“एक तरफ जहां हमारे देश में शिक्षा पर चर्चा सिर्फ शौचालय बनाने व शौचालय के रखरखाव और उसके निर्माण में सरकारी मदद तक के बहस तक सिमट गयी है वहीं इसी सप्ताह विश्व एडुकेशन फोरम में शिक्षा के भविष्य पर घोषणापत्र अपनाया गया।
रिपब्लिक आॅफ कोरिया के इंच्योन में समाप्त हुए वल्र्ड एडुकेशन फोरम की बैठक में अगले 15 वर्षों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में दूरगामी परिवर्तन का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया। इंच्योन घोषणा पत्र का वैश्विक शिक्षा जगत के लोगों ने स्वागत किया, जिसमें 100 देशों से भी ज्यादा देशों के सरकारी मंत्री, गैर सरकारी संगठन, और युवाओं के समूह शामिल थे। यह सभी देशों को सार्वभौमिक, समानता परक, और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा और जीवन के लिए बेहतर शिक्षा के अवसर मुहैया कराने को प्रोत्साहित करता है। यह घोषणा पत्र सतत विकास लक्ष्य में शिक्षा संबंधी लक्ष्य को पूरा करने का आधार तैयार करेगा जिसे कि संयुक्त राष्ट्र संघ में सितंबर में मान्यता दी जाएगी।
यूनेस्को के महानिदेशक ने कहा कि घोषणापत्र इस दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम है। ” इससे हमारा दृढ़ संकल्प प्रदर्शित होता है कि हम सभी बच्चों और युवाओं को उस तरह का ज्ञान और कौशल विकसित करना चाहते हैं जो कि उन्हें सम्मान पूर्वक जीवन जीने के लिए जरूरी है, ताकि वे अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करें और अपने समाज में एक जवाबदेह वैश्विक नागरिक के तौर पर पूरा योगदान दें। यह सरकारों को जीवन के जरिए सीख्नने के अवसर मुहैया कराने की दिशा में प्रोत्साहित करता है, ताकि लोग सतत रूप से फले फूलें और विकास करें। यह भरोसा दिलाता है कि शिक्षा ही वैश्विक शांति और सतत विकास की कुंजी है।”
इनच्योन घोषणा पत्र को वैश्विक स्तर पर सब के लिए शिक्षा ईएफए अभियान के उपर तैयार किया गया है, जो कि वर्ष 1990 में थाईलैंड के जोमटियेन में शुरू किया गया था और वर्ष 2000 में डाकर,सेनेगल में इसे फिर से दुहराया गया। ईएफए और शिक्षा को लेकर निर्धारित किये गये सहस्राब्दी विकास लक्ष्य के परिणाम स्वरूप उल्लेखनीय प्रगति हुई, लेकिन बावजूद इसके कई निर्धरित लक्ष्य जिसमें प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमिक उपलब्धता का लक्ष्य भी था, पूरा नहीं किया जा सका। वर्तमान में 58 मिलियन बच्चे आज भी स्कूल से बाहर हैं, इनमें से ज्यादातर लड़कियॉॅ हैं। इतना ही नहीं 250 मिलियन बच्चे बुनियादी कौशल भी हासिल नहीं कर पाये हैं, बावजूद इसके कि इनमें से आधे बच्चे स्कूलों में कम से कम चार साल गुजार चुके हैं। इंच्योन घोषणा पत्र को अवश्य ही ईफए और एमडीजी के महत्वाकांक्षी एजेंडा को पूरा करना चाहिए।
यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक एंथोनी लेक ने कहा कि,”अगर इस जेनरेशन के बच्चों को किसी न किसी दिन आज के विश्व में व्याप्त असमानता और भेदभाव को कम करना है, हमें अवश्य ही अपने सभी बच्चों को अच्छे तरीके से सीखने का अवसर देना चाहिए। अवश्य ही यही हमारा समेकित दृष्टिकोण वचनबद्धता होनी चाहिए।”
