भवन लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। मंदिर के गर्भगृह मे स्थित कुंड मे हाथ डाल कर मन्नत मांगा जाता है तथा कुंड से प्राप्त प्रसाद को मुट्ठी मे बंद कर लाल बस्त्र मे छुपा कर रखने से मन्नत पुरी हो जाने पर कुंड से मिले प्रसाद व बस्तु को फिर कुंड मे लौटा दिया जाता है। वहीं आदि शक्ति माता अंबिका के गर्भगृह से सटे बाबा भोलेनाथ का बिशालकाय प्रतिमा स्थापित की गई है। जहां शक्तिस्वरूपा की आराधना के साथ बाबा भोलेनाथ की भी पूजा की जाती है ।

क्या कहते हैं पुजारी
पंडित नीलू तिवारी कहते हैं कि मां अंबिका भवानी मंदिर की प्राचीनता व महत्व को देखते हुए यहां श्रद्धालुओ की भारी भीड़ जुटती है। श्रद्धालुओ की सुविधा के लिए स्थानीय लोगो का भी अपेक्षित सहयोग रहता है। मंदिर आने वाले भक्त चुनरी -प्रसाद आदि से विधिविधान से शक्तिस्वरूपा की आराधना करते है। मां अंबिका भवानी से मनचाहा फल प्राप्त करते है। मां अंबिका सबों की मनोकामना पूर्ण करती हैं।
मां अंबिका महारानी न्यास समिति सचिव के प्रतिनिधि पंडित रितेश तिवारी ने बताया कि मंदिर के प्रति लोगों की अगाध श्रद्धा है। श्रद्धालुओ की भावना को देखते हुए मंदिर मे प्रशासन द्वारा बिशेष सुरक्षा ब्यवस्था मुहैया कराई जाती है । श्रद्धालूओं की सुविधा के लिए न्यास समिति तत्पर है। भगवती की कृपा से भक्तो की मुंहमांगी मुराद पूरी होती है । हालांकि कोरोना महामारी के दुसरे दौर में भी चैत्र नवरात्र पर प्रशासन ने मंदिर में आमजनों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। बावजूद सोशल मीडिया के माध्यम से मां अंबिका का दर्शन भक्तजनों को कराया जा रहा है।

(साभारः दैनिक जागरण)

मेरा गांव आमी अर्थात अम्बिका स्थान

 

 

 

 

 

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