विश्व रेडियो दिवस: भारत के ग्रामीण अंचल में आज भी सूचना का सशक्त साधन है रेडियो

रेडियो वर्षों से सूचना प्राप्त करने का एक सशक्त साधन रहा है और अगर गांव देहातों की बात करने तो आज भी इसका प्रभाव ग्रामीण जीवन पर स्पष्ट देखा जा सकता है। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने जनता से संवाद के लिए इसी माध्यम का चयन किया। विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रेडियो के सभी श्रोताओं को शुभकामनाएं दीं और कहा कि रेडियो एक शानदार माध्यम है, जिससे सामाजिक संपर्क गहरा होता है।

प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा, “विश्व रेडियो दिवस की शुभकामनाएं! रेडियो के सभी श्रोताओं को बधाई और हमें उन सभी पर गर्व है जो नवीन सामग्री और संगीत के साथ रेडियो को आकर्षक बनाए हुए हैं। यह एक शानदार माध्यम है, जो सामाजिक संपर्क को गहरा बनाता है। व्यक्तिगत रूप से मन की बात के माध्यम से मैंने खुद इसके सकारात्मक प्रभाव को महसूस किया है।”

दरअसल, 1945 में आज ही के दिन संयुक्त राष्ट्र में रेडियो से पहली बार प्रसारण किया गया था। इसी को ध्यान में रखते हुए 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस घोषित किया गया। औपचारिक रूप से कहे तो पहला रेडियो दिवस 2012 में मनाया गया। रेडियो ना सिर्फ सूचना के आदान-प्रदान करने का सशक्त माध्यम है बल्कि समाज को शिक्षित करने में भी इसने अपनी अहम भूमिका निभाई है। इसकी पहुंच हर उम्र में है। रेडियो सस्ता है। ऐसे में इसकी लोकप्रियता भी सबसे ज्यादा है। यह सूचना का सबसे शक्तिशाली और विश्वसनीय माध्यम है। साथ ही साथ रेडियो सूचना का सदियों से पुराना माध्यम बना हुआ है। इसका इस्तेमाल संसार की दुनिया में अब भी खूब होता है। विश्व रेडियो दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य जनता और मीडिया के बीच रेडियो के महत्व को बढ़ाना है। साथ ही साथ लोगों के बीच जागरूकता फैलाना भी है।

भारत में रेडियो की कहानी

भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत मुंबई और कोलकाता में वर्ष 1927 में हुई। दो निजी स्वामित्व वाले ट्रांसमीटरों से प्रसारण सेवा शुरू हुई। पूर्व में मुंबई के रेडियो क्लब द्वारा 1923 में पहला कार्यक्रम प्रसारित किया गया। मुंबई और कोलकाता की निजी ट्रांसमीटरों को 1930 में सरकार ने अपने नियंत्रण में ले लिया। नाम भारतीय प्रसारण सेवा यानी इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन रखा गया। 1936 में ऑल इंडिया रेडियो नाम पड़ा और 1957 से वर्तमान में प्रचलित आकाशवाणी नाम दिया गया।

पीएम की मन की बात ने रेडियो को उबारा

14 अक्तूबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकाशवाणी से मन की बात का प्रसारण शुरू किया। प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को मन की बात में प्रधानमंत्री ने युवाओं और देशवासियों को राष्ट्रप्रेम, एकता, अखंडता से जोड़ने, विकास और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र के बिंदुओं पर सारगर्भित विचारों से जहां देशवासियों को समरसता का संदेश और ऊर्जा देते हैं वहीं रेडियो के बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय.. उद्घोष को साकार करने के साथ रेडियो प्रसारण को इलेक्ट्रोनिक चैनलों की प्रतिस्पर्धा में बनाए रखने के लिए सेतु का काम किया।

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