सूखा एक्सप्रेस ना जी..ना जी..सूखा पैकेज..हां जी..हां जी

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संतोष कुमार सिंह

नयी दिल्ली: देश के कई राज्य सूखे से प्रभावित हैं। जनसंगठन और नागर समाज लगातार इस बात को उठा रहे हैं। लेकिन राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर कभी सूखे को मानती हैं तो कभी यह कहते हुए इंकार किया जाता है कि प्रदेश में सूखे की हालत उतनी गंभीर नहीं है जितना बताया जा रहा है। यानी सूखे को लेकर सियासती खींचतान जारी है। प्रधानमंत्री के बुलावे पर आज प्रमुख सूखा प्रभावित राज्यों उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कनार्टक के मुख्यमंत्री दिल्ली आये और प्रधानमंत्री से मुलाकात की ।

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प्रधानमंत्री के साथ पीएमओ में बैठक के लिए सबसे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहुंचे । नरेन्द्र मोदी के साथ बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में अखिलेश ने कहा कि राज्य के कुछ क्षेत्रों में सूखे की स्थिति है जबकि कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि के कारण फसलों को नुकसान हुआ है। किसानों को हुये नुकसान की भरपाई के लिये दोनों सरकारों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि हमने प्रधानमंत्री से बात की और बैठक में केंद्र से मुआवजे की मांग की गयी । उन्होंने कहा कि बुदेलखंड में पानी है जरूरत इस बात की है कि उसे गांव तक पहुंचाया जाये । इसलिए हमने केंद्र से टैंकर की मांग की है. हमें पानी की जरूरत नहीं है । उन्होंने कहा कि हमने जलसंकट से निपटने के लिए तैयारी पहले से ही शुरू कर दी थी ।

NEW DELHI, MAY 7 (UNI):- Prime Minister Narendra Modi (2nd L) and other cabinet ministers at a high label meeting with Uttar Pradesh Chief Minister Akhilesh Yadav, to discuss drought situation in Uttar Pradesh, in New Delhi on Saturday. UNI PHOTO-12U

केंद्र से माँगा 10,600 करोड़ रुपये का पैकेज

यूपी के सीएम के साथ हुई बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह भी मौजूद थे। यूपी सरकार ने केंद्र सरकार से 10,600 करोड़ रुपये के पैकेज की मांग की है। बैठक के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि इस बैठक से बुंदेलखंड के किसानों को उनका हक मिलेगा। इससे पहले अखिलेश सरकार ने केंद्र से भेजे गए पानी को लेने से इनकार कर दिया था। अखिलेश यादव ने बुंदेलखंड में भूख से लोगों के मरने की ख़बर को ग़लत बताया है। सरकार लोगों के लिए भोजन और पानी का इंतज़ाम कर रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र के पास राज्य को सूखे के लिए पिछले वर्ष आवंटित धनराशि का 1123.47 करोड़ रुपए, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के 4741.55 करोड़ रुपए की अवशेष राशि शीघ्र अवमुक्त कराने की मांग करते हुए 2015-16 में कुछ जनपदों में खरीफ की फसलों की बुवाई सामान्य से बहुत कम होने के कारण किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए 1261 करोड़ शीघ्र स्वीकृत करने तथा बुन्देलखण्ड और विन्ध्याचल में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत 200 मानव दिवस तथा अन्य जिलों के लिए 150 मानव दिवस की सीमा निर्धारित करने का अनुरोध किया।

अखिलेश ने माना..सूखे की भयावह स्थिति

अखिलेश यादव ने कहा कि बुन्देलखंड क्षेत्र में सूखे की स्थिति अत्यधिक भयावह बनी हुई है उन्होंने इस काम के लिए सबसे पहले पेयजल के दस हजार टैंकर उपलब्ध कराने के लिए केंद्र से आवश्यक निधि की मांग की और कहा कि क्षेत्र में लोगों को राहत देने के लिए मनरेगा की मजदूरी की दर 300 रुपए प्रतिदिन की जानी चाहिए। यादव ने कहा कि ओलावृष्टि के लिए 7543.14 करोड़ रुपए की मांग की गई थी लेकिन मात्र 2801.59 करोड़ रुपए की धनराशि राज्य सरकार को दी गई। इसी तरह से सूखा पीड़ितों के लिए 2057.79 करोड़ रुपए की मांग की गई लेकिन 934.32 करोड़ रुपए की धनराशि ही प्राप्त हुई है। उन्होंने केंद्र से शेष धनराशि शीघ्र स्वीकृत करके राज्य को उपलब्ध कराने की मांग की है।

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सीएम देवेंद्र फडणवीस भी मिले पीएम से

वहीं महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी पीएम से मुलाकात की। फडणवीस ने पीएम से राज्य के हालात के बारे में बात करते हुए मदद की मांग की है। फडणवीस ने 2000 करोड़ सूखाग्रस्त ज़िलों के लिए मांगे हैं। उन्होंने 7000 करोड़ सिंचाई प्रोजेक्ट के लिए मांगे हैं। वहीं अतिरिक्त 4000 करोड़ वर्ल्ड बैंक से मांगे हैं। महाराष्ट्र के हालात पर स्टडी करने के लिए इन तमाम बातों को लेकर फडणवीस ने केंद्र की मदद मांगी।

मॉडल वाटर लॉ बनाने की तैयारी में केंद्र सरकार

देश के कई हिस्सों में टेम्परेचर 40 डिग्री पार हो चुका है। वहीं, महाराष्ट्र के कई इलाके सूखे की चपेट में हैं। भारत में पानी को लेकर बीते 16 साल में सबसे बुरे हालात हैं। वाटर रिसोर्स और रिवर डेवलपमेंट सेक्रेटरी शशि शेखर के मुताबिक, “हालात और खराब हों, इसके पहले सरकार वाटर मैनेजमेंट के नए तौर-तरीके बनाने का प्लान कर रही है। सरकार किसानों को ड्रिप इरिगेशन के लिए फंड देगी। साथ ही, ग्राउंड वाटर के ज्यादा दोहन के लिए पेनल्टी लगाई जाएगी। इसके लिए एक मॉडल वाटर लॉ बनाया जाएगा।”

गौरतलब है कि कल ही प्रधानमंत्री ने जलसंकट की समस्या पर चर्चा के लिए तीनों प्रदेशों को बातचीत के लिए बुलाया था।

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