पंचायत खबर टोली
मऊ : पवित्र तमसा के पावन तट पर स्थित ढेकुलियाघाट श्मशान को नवजीवन की उम्मीद बंधी है। लेकिन यह कार्य सरकार के भरोसे नहीं बल्कि समाजसेवी संगठनों और कुछ निजी प्रयासों के जरिए हो रहा है। अपने जीर्णोद्धार की बाट जोह रहे इस पवित्र श्मशानघाट की सुधि लेने कोई सरकारी महकमा नहीं आया। हालांकि बसपा सांसद ने यहां रास्ता, घाट व शवदाह स्थल का निर्माण कराया था जो कि पूरी सदी में यहां हुए कार्य का प्रमाण मात्र माना जा सकता है। बताते चलें की पूर्व बसपा सांसद सालिम अंसारी द्वारा इस स्थल पर सड़क, शवदाह गृह और घाट का निर्माण कराया गया। इस दाैरान नगरपालिका परिषद द्वारा कई बार इसके जीर्णोद्वार की कार्ययोजना बनाई गई लेकिन वह मूर्त रूप नहीं ले सकी।
योजना के अब तक मूर्तरूप न ले पाने की दशा में धूप, शीत और वर्षा को सहते हुए लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करते हैं। अतिक्रमण की जद में सिमट रहे इस श्मशानघाट की दुर्दशा को देखते हुए कुछ समाजसेवियों ने इसे नवजीवन देने का बीड़ा उठाया। सब एक साथ बैठे, विचार-विमर्श को त्वरित रूप देते यात्री हाल का निर्माण प्रारंभ कर दिया गया है। नया घाट, जल व सुरक्षा प्रबंधन की पूर्ण योजना के बीच श्मशान को नया रूप देने को यह संकल्पित दिख रहे हैं।
व्यवसायी मुन्ना बर्नवाल बताते हैं कि चार माह पूर्व अपने रिश्तेदार के शवदाह के समय श्मशान की दुर्दशा देखने के बाद परिवार के सदस्याें ने यहां यात्री प्रतीक्षालय बनवाने के साथ शव के साथ आए लोगों की सुविधाओं का विकास करने के निर्णय लिया। संस्कार की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद इस पर विमर्श कर योजना को मूर्त रूप दिया जा रहा है। इस समय 84 फीट लंबा और 225 फीट चौड़ा प्रतीक्षालय का निर्माण कराया जा रहा है। इसके साथ ही शव यात्रियों के लिए जल व विद्युत प्रबंधन के साथ एक और शवदाह स्थल का निर्माण कराया जाएगा। प्रतीक्षालय से घाट तक के स्थान तक चबूतरा का निर्माण भी इस दौरान किया जाएगा। इस दौरान स्थानीय लोगों द्वारा भी इस स्थल पर गंदगी करने के साथ अतिक्रमण भी किया जा रहा है। फिलहाल तो इस स्थल पर समाजसेवी परिवार के प्रयास से इस स्थल के स्वरूप को बदलने की कवायद जारी है।
चारदीवारी से होगा अतिक्रमण पर रोक
इस घाट के संरक्षक लालचंद कहते हैं कि यात्री प्रतीक्षालय बनने से लोगों को बहुत ही राहत हो जाएगी। इसके साथ ही अतिक्रमण से घाट की सुरक्षा के लिए चहारदीवारी व अन्य प्रबंधन करना भी अति आवश्यक है। इस दशा में समाजसेवी व अन्य लोगों को आगे आना होगा। जन सहयोग से यह निर्माण और आसान और उम्दा हो सकता है।


