पूसा में ‘कृषि उन्नति मेले’ का आयोजन, प्रधानमंत्री करेंगे किसानों को संबोधित

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संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: राष्ट्रीय स्तर का कृषि उन्नति मेला आज से भारतीय कृषि अनुसंधान परिसर पूसा में शुरु हो गया जो 18 मार्च तक चलेगा । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राजधानी में कृषि अनुसंधान संस्थान में वार्षिक ‘कृषि उन्नति मेला’ को संबोधित करेंगे। साथ ही जैविक खेती पर एक पोर्टल का अनावरण करेंगे और किसानों को संबोधित करेंगे। मेले का विषय 2022 तक किसानों की आय दोगुना करना है। इस अवसर पर पीएम मोदी ‘कृषि कर्मन और दीन दयाल उपाध्याय कृषि विज्ञान प्रचार’ पुरस्कार प्रदान करेंगे। किसानों की आय दोगुनी करने पर थीम पवेलियन, सूक्ष्म सिंचाई पर लाइव प्रदर्शन, अपशिष्ट जल उपयोग, पशुपालन और मत्स्य पालन मेले के प्रमुख आकर्षणों में से हैं। मेले में बीज, उर्वरकों और कीटनाशकों पर भी पवेलियन (मंडप) स्थापित किए जाएंगे।’कृषि उन्नति मेला’ का उद्देश्य किसानों के बीच कृषि और संबद्घ क्षेत्रों में नवीनतम तकनीकी विकास के बारे में जागरुकता पैदा करना है।


क्या कहते हैं केंद्रीय मंत्री
कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने शुक्रवार को यहां कृषि उन्नति मेले में कहा कि सरकार किसानों की हालत को बेहतर बनाने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। इसी सिलसिले में उन्होंने ऑर्गेनिक खेती के लिए पोर्टल बनवाया है। गौरतलब है कि दुनिया में सबसे ज्यादा ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसान भारत में हैं। देश में ऑर्गेनिक खेती का रकबा भी लगातार बढ़ रहा है। राधामोहन सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए मेले में जैविक महाकुंभ का आयोजन भी किया गया है। इसके साथ ही किसानों को किस तरह नई टेक्नॉलजी से जोड़ा जा रहा है, इसका भी प्रदर्शन किया जा रहा है। भारत डिजिटल क्रांति और मोबाइल क्रांति के दौर से गुजर रहा है और मोबाइल की पहुंच गांव-गांव तक है। सरकार और किसान के बीच दोतरफा संवाद कायम करने में मोबाइल और इंटरनेट की अहम भूमिका के मददेनजर किसानों को सही समय पर सूचना देने के लिए सरकार की कई वेबसाइट, पोर्टल फोन सेवाओं के साथ कृषि एसएमएस की व्यवस्था तथा कई तरह के एप शुरू किए गये हैं।
देश भर से जुटे किसान
केन्द्र एवं राज्य सरकारों, विभिन्न संस्थाओं आदि द्वारा 800 से ज्यादा स्टाल लगाए गये हैं। थीम पेवेलियन के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि सूक्ष्म सिंचाई, नीम लेपित यूरिया, मिट्टी की जांच/सॉयल हेल्थ कार्ड और नतीजतन कम उर्वरक के उपयोग से किस प्रकार से फसल की लागत में कमी लाई जा सकती है। कृषि जैसे जोखिमपूर्ण व्यवसाय में फसल बीमा योजना कैसे व कितनी कारगर सिद्ध हो सकती है तथा आय सृजन के नये आयाम जैसे पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मुर्गीपालन आदि किसानों की आय बढ़ाने में कितने सहायक हैं। इस मेले में किसान खेतों पर भी प्रदर्शन देखेंगे।
कृषि अनुसंधान एवं विस्तार सम्बन्धी विशेष जानकारियां इस मेला का मुख्य आकर्षण है।

 

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