केवल गेहूं की बोआई नहीं, खर-पतवार प्रबंधन पर भी दें ध्यान

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पंचायत खबर टोली
मऊ : अगेती खेती आगे—आगे, पछिला खेती भागे जोगे। हमारे किसान भाई भाग्य के भरोसे नहीं रहना चाहते और तैयारी जोर शोर से चल रही है। किसान रबी की तैयारी में लगे है। चास पर पास फेरकर यह सुनिश्चित कर लिया है कि गेंहूं की पैदावार अच्छी हो। पटवन भी हो रहा है, और खेत में खाद भी डाले जा रहे हैं। कोशिश है कि अगेती खेती की जाये। इस बीच कृषि वैज्ञानिकों का सुझाव है कि गेहूं की अगेती व मध्यम प्रजातियों में खरपतवार नियंत्रण समय से होना अत्यावश्यक है।

gehunnnnnबेहतर प्रबंधन, भरपूर फसल
पहले प्रबंधन होने से फसल के नुकसान की संभावना तो देर होने पर उसके कल्ले व बढ़वार प्रभावित होती है। ऐसे में खरपतवार नियंत्रण के लिए समय से तैयार होना किसानों के सामने चुनौती होगी। चौड़ी पत्ती के साथ गेहूं का मामा, बनरी सहित पतली पत्ती के खरपतवारों को नष्ट करने में रसायन के साथ समय का बहुत बड़ा महत्व है। कृषि विशेषज्ञ ने प्रखर धूप निकलने के बाद भी दवा के छिड़काव की सलाह दिया है। इसके साथ ही खरपतरवारनाशी रसायनों को उर्वरक में मिलाकर छिड़कने की बजाए पानी के साथ स्प्रे करने पर बल दिया। नाजिल से सीधे छिड़काव करते हुए पीछे की ओर चलते हुए दवा का छिड़काव करना चाहिए। इससे प्रक्षेत्र में पड़ चुकी दवा की कड़ी न टूटने की बात को लेकर किसानों को सचेत किया गया है।

gehanlargeक्या कहते हैं विशेषज्ञ

कृषि उप निदेशक डा.आशुतोष मिश्र के मुताबिक कि गेहूं में मुख्यत: चौड़ी व पतली पत्ती के खरपतवारों का प्रकोप होता है। चौड़ी पत्ती में बथुआ, कृष्णनील, जंगली मटर, भटकोईंया आदि प्रजातियां आती हैं। इनसे नियंत्रण के लिए 13.5 ग्राम सल्फाेसल्फूरान प्रति एकड़ की दवा का प्रयोग पानी में मिला कर करना चाहिए। पतली पत्ती में जंगली जई, गेहूं का मामा आदि आते हैं। इनके लिए मेट्राब्यूजिन 20 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ के लिए निर्धारित की गई है। गेहूं के जिस खेत में चौड़ी और पतली पत्ती दोनों प्रकार के खरपतरवार हो वहां पर मेट सल्फूरान आठ ग्राम मात्रा प्रति एकड़ के लिए प्रयाेग किया जाना चाहिए। बाजार में यह टोटल या आलग्रिप के नाम से उपलब्ध है। डा. सिंह ने किसानों को सचेत करते हुए बताया कि खरपतवार नाशी रसायनों का प्रयोग कभी भी उर्वरक या बालू में मिलाकर नहीं करना चाहिए। इससे उसका प्रभाव नहीं पड़ता। स्प्रे से छिड़काव में सावधानी के प्रति सचेत करते हुए बताया कि इसमें फ्लैटपैन नाजिय या कट नाजिल का ही प्रयोग करें। दवा का छिड़काव करते समय नाजिल को दाएं-बाएं न घुमाकर हाथ को सीधा रखें। दवा छिड़कते समय पीछे की ओर बढ़ना चाहिए। आगे बढ़ने पर पैरों के चलने से दवा का चक्र टूट जाता है और वह उस स्थान पर प्रभावी नहीं होता।

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स्टीकर मिलाकर दवा का करें प्रयोग
डा.मिश्र ने बताया कि बाजार में उपलब्ध स्टीकर का प्रयोग दवा को पत्तियों पर चिपकाने के लिए छिड़काव के समय अवश्य करें। स्टीकर उपलब्ध न होने की दशा में डिटरजेंट पाउडर या शैंपू का प्रयोग करने से भी दवा पत्तियों पर चिपक जाती है। इससे खरपतवार के नष्ट होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

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