टीकाकरण गीत

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टीकाकरण गीत

“चल चल बहिनी हो, चल चल ननदो हो
चल चल ससुई हो, चल चल गोतनी हो
बड़की गोतिनिया के छोटकी ननदिया के
सबके बोलाव तूहूं, फेर न मौका आई
टीकाकरण बूथवा पर एएनएम दीदी आईं।
टीका लगवाई बबुआ के, रोग से बचाईं
हृष्ट पुष्ट बबुआ बनी, जग जीत आई,
टीकाकरण बूथवा पर आशा दीदी आईं
अबही न चेतब त जिंदगी भर पछताईब,
खेली खाई बबुनी त हमहु हलसाईब..
टीकाकरण बूथवा पर एएनएम दीदी आईं
छोटका बबुववा के हेपेटाईटिस बी लागी
छोटकी बबुनिका के बुस्टर दिआई
जान तूहूं ई टीका ..जैपनिज इसेफलाईटिस से बचाई
टीकाकरण बूथवा पर एएनएम दीदी आईं
मिशन इंद्रधुनषवा के सात रंग हउये
वैसे जैसे जिंदगी के सात ढंग हउवे
सब रंग मिली त जिंदगी मुसकाई
टीकाकरण बूथवा पर आशा बहिनी आईं
जी हां सरकार ने मिशन टीकाकरण शुरू किया है..विशेष रूप से वैसे बच्चों के जो कि नियमित टीकाकरण में छूट गये हैं या ड्राप आउट है। और गया के डोभी के प्राथमिक स्वास्थय केंद्र में 3.5 केजी के बच्चे को जन्म देने वाली निर्मला हो या गया जिले के पाटी गांव की सरोज देवी और संजू देवी अपने—अपने नवजातों के साथ मिशन इंद्रधनुष के लिए सजाये गये टीकाकरण बूथ की ओर जा रही हैं। मन में बस यही भाव है कि एक टीका कई बीमारियों से बचाव, अगर ऐसा है तो कौन माई बाप नहीं चाहेगा कि उसके बच्चे को टीका लगे। तभी तो इस इंद्रधनुषी टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के राज्य स्वास्थय समिति और यूनिसेफ ने काफी तैयारी की है, और ये तैयारी साफ दिख भी रही है स्वस्थ बच्चे को जन्म देने वाली निर्मला हो या पाटी गांव की सरोज या संजू देवी समझ गयी हैं कि टीका देने से थोड़ा बुखार आता है और यदि बुखार आया तो एएनएम दीदी लगे हांथो पारासिटॉमाल की गोली भी तो देती हैं। साफ कहती है कि बुखार आवे दहुं की होतई अईसहु लईकन बीमार न पड़ जाहे.. हम अपने बच्चें को टीका लगवईबे करेंगे कमायेके त जिंदगी भर हई। सरकार एतना कर रहल हई तो हम सब एतनो न कर सकही कि अपना बचवा के बूथ पर ले आउं। उम्मीद है मिशन इंद्रधनुष के इस चरण में बिहार के गया और बोधगया जैसे ईलाके में छूटे बच्चों को भी संपूर्ण टीकाकरण के दायरे में लाया जा सकेगा।”

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