महिला किसान स्मारिका चंद्राकर (successful farmer ) ने कायम की अनोखी मिसाल, लाखों की नौकरी छोड़ चुनी खेती-बाड़ी की राह

0
354

भावना त्रिपाठी
  भावना त्रिपाठी

जकल युवा लाखों के पैकेज के पीछे भागते है । एमएनसी कंपनीयों के चक्कर लगाते रहते है लेकिन छत्तीसगढ़ की रहने वाली स्मारिका ने लाखों की नौकरी छोड़ कर खेती करने का फैसला किया ।आपको बता दें कि स्मारिका किसान परिवार से ताल्लुक रखती है उनके पिता एक किसान है और स्मारिका एक एमएनसी कंपनी में काम करती थी । यहां उनका सालाना पैकेज 12 से 15 लाख का था । इसी दौरान उनके पिता की तबीयत बिगड़ गई और स्मारिका ने अपनी नौकरी छोड़कर पिता की जिम्मेदारी अपने कंधो पर ले ली।

 

पिता की जिम्मेदारी संभालने के लिए स्मारिका नें छोड़ी लाखों की नौकरी

स्मारिका एक सफल किसान है और खेती के जरिए वे लाखों रूपए कमा रही है लेकिन वे शुरू से किसान नहीं थी । उन्होंने रायपुर में कम्प्यूटर साइंस में बी ई किया और इसके बाद पुणे से एमबीए किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद फिर मल्टीनेशनल कम्पनी में नौकरी करने लगी। इस कंपनी में उनका सालाना पैकेज 12 से 15 लाख रुपए था। इस बीच स्मारिका के पिताजी की तबियत बिगड़ गई। यह उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट था। स्मारिका के पिता ने 2020 में 23 एकड़ में सब्जी की खेती शुरू की थी। इसी साल उनके पिता की तबियत खराब हो गई। दिल्ली में उनका लीवर ट्रांसप्लांट किया गया। इस ट्रांसप्लांट के बाद से उनका स्वास्थ्य खराब रहने लगी। स्मारिका ने पिता की जिम्मेदारी संभालने के लिए नौकरी छोड़ खेती बाड़ी की राह चुन ली।

ये भी पढ़ें…

नारियल मलाई… फल एक फायदे अनेक… पोषण के साथ-साथ परिधान भी

 

 

विशेषज्ञों की सलाह से किया कमाल

बचपन से ही स्मारिका ने घर में खेती बाड़ी होते देखा था। यही कारण था कि उन्हें खेती करने में परेशानी नहीं हुई। कृषि को और बेहतर तरीके से समझने के लिए वे कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेने लगी। इस सलाह से उन्हें बहुत लाभ पहुंचाया ।स्मारिका ने मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार सही बीज और सही फसल का चुनाव किया। इतना ही नही उन्होंने अपने खेत को आधुनिक फार्म बनाने के लिए जरूरी संसाधनों पर खर्च किया। परिणामस्वरूप अब उनके धारा कृषि फार्म से रोजाना 12 टन टमाटर और 08 टन बैंगन की पैदावार हो रही है। इसके साथ ही उनका सालाना टर्नओवर एक करोड़ से भी ज्यादा है।

 

ये भी पढ़ें…

ड्रैगन फ्रूट्स की खेती का बढ़ता चलन….क्या है नफा-नुकसान 

स्मारिका दे रही हैं लोगों को रोजगार

स्मारिका खुद तो लाभ उठा ही रही है इसके साथ ही वे आस-पास के तीन गांवों के 150 लोगों को रोजगार भी दिया है। छत्तीसगढ़ के अलावा उनके खेत में उगाए गए बैंगन और टमाटर की सप्लाई दिल्ली, बिहार, ओडिशा, उत्तरप्रदेश और आंध्र प्रदेश में हो रही है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि इस वक्त तक उनके पास 19 एकड़ में बैंगन लगा हुआ है।इससे पहले उनके खेत में करेला, लौकी और खीरा लगा हुआ था। वैसे तो स्मारिका अपनी फसलों को स्थानीय मंडी में ही बेचती हैं पर आंध्र प्रदेश और ओडिशा की मंडियों में भी अपनी सब्जियों को सप्लाई करती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here