पंचायत खबर टोली
रांची: प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी 19 नवंबर यानी आज का दिन विश्व शौचालय दिवस के रूप में मनाया गया। इस वर्ष का थीम था। वैसे तो 2015 में घोषित सतत विकास लक्ष्य के तहत 2030 तक सभी के पास शौचालय सुविधा को सुनिष्चित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन झारखंड में यह लक्ष्य रखा गया है कि प्रदेश 2019 की शुरूआत तक पूरे राज्य को खुले में शौच से मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य पूरा कर लेगा। इसी लक्ष्य की दिशा में कदम बढ़ाते हुए आज यूनिसेफ ने राज्य के अलग—अलग महकमों के साथ मिलकर विश्व शौचालय दिवस के अवसर पर लोगों को स्वच्छता के अभ्यास को अपनाने के लिए प्रेरित करने की दिशा में अभियान चलाया। गौरतलब है कि इस वर्ष के विश्व शौचालय दिवस का थीम रखा गया है – ‘टाॅइलेटस एंड जाॅब्स’।
क्यों जरूरी है शौचालय
स्वच्छता या गंदगीलोगों के जीवन को प्रभावित करता है। शौचालय, मजबूत अर्थव्यवस्था के निर्माण, बेहतर स्वास्थ्य और लोगों की सुरक्षा और गरिमा, खासकर महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा और गरिमा के लिए महत्वपूर्ण है। कार्यस्थल और घरों पर शौचालय की अनुपलब्धता लोगों पर काफी बुरा असर डालती है। इसके परिणाम स्वरूप, खराब स्वास्थ्य, कार्यस्थल पर अनुपस्थिति, उदासीनता, एकाग्रता में कमी, थकावट और उत्पादकता में कमी के रूप में सामने आता है। स्वच्छता और साफ-सफाई के अभाव के कारण होने वाली बीमारी से उत्पादकता प्रभावित होती है। कई देशों की जीडीपी में इसके कारण 5 प्रतिषत तक की कमी हो सकती है।
क्या कहते हैं आंकड़े
भारत में शौचालय सुविधा के अभाव के कारण 50 करोड़ से अधिक लोग खुले में शौच करते हैं। यूनिसेफ झारखंड की प्रमुख, डा. मधुलिका जोनाथन कहती हैं, ‘‘शौचालय की उपलब्धता बहुत सारे बच्चों की जिंदगी बचा सकती है। उन देशों में जहां बड़े पैमाने पर लोग खुले में शौच करते हैं, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर काफी है। इसके अलावा, उन देशों में कुपोषण के शिकार बच्चों की संख्या, गरीबी और आर्थिक विषमता भी काफी पाई जाती है।’’
कार्यस्थलों, स्कूलों और संस्थानों में महिलाओं और लड़कियों के लिए अलग शौचालय की सुविधा महिलाओं की कार्यक्षमता में वृ़िद्ध करता है। इससे समाज में महिलाओं की भागीदारी में भी वृद्धि होती है।
स्वच्छ भारत मिशन रणनीति
झारखंडमें स्वच्छ भारत मिशन के तहत न केवल गुणवत्तापूर्ण शौचालय के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है, बल्कि शौचालय के उपयोग और रखरखाव के लिए लोगों के व्यवहार परिवर्तन पर भी जोर दिया जा रहा है। लोगों के व्यवहार में परिवर्तन और शौचालय निर्माण के लिए बहु हितधारकों का स्व सहायता समूह, झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रोमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) और सहकारी एवं ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी) के साथ साझेदारी महत्वपूर्ण है। सभी साझेदारों के बीच समन्वय से ही स्वच्छ झारखंड के लक्ष्य की प्राप्ति की जा सकती है।
सभी कार्यस्थलों, संस्थानों और ढ़ाबाओं पर अनिवार्य रूप से शौचालय की सुविधा होनी चाहिए। इस कार्य हेतु सिविल सोसाइटी, एनजीओ, सामुदायिक संस्थाओं और प्रभावशाली लोगों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है।
क्या है वर्तमान स्थिति
केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के आईएमएस (इंटिग्रेटेड मेनेजमेंट एंड इंफोरमेशन सिस्टम) के अनुसार, झारखंडमें 1313 गांव और 225 पंचायत खुले में शौच से मुक्त किया जा चुके हैं। झारखंड कैबिनेट ने खुले में शौच से मुक्त ग्राम पंचायतों को चिन्हित करने और मान्यता प्रदान करने के लिए तीन स्तरीय सत्यापन प्रक्रिया को मंजूरी दी है।
2 अक्टूबर 2014 से अब तक पिछले दो सालों में शौचालय निर्माण में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। झारखंडमें अभी भी 80 प्रतिशत घरों में शौचालय की सुविधा नहीं है। (एनएसएसओ 2016)।
विश्व शौचालय दिवस पर दिन भर चला कार्यक्रम
– विश्व शौचालय दिवस सभी लक्षित पंचायतों में मनाया गया
-खुले में शौच से मुक्त ग्राम पंचायतों में गौरव यात्रा निकाला गया
– ग्राम निगरानी समिति पंचायतों में लोगों द्वारा शौचालय के उपयोग की निगरानी किया गया
– स्कूलों में बच्चे खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोने की शपथ दिलाई गई
– स्कूलों में इस अवसर पर स्वच्छता आधारित क्विज, पोस्टर प्रतियोगिता आदि आयोजित किए गये
– स्थानीय निकायों, जैसे कि पंचायत और नगर निगम/नगरपालिकाके प्रतिनिधि अभियान में हिस्सा लिया