इंच्योन घोषणा पत्र को एडुकेशन 2030 फ्रेमवर्क फॉर एक्शन के जरिए लागू किया जाएगा जो कि सरकारों के लिए रोडमैप बनाया गया है और इस वर्ष के अंत तक सभी सरकारों को इस वर्ष के अंत तक अपनाना है। यह शिक्षा के लिए प्रभावी कानूनी और नीतिगत दिशानिर्देश मुहैया करेगा जो कि जवाबदेही,पारदर्शिता और प्रतिभागी गर्वनेंस के सिद्धांतों पर आधारित होगा। इसे प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए क्षेत्रिय स्तर पर समन्वय एवं शिक्षा से जुड़े इस एजेंडा की प्रभावी तरीके से प्रबंधन और मूल्यांकन की जरूरत होगी। इसके लिए ज्यादा फंड की आवश्यकता भी होगी विशेष रूप से उन देशों में जो कि गुणवत्ता पूर्ण,समेकित शिक्षा से अभी दूर हैं। यह घोषणा पत्र और फ्रेमवर्क देशों से यह आग्रह करेगा कि वे कम आय वाले देशों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर उचित खर्च किये जाने लायक टार्गेट का निर्धारण करे और आधिकारिक स्तर पर विकास मद को बढाए।
”एडुकेशन इंटरनेशनल जो कि विश्व में 30 मिलियन शिक्षकों और शिक्षा से जुुड़े कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है इसके अध्यक्ष सुसान हॉप गुड ने कहा कि, ”हम सब इस बात से सहमत हैं कि प्रत्येक छात्र को गुणवत्ता पूर्ण, निशुल्क जन शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है।” ”हालाकि किसी भी शिक्षा संबंधी लक्ष्य को पूरा करने के लिए, प्रत्येक कक्षा में प्रत्येक विद्यार्थी को निश्चित तौर प्रशिक्षित, पेशेवर तौर पर उत्तीर्ण, प्रोत्साहित करने वाला और सहयोगी शिक्षक अवश्य ही दिया जाना चाहिए। सभी के लिए गुणवत्ता परक शिक्षा मुहैया कराने के लिए शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत होगी। एडुकेशन 2030 के फ्रेमवर्क फॉर एक्शन लागू करने के लिए और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और इसे लागू करने के लिए यह मौलिक तौर पर जरूरी है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन हो और यह इस तरीके से विकसित की जाये कि वह सहज और समेकित व सहयोगपूर्ण संस्कृति विकसित की जा सके।”
शिक्षा सभी नये सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जरूरी है। यह बहुत ही जरूरी है कि गरीबी उन्मूलन हो, सबको समृद्धि मिले, आर्थिक विकास का दायरा व्यापक हो व इसके साथ ही शातिपूर्ण व सहिष्णु समाज का विकास हो। आज का घोषणा पत्र के जरिए साझे तौर पर इस विकास लक्ष्य तक पहुंचने का संक्लप व्यक्त करता है। इससे यह भी जाहिर होता है कि कैसे शिक्षा जीवन को रूपान्तरित कर सकता है।
समापन भाषण समारोह के वक्ताओं में एडुकेशन इंटरनेशनल के अध्यक्ष सुसान होपगूड, शिक्षा के अधिकार के विशेष रैपोर्टर किशोर सिंह, यूनेस्को एक्सक्यूटिव बोर्ड के चेयर मोहम्मद समेह एएमआर, यूएन ग्लोबल कंपैक्ट के कार्यकारी निदेशक जार्ज केल, यूएनएचसीआर के हाई कमिश्नर एनटोनियो गटेरेस वीडियो के जरिए,यूनिसेफ की उप कार्यकारी निदेशक गीता राव गुप्ता, विश्व बैंक समूह के ग्लोबल प्रैक्टिसेस के वाईस प्रेसिडेंट कीथ हानसेन, सेक्रेटरी जनरल आॅफ ला फ्रैंकोफोनी माईकल जीन, रिपब्लिक आॅफ कोरिया के उप प्रधानमंत्री हवांग वू यीओ, यूनेस्को के महानिदेशक इरीना बोकोवा शामिल थे।
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