15 वां वित्त आयोग: 70 बनाम 30 के फार्मूले पर काम करेंगे मुखिया,जिला परिषद व पंचायत समिति

 

अमरनाथ

  • मुखिया जी को 70 फीसदी, बाकी 30 फीसदी जिला परिषद व पंचायत समिति के हवाले

पटना: कोरोना काल में पंचायतों की जवाबदेही तो बढ़ी ही है, साथ ही सरकार की निर्भरता भी। बाहर से गांव पहुंचे लोगों के क्वारंटाईन से लेकर उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाने और काम के इच्छुक लोगों को मनरेगा के तहत चलाये जा रहे विभिन्न कार्यों में काम देने की महत्ती जिम्मेवारी पंचायतों पर आन पड़ी है। इस बीच बिहार सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं को मिलने वाली राशि का हिस्सा तय कर दिया है। इसके तहत अब 70 प्रतिशत हिस्सा बिहार के मुखिया यानी ग्राम पंचायतों को जाएगा वहीं 30 प्रतिशत हिस्से का बंटवारा ग्राम पंचायत स्तर पर अन्य प्रतिनिधियों के बीच होगा। इसका मतलब हुआ कि बाकी 30 प्रतिशत राशि पंचायत समिति और जिला परिषद के बीच बांटा जाएगा।

पहले क्या था प्रावधान
गौरतलब है कि 14 वें वित्त आयोग के अनुदान में मिलने वाली पूरी रकम ग्राम-पंचायत को जाती थी लेकिन 15 वें वित्त आयोग की अनुशंसा से मिलने वाली राशि ग्राम-पंचायतों के साथ साथ पंचायत परिषद और जिला परिषद को भी दी जाएगी। 15 वें वित्त आयोग की अनुशंसा को इसी वित्तीय वर्ष से लागू किया जाना है। पंचायती राज विभाग से मिली जानकारी के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 में केंद्र से 15 वें वित्त आयोग अनुदान के तौर पर राज्य को 1508 करोड़ मिलेंगे। जो दो किस्तों में दी जाएगी।​
सीधे पंचायत के खाते में पहुंचेगा पैसा
विभागीय सूचना के मुताबिक केन्द्र से राशि प्राप्त होने पर उसे सीधे संबंधित पंचायतों के बैंक खातों में भेज दी जाएगी। पंचायतों की आबादी के अनुरूप राशि का बंटवारा होगा। अधिक आबादी वाले पंचायतों को अधिक राशि दी जाएगी। आबादी की गणना 2011 की जनगणना के आधार पर की जाएगी। वित्त आयोग ने यह भी साफ किया है कि इस राशि का उपयोग पंचायतों में विकास कार्य के साथ-साथ पेयजल आपूर्ति में भी की जा सकेगी। 15 वें वित्त आयोग में भले ही ग्राम पंचायत की 30 फीसदी राशि काट ली गई हो, लेकिन ग्रामीण इलाकों के विकास के लिए मनरेगा पर ग्राम पंचायतों पर पर्याप्त अधिकार मिला हुआ है, और इसके लिए बजटीय आवंटन की कमी नहीं होगी।

